रामानुजगंज में भ्रष्टाचार का नंगा नाच: सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगा रहा दागी
रामानुजगंज में भ्रष्टाचार का नंगा नाच: सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगा रहा दागी तत्कालीन सब इंजिनियर एवं वर्तमान अनुविभागीय अधिकारी सुजीत गुप्ता पर 9 साल बीतने के बाद भी FIR दर्ज नहीं, 24 लाख ग़बन के गंभीर आरोप एवं विभागीय जाँच में दोषी पाए जाने पर तत्कालीन कार्यपालन अभियंता के द्वारा थाना रामानुजगंज में आरोपी सब इंजिनियर सुजीत गुप्ता एवं कंप्यूटर ऑपरेटर सुरेन्द्र सिंह ke विरुद्ध FIR दर्ज करवाने के लिए 4 साल पहले दिए शिकायत में आज दिनांक तक कार्यवाही नहीं।
कार्यवाही नहीं होने से सुजीत गुप्ता का बढ़ा मनोबल अब शासन की योजनाओं पर फेर रहा पानी कार्यवाही की जगह मिल रहा खुल्ला संरक्षण।
सरगुजा समय बलरामपुर रामानुजगंज:- जीरो टॉलरेंस और सुशासन के दावों की धज्जियां कैसे उड़ाई जाती हैं, इसका सबसे घिनौना नमूना जल संसाधन विभाग संभाग क्रमांक 2, रामानुजगंज में देखा जा सकता है। जहां एक तरफ मनरेगा और जलाशय निर्माण में 24 लाख रुपये से अधिक का खुला डाका डालने वाले दागी सब-इंजीनियर सुजीत कुमार गुप्ता को हथकड़ी लगनी चाहिए थी, वहीं विभाग के भ्रष्ट आकाओं ने उसे उसी जगह पर ‘शाही संरक्षण’ और मलाईदार जिम्मेदारी से नवाज रखा है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें की महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। वर्ष 2017 में स्वीकृत जलाशय निर्माण व मरम्मत कार्यों में हुए वित्तीय गबन की जांच में उप अभियंता (सब-इंजीनियर) सुजीत कुमार गुप्ता और कंप्यूटर ऑपरेटर सुरेंद्र कुमार सिंह को मुख्य रूप से जिम्मेदार पाया गया था बावजूद उसके सुजीत गुप्ता पर कार्यवाही करने के बजाए उसे प्रमोशन देकर उसी जगह अनुविभागीय अधिकारी बना दिया गया।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आपको बता दें की चार साल पुरानी जांच, तत्कालीन कार्यपालन अभियंता (ईई) के द्वारा पुलिस को लिखा आधिकारिक पत्र और 12 वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों के हस्ताक्षरित आरोप के बावजूद तमाम मामलों कों फाइलों में दबाकर भ्रष्टाचारी को लूट की खुली छूट दे दी गई है। अब ऐसा ही प्रतीत होता दिख रहा है।
लाखों का गबन उजागर, फिर भी फाइलें दबाकर बैठा तंत्र
विभागीय जांच रिपोर्ट ने आधिकारिक तौर पर मुहर लगाई थी कि ककनेशा जलाशय में ₹17,45,655 और देवीगंज जलाशय परियोजना में ₹6,82,019 की सीधी वित्तीय अनियमितता की गई।
इस खुली डकैती में तत्कालीन उप अभियंता सुजीत कुमार गुप्ता और उसका सहयोगी ऑपरेटर सुरेंद्र सिंह सीधे तौर पर मुख्य दोषी पाए गए। तत्कालीन ईई ने खुद रामानुजगंज थाने को एफआईआर दर्ज करने के लिए लिखित आदेश भेजा था। सवाल उठता है कि इतने संगीन अपराध के बाद भी आज तक प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं हुई?
क्या सिस्टम ने खाकी और कलम दोनों को खरीद लिया है?
सजा मिलने के बजाय मिला ‘भ्रष्टाचार का ईनाम’ नियम कहते हैं कि गंभीर वित्तीय अपराध में दोषी पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से निलंबन और विभागीय अभियोजन होना चाहिए। लेकिन यहां नियम-कायदों को जूते की नोक पर रखते हुए सुजीत गुप्ता को उसी मलाईदार जगह पर अनुविभागीय अधिकारी के पद पर पदस्थ कर रखा गया है। यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि विभागीय मिलीभगत का जीता-जागता सबूत है। आरोपी खुलेआम सीना तानकर घूम रहा है और यह संदेश दे रहा है कि ‘रसूख हो तो कानून जेब में रहता है।’
विकास कार्यों की बलि, शासन को हर महीने लाखों की चपत
उसी जगह पर जमे रहने के कारण सुजीत गुप्ता के हौसले सातवें आसमान पर हैं कि वह लगातार शासन की महत्वाकांक्षी जल योजनाओं को पलीता लगा रहा है।
भ्रष्टाचारी के द्वारा गुणवत्ता की हत्या: निर्माण कार्यों में खुलेआम कमीशनखोरी और घटिया सामग्री का खेल जारी है, जिससे बांध और नहरें बनते ही लगातार दम तोड़ रही हैं। साथ ही साथ तमाम सरकारी योजनाओं पर इस भ्रष्ट अफसर के द्वारा ग्रहण लगाते हुए शासन की किसान हितैषी सिंचाई योजनाएं धरातल पर आने से पहले ही कागजी आंकड़ों में सिमट कर भ्रष्टाचार की भेट चढ़ रही हैं।
आपको बता दें की इस भ्रष्ट अफसर के मनमानी एवं दबंगई से परेशान होकर पूर्व में भी विभाग के 5 एसडीओ और 7 उप अभियंताओं ने बैठक कर लिखित शिकायत की थी कि यह शख्स वरिष्ठों की अवहेलना करता है और अपने निजी स्वार्थ के लिए पूरे संभाग को बंधक बनाए हुए है। विभाग के ही 5 एसडीओ (SDO) और 7 उप अभियंताओं ने सुजीत गुप्ता के खिलाफ बैठक कर अनुविभागीय अधिकारियों को दरकिनार करने, व्यक्तिगत स्वार्थ साधने और सहयोगियों को अपमानित करने के गंभीर आरोप पहले भी लगाए थे। जिसके बाद इसका स्थानांतरण अन्यत्र किया गया था परन्तु सब इंजिनियर से प्रमोशन पाने के बाद सुजीत गुप्ता कों पुनः उसी जिला में भेज दिया गया जहाँ करोड़ों रूपए ग़बन करने का आरोप पहले ही सब इंजिनियर रहते हुए लग चूका है।
विभागीय कार्यशैली कों देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है की अब सुजीत गुप्ता के प्रमोशन होकर अनुविभागीय अधिकारी बनने के बाद इसी उद्देश्य से बलरामपुर जिला में रामानुजगंज एवं बलरामपुर कार्यालय में भेजा गया है की खुलेआम भ्रष्टाचार कर अवैध उगाही कर सके क्योंकि सुजीत गुप्ता कों सब इंजिनियर रहते हुए भ्रष्टाचार करने के मामले में तगड़ा अनुभव है जिसके बाद अब अनुविभागीय अधिकारी के मलाईदार कुर्सी में बैठ जमकर भ्रष्टाचार कर सकेगा।
इस भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करने के लिए कब टूटेगी सरकार की नींद? :- जनता की गाढ़ी कमाई और सरकारी राजस्व को दीमक की तरह चाट रहे इस दागी अनुविभागीय अधिकारी सुजीत गुप्ता को किसका राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है? क्या उच्चाधिकारी तब जागेंगे जब कोई बड़ा बांध भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर फूट जाएगा? क्षेत्र की जनता और किसान अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि खुलेआम आर्थिक क्षति पहुंचाने वाले इस आरोपी पर तत्काल एफआईआर और बर्खास्तगी की कार्रवाई कब होगी।
सबसे बड़ी एवं विचारणीय बात यह है की सुजीत गुप्ता के द्वारा सब इंजिनियर के पद में रहते हुए एवं वर्तमान में अनुविभागीय अधिकारी के पद में रहते हुए लगातार कई वर्षो तक अपने गृह नगर (Home Town) में पदस्थापना करवाकर रहा और अभी भी है जबकि इस तरह के पदस्थापना पर पर सामान्यतः प्रतिबंध रहता है।
तमाम मामले में कार्यपालन अभियंता एन पी डहरिया से फोन पर जानकारी चाही गई तो उन्होंने बताया की मामले की जानकारी अभी मुझे नहीं है, विभाग ने अगर थाना में अपराध पंजीबद्ध करने के लिए लिखा है तो थाना से जानकारी मिल पायेगी।
