27/10/2026
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन SUCCESS STORY


महिला स्व-सहायता समूह ने डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर शुरू की गन्ने की खेती।

गुड़ उत्पादन और गन्ने की बिक्री से आजीविका को मिल रहा संबल

सरगुजा समय अम्बिकापुर 27 अक्टूबर 2026/ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त माध्यम बन रहा है। स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं न केवल बचत और ऋण की सुविधा का लाभ उठा रही हैं, बल्कि खेती, पशुपालन और छोटे व्यवसायों के माध्यम से अपनी आमदनी भी बढ़ा रही हैं। सरगुजा जिले की ग्राम पंचायत कटकोना की रहने वाली ममता राजवाड़े इसकी एक प्रेरक मिसाल हैं। उन्होंने बताया कि महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने मिलकर डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर गन्ने की खेती शुरू की और इससे प्राप्त आमदनी से ब्याज सहित पूरा ऋण चुका दिया। आज वे पांच एकड़ में गन्ने की खेती कर रही हैं और गुड़ उत्पादन एवं बिक्री से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत बना रही हैं।

डेढ़ लाख रुपये के ऋण से शुरू की खेती, आमदनी से ब्याज सहित चुकाई पूरी राशि:-
पीपल महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष ममता राजवाड़े बताती हैं कि समूह से जुड़ने से पहले परिवार को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। खेती और अन्य आजीविका गतिविधियों के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं होने के कारण वे चाहकर भी व्यवसाय का विस्तार नहीं कर पा रही थीं। बिहान योजना के अंतर्गत स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत शुरू की। समूह को रिवॉल्विंग फंड (आरएफ) और सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) के माध्यम से वित्तीय सहायता मिली, जिससे सदस्यों के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़े।

ममता बताती हैं कि समूह से डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर महिला समूह ने गन्ने की खेती शुरू की। फसल से प्राप्त आमदनी के जरिए उन्होंने मूलधन और ब्याज सहित पूरी ऋण राशि चुका दी। खेती से हुए लाभ और बढ़े आत्मविश्वास के बाद उन्होंने इस वर्ष गन्ने की खेती का रकबा बढ़ाकर पांच एकड़ कर दिया है।

गुड़ उत्पादन बना आमदनी का प्रमुख जरिया, बिक्री के लिए घर तक पहुंचते हैं व्यापारी
ममता राजवाड़े गन्ने की खेती के साथ गुड़ तैयार कर उसकी बिक्री भी करती हैं। वे बताती हैं कि गन्ने को सीधे बेचने के बजाय उसका गुड़ बनाकर बेचना उनकी आय का प्रमुख माध्यम है। इस वर्ष गन्ने की खेती और उत्पादों की बिक्री से अब तक लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये की आमदनी हो चुकी है।

ममता के अनुसार, गुड़ की बिक्री के लिए उन्हें बाजार तलाशने में विशेष परेशानी नहीं होती। वहीं खड़े गन्ने की बिक्री के लिए व्यापारी स्वयं उनके पास पहुंचते हैं और गन्ना खरीदकर ले जाते हैं। इससे परिवहन और विपणन संबंधी परेशानियां कम होती हैं। स्थानीय स्तर पर उत्पादों की बिक्री की सुविधा मिलने से वे खेती और गुड़ निर्माण पर अधिक ध्यान दे पा रही हैं। ममता ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु भैया के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सुशासन में महिलाओं को आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने के अवसर मिल रहे हैं।

ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को नई दिशा दे रहा बिहान
ममता राजवाड़े की सफलता यह दर्शाती है कि बिहान योजना के माध्यम से स्व-सहायता समूहों को मिलने वाली वित्तीय सहायता ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार और उद्यमिता के नए रास्ते खोल रही है। समूह आधारित बचत और ऋण सुविधा से महिलाएं खेती एवं आजीविका गतिविधियों में निवेश कर रही हैं। गन्ने की खेती, गुड़ उत्पादन, बकरी पालन और मछली पालन जैसे व्यवसायों से उनकी आय के स्रोत बढ़ रहे हैं। ग्रामीण महिलाएं अपनी मेहनत और समूह की ताकत से आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ते हुए आत्मनिर्भर बन रही हैं। 

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