सरगुजा समय अम्बिकापुर। सरगुजा में शासकीय संपत्तियों पर नजर गड़ाए बैठे भू-माफियाओं के सिंडिकेट और फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड आजाद इराकी के खिलाफ प्रशासन ने अब पूरी तरह कानूनी जंग छेड़ दी है।
रिंग बांध तालाब की 57 डिसमिल बेशकीमती जमीन को फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और कूटरचित दस्तावेजों के दम पर ठिकाने लगाने वाले कुख्यात आरोपी आजाद इराकी को निचली अदालत से मिली जमानत के खिलाफ जिला प्रशासन ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतने संगीन फर्जीवाड़े के आरोपी आजाद इराकी को शासकीय पक्ष (अभियोजन) की दलीलें सुने बिना ही आनन-फानन में जमानत कैसे मिल गई? अब इस एकतरफा फैसले को रद्द कराने के लिए सरगुजा कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी ने जिला एवं सत्र न्यायालय में अपील/पुनरीक्षण (Revision) दायर करने का फरमान जारी कर दिया है।
यहाँ जाने क्या है पूरा मामला :- सरगुजा में लगातार कुकुरमुत्ते की तरह जमीन दलालों की जैसे बाढ़ आ गई हो इस तरह से सरगुजा में जमीन फर्जीवाड़ा एवं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खरीदी बिक्री का खेल खेला जा रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें की
सूरजपुर जिले के जयनगर का रहने वाला आजाद इराकी (पिता रियाजुद्दीन) जमीन के बड़े और सुनियोजित खेल का मुख्य कर्ताधर्ता बनकर उभरा है।
जिंदा को मुर्दा बनाकर हड़प ली जमीन: अम्बिकापुर के मणिपुर थाना अंतर्गत रिंग बांध तालाब की 57 डिसमिल सरकारी/तालाबी जमीन को आजाद इराकी ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और जाली कागजात तैयार करवाकर दूसरों के नाम चढ़ा दिया था।
कलेक्टर की जांच में खुला खेल: जब मामले की शिकायत सरगुजा कलेक्टर तक पहुंची, तो उन्होंने तहसीलदार को जांच का जिम्मा सौंपा। प्रशासनिक जांच में आजाद इराकी का नाम इस महाफर्जीवाड़े के मुख्य सूत्रधार के रूप में पुख्ता हुआ।
मणिपुर थाने में दर्ज हुई एफआईआर: कलेक्टर के कड़े निर्देश पर मणिपुर पुलिस ने आरोपी आजाद इराकी के विरुद्ध अपराध क्रमांक 168/2026 दर्ज किया। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) [धोखाधड़ी], 338, 336(3), 340(2) [कूटरचना व जाली दस्तावेज] और 61(2) [साजिश] जैसी गैर-जमानती धाराओं में जुर्म दर्ज कर उसे सलाखों के पीछे भेजा गया था।
परन्तु हैरानी की बात यह रही कि 25 सितंबर 2026 को अदालत ने अभियोजन पक्ष (सरकारी वकील) को सुने बिना और राज्य का पक्ष जाने बिना ही आरोपी आजाद इराकी की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। इतने बड़े लैंड स्कैम के मुख्य आरोपी को इस तरह गुपचुप और एकतरफा प्रक्रिया से मिली जमानत ने प्रशासनिक और कानूनी महकमे में भूचाल मचा दिया है ।
अभियोजन की रिपोर्ट पर भड़के कलेक्टर, दिए तत्काल अपील के आदेश:- जिला अभियोजन निदेशालय, अम्बिकापुर ने 26 सितंबर 2026 को पत्र क्रमांक 727/2026 के जरिए कलेक्टर को औपचारिक प्रतिवेदन भेजकर अवगत कराया कि अदालत द्वारा अभियोजन के पक्ष को सुने बिना ही आजाद इराकी को जमानत दे दी गई है। मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी, सरगुजा ने 30 सितंबर 2026 को आधिकारिक आदेश (ज्ञापन क्रमांक 7581/न्या.शा./आ०अपील/2026) जारी कर दिया।
आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि :- “न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्रीमान् अरिंदम नेरल द्वारा दिनांक 25.09.2026 को पारित जमानत आदेश के विरुद्ध माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अम्बिकापुर के समक्ष अपील/पुनरीक्षण प्रस्तुत किए जाने की अनुमति प्रदान की जाती है। उक्त आदेश के विरुद्ध तत्काल नियमानुसार अपील/पुनरीक्षण प्रस्तुत करने की कार्रवाई सुनिश्चित करें।”
अब सेशन कोर्ट में कसेगा शिकंजा:- प्रशासन के इस कड़े कदम से साफ हो गया है कि आजाद इराकी की यह रिहाई ज्यादा दिन टिकने वाली नहीं है। सरकारी जमीन और रिंग बांध तालाब के अस्तित्व से खिलवाड़ करने वाले आजाद इराकी की जमानत खारिज कराने के लिए अभियोजन पक्ष पूरी ताकत से जिला एवं सत्र न्यायालय में दस्तक देने जा रहा है। शहर में भू-माफियाओं और उनके मददगारों के बीच इस कार्रवाई से हड़कंप मचा हुआ है।
सरगुजा कलेक्टर के आजाद इराकी मामले में इस कदर कड़ा रुख देखने के बाद राजस्व विभाग के उन भू माफीयाओं के पसीने भी छूटने चालू हो गए होंगे जिन जिन लोगों ने इस भू माफिया आजाद इराकी के फर्जी दस्तावेज एवं भूमि नामांतरण जैसे अन्य मुख्य महत्वपूर्ण कार्य किए होंगे। और इस भू माफिया के आर्थिक रूप के हिस्सेदार होंगे।
