29/09/2026
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सरगुजा समय बलरामपुर. रामानुजगंज / नवा रायपुर छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में शासन के आदेशों और नियमों की धज्जियां उड़ाने पर आमादा राजस्व विभाग के बाबू अब खुलेआम मनमानी पर उतर आए हैं। स्थानांतरण आदेश जारी हुए एक वर्ष से अधिक का लंबा समय बीत जाने के बावजूद कर्मचारी अपनी पुरानी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं, वहीं दूसरी ओर शासन के नियमों की रक्षा करने वाला विभाग भी इन पर लगाम लगाने में पूरी तरह असमर्थ और बेबस नजर आ रहा है। 


सहायक ग्रेड 02 अभिमन्यु यादव का मुंगेली हुआ था तबादला, फिर भी बलरामपुर में जमाए हैं डेरा:- छत्तीसगढ़ शासन, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा 30 जून 2025 को जारी आदेश क्रमांक ESTB/4254/2025/सात-2 के तहत कलेक्टर कार्यालय जिला बलरामपुर-रामानुजगंज में पदस्थ कर्मचारी श्री अभिमन्यु यादव का स्थानांतरण प्रशासनिक आधार पर कार्यालय कलेक्टर जिला मुंगेली किया गया था जो की जारी आदेश क्रमांक सरल क्रमांक 34 पर अंकित है । 


हैरानी की बात यह है कि इस प्रशासनिक स्थानांतरण आदेश के एक वर्ष से अधिक बीत जाने के बाद भी यह कर्मचारी अपनी नवीन पदस्थापना स्थल (मुंगेली) पर ज्वाइनिंग देने के बजाय बलरामपुर में ही ‘अंगद के पैर’ की तरह अंगद बनकर डटा हुआ है। शासन के स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर न तो इन्हें कार्यमुक्त (रिलीव) करने की हिम्मत दिखाई गई और न ही कर्मचारी ने खुद कुर्सी छोड़ी। 


रामानुजगंज तहसील के दो बाबू भी खुलेआम चला रहे मनमानी
इसी आदेश के तहत 30 जून 2025 को तहसील कार्यालय रामानुजगंज (जिला बलरामपुर-रामानुजगंज) में पदस्थ दो अन्य कर्मचारियों का भी प्रशासनिक स्थानांतरण किया गया था: 
श्री रामधन यादव (सरल क्र. 22): पदस्थापना तहसील कार्यालय रामानुजगंज, नवीन पदस्थापना—कार्यालय कलेक्टर जिला जशपुर। 

श्री असगर अंसारी (सरल क्र. 23): पदस्थापना तहसील कार्यालय रामानुजगंज, नवीन पदस्थापना—कार्यालय कलेक्टर जिला कोरिया। लगभग एक वर्ष से अधिक का समय बीतने के बाद भी इन दोनों कर्मचारियों ने अपने आवंटित जिलों (जशपुर एवं कोरिया) का रुख नहीं किया और आज दिनांक तक रामानुजगंज तहसील में ही जमे हुए हैं। 


नियमों की खुली अवहेलना, विभाग की खामोशी पर गंभीर सवाल
प्रशासनिक नियमावली के अनुसार स्थानांतरण आदेश जारी होते ही तय समय-सीमा के भीतर नवीन पदस्थापना पर पदभार ग्रहण करना अनिवार्य होता है। परंतु लगभग एक वर्ष तक मंत्रालय के आदेश को ताक पर रखकर पुरानी ही जगह पर जमे रहना सीधे तौर पर अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा और दबंगई की खुली प्रस्तुति है। 


सबसे बड़ा सवाल राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। इन कर्मचारियों की खुलेआम मनमानी को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि विभाग इन पर नकेल कसने में पूरी तरह पस्त और असहाय साबित हो रहा है। स्थानीय प्रशासनिक तंत्र की इस चुप्पी से यह संदेश जा रहा है कि नियमों की परवाह केवल साधारण कर्मचारियों के लिए है, जबकि रसूखदार बाबू अपनी मर्जी से व्यवस्था चला रहे हैं।


क्या संज्ञान लेंगे जिम्मेदार उच्चाधिकारी?
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि आखिर इन कर्मचारियों पर किसका संरक्षण है, जिसके चलते मंत्रालय का आदेश भी एक साल से दबा पड़ा है? क्या शासन और राजस्व विभाग के उच्चाधिकारी इस घोर लापरवाही का संज्ञान लेते हुए इन हठधर्मी कर्मचारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई करेंगे, या फिर विभाग की यह लाचारी आगे भी यूं ही बनी रहेगी?

तमाम मामले की जानकारी लेने हेतु हमने आंनद राम नेताम अनुविभागीय अधिकारी राजस्व से फोन पर संपर्क करना चाहा लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।

इसी मामले में रामानुजगंज तहसील कार्यालय के तहसीलदार मनोज पैकरा से जानकारी लेने के लिए फोन पर संपर्क किया गया परन्तु उनसे भी फोन पर बात नहीं हो पाया जिससे मामले की जानकारी नहीं मिल पाई।

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