संदीप त्रिपाठी डॉक्टर या हैवान?, गलत ऑपरेशन और आयुष्मान कार्ड के दुरुपयोग, स्थाई विकलांग करने का लगा पांचवा आरोप, पीड़ित ने कलेक्टर जनदर्शन में लगाई न्याय की गुहार, जन दर्शन में त्रिपाठी के गलत ईलाज का लग रहा अम्बार कार्यवाही कब ?
सरगुजा समय अंबिकापुर: कहते है की एक डॉक्टर मरीजों के लिए भगवान होता है क्योंकि एक डॉक्टर ही वह इंसान होता है, जो भगवान के बाद इंसान को जीवनदान दें सकता है, लेकिन यहाँ शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी अब डॉक्टर कम यमराज और हैवान ज्यादा दीखते नजर आ रहे है, इस डॉक्टर ने डॉक्टरी पेशा को कलंकित करके रख दिया है। संदीप त्रिपाठी के लगातार आम नागरिकों के गलत ईलाज करने एवं स्थाई विकलांग बनाने के शिकायतों से उन अंबिकापुर के तमाम अर्थो के डॉक्टरों पर बड़ा सांवलिया निशान खड़ा कर दिया है।

जिस हिसाब से संदीप त्रिपाठी के गलत ईलाज से मरीज स्थाई विकलांग बनते जा रहे है उससे सरगुजा के तमाम लोगों का भरोसा अंबिकापुर के अर्थो के डॉक्टरों से उठता जा रहा है और जिस कारण से अब आम नागरिकों के द्वारा किसी भी अर्थो के ईलाज के लिए रायपुर का रुख किया जा रहा है।
हाल फिलहाल में घटी एक घटना देखने को मिली की एक वृद्ध महिला सड़क पर गिर गई जिसके बाद उन्हें ईलाज के अंबिकापुर के निजी अस्पताल एवं शासकीय अस्पताल ले जाया गया जहाँ एक्सरे करने के बाद कमर के पास फ्रेक्चर दिखा जिसका ऑपरेशन करना था लेकिन वृद्ध महिला ने यह कहते हुए यहाँ ऑपरेशन कराने से मना करा दिया की डॉक्टर संदीप त्रिपाठी कई लोग का गलत ऑपरेशन करके स्थाई विकलांग कर दिया है, जिसके बाद वृद्ध महिला के परिजनों ने रायपुर के VY हॉस्पीटल में लेजाकर ऑपरेशन करवाया और अंबिकापुर वापस आए।
सबसे दुर्भाग्य की बात यह है की एक शासकीय डॉक्टर जिसके द्वारा अपनी पत्नी के नाम से दयानिधि अस्पताल चलाया जा रहा है के द्वारा जब संदीप त्रिपाठी नर्सिंग होम एक्ट के प्रभार में था तब वह बड़े आसानी से लगभग एक वर्ष पूर्व 09 बेड वाले अस्पताल को नियमविरुद्ध तरीके से 11 बेड बढ़ा कर 20 बेड का अस्पताल बना लिया। और बेखौफ होकर निजी अस्पताल दयानिधि का संचालन कर रहा है, लगातार संदीप त्रिपाठी के द्वारा गलत ईलाज करने के कारण स्थाई विकलांग होने वाले मरीजों ने कलेक्टर जनदर्शन में डॉक्टर त्रिपाठी पर कठोर कार्यवाही करने की शिकायत कर रहे है बावजूद उसके डॉक्टर त्रिपाठी पर स्वास्थ्य विभाग के द्वारा डॉक्टर त्रिपाठी को निलंबित नहीं किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
जबकि तत्कालीन कलेक्टर विलास भोस्कर ने डॉक्टर संदीप त्रिपाठी के आयुष्मान वाले लूट एवं गलत ईलाज के मामले में तत्काल नर्सिंग होम एक्ट के प्रभार से हटाने एवं दयानिधि अस्पताल में आयुष्मान योजना में हुए भुगतान की जाँच कर डॉक्टर त्रिपाठी को निलंबित करने का निर्देश दिया था, विभाग द्वारा नर्सिंग होम एक्ट के प्रभार से डॉक्टर त्रिपाठी को तो हटा दिया गया लेकिन निलंबन की कार्यवाही नहीं की गई, अब देखने वाली बात यह है की लगातार डॉक्टर त्रिपाठी के द्वारा गलत ईलाज करके स्थाई विकलांग बनाने एवं आयुष्मान योजना से पैसा लेने के बावजूद मरीजों से कैश पैसा लेने के शिकायत पर वर्तमान कलेक्टर अजीत वसंत के कार्यवाही करते है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें की संदीप त्रिपाठी एवं दयानिधि अस्पताल पर यह पांचवा गंभीर आरोप लगा है जिसमें गलत ईलाज का भुगत मरीज को स्थाई विकलांग बनकर भोगना पड़ेगा, बता दें की छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। लुण्ड्रा थाना क्षेत्र के ग्राम दरीडीह निवासी गोविंद (पिता स्व. बुद्धसाय) ने अंबिकापुर के एक निजी अस्पताल दयानिधि के डॉक्टर संदीप त्रिपाठी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
पीड़ित ने कलेक्टर के जनदर्शन में आवेदन देकर डॉक्टर त्रिपाठी के खिलाफ चिकित्सीय लापरवाही, आर्थिक शोषण और आयुष्मान भारत योजना के दुरुपयोग का मामला दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?:- शिकायत के अनुसार, पीड़ित गोविंद (आयु लगभग 36 वर्ष) का 2 अप्रैल 2024 को मोटरसाइकिल से अंबिकापुर आते समय सड़क दुर्घटना में दाहिना हाथ और कोहनी की हड्डी टूट गई थी। इलाज के लिए वह दयानिति अस्पताल, अंबिकापुर गए, जहाँ ऑर्थोपेडिक डॉक्टर संदीप त्रिपाठी ने उनका इलाज किया।
पीड़ित के मुख्य आरोप: नकद वसूली और आयुष्मान कार्ड का दुरुपयोग: पीड़ित का आरोप है कि डॉक्टर ने इलाज शुरू करने से पहले 50,000/- (पचास हजार) रुपये नगद जमा कराए और साथ ही उनका आयुष्मान कार्ड भी ले लिया, जिसके जरिए बाद में योजना से पैसे भी निकाल लिए गए।
गलत ऑपरेशन से हाथ विकलांग होना: आरोप है कि डॉक्टर द्वारा गलत तरीके से ऑपरेशन कर कोहनी की मुख्य हड्डी को ही निकाल दिया गया। पट्टी खुलने के बाद जब हाथ की स्थिति में सुधार नहीं हुआ और हाथ न तो मुड़ने लगा और न ही सीधा होने लगा, तब डॉक्टर ने दोबारा ऑपरेशन करने की बात कही।
स्थायी विकलांगता: पीड़ित का कहना है कि डॉक्टर की घोर लापरवाही और गलत सर्जरी के कारण उनका दाहिना हाथ स्थायी रूप से विकलांग हो गया है, जिससे वह कोई भी काम करने में असमर्थ हैं।
शिकायतकर्ता की कलेक्टर से की गई प्रमुख माँगे:
कलेक्ट्रेट के जनदर्शन में 28 जुलाई 2026 को दिए गए इस आवेदन पत्र में पीड़ित ने निम्नलिखित माँगे रखी हैं:
डॉक्टर की डिग्री की जाँच: विदेश से पढ़ाई कर लौटने का दावा करने वाले डॉ. संदीप त्रिपाठी की डिग्री की उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए।
दयानिधि हॉस्पीटल में आयुष्मान योजना के दुरुपयोग की जाँच जरूर होनी चाहिए अस्पताल द्वारा आयुष्मान भारत योजना के तहत की गई धोखाधड़ी और अवैध निकासी की निष्पक्ष जाँच हो। आपको बता दें की आज दिनांक तक कितने करोड़ रूपए का भुगतान दयानिधि अस्पताल को किया गया और कितना भुगतान पेंडिंग है इसकी जाँच भी जरुरी है।
शिकायतकर्ता ने कलेक्टर को दिए शिकायत में मुआवजा और न्याय की मांग करए हुए डॉक्टर त्रिपाठी के द्वारा गलत इलाज के कारण स्थायी अपंगता का शिकार बनाने के हर्जाने के रूप में 20,00,000/- (बीस लाख रुपये) की क्षतिपूर्ति राशि दिलाई जाए।
जिस हिसाब से कलेक्टर सरगुजा के पास संदीप त्रिपाठी एवं निजी अस्पताल दयानिधि हॉस्पिटल के गलत ईलाज का आवेदन जनदर्शन में प्राप्त हो रहा है उस हिसाब से यह मना जा सकता है की डॉक्टर त्रिपाठी के गलत ईलाज एवं स्थाई विकलांग बनाने के मामले में शिकायतों का अर्धसतक जल्द लगेगा।
जिस हिसाब से डॉक्टर संदीप त्रिपाठी गलत ईलाज करके मासूम मरीजों को स्थाई विकलांग बना रहा है उससे यह भी संदेह उत्पन्न होता है की साहब को अर्थो की डिग्री कही पैसे के दम पर तो प्राप्त नहीं हुई है, डॉक्टर त्रिपाठी के गलत ईलाज एवं स्थाई विकलांग बनाने के मामले में सरगुजा के अन्य अर्थो को डॉक्टर जो अपने अच्छे ईलाज के लिए जाने जाते थे उनके अनुभव पर भी ग्रहण लगाने का कार्य कर दिया है जिसके कारण अब सरगुजा के मरीज सरगुजा में ईलाज कराने से बचते हुए रायपुर का रुख अपना रहे है।

