22/05/2026
screenshot_20260415_063140965034509821364285

बलरामपुर / रामानुजगंज (सरगुजा समय):   रामानुजगंज बलरामपुर के जल संसाधन विभाग के पुरे महकमे में ईमानदारी की उम्मीद करना ही बेमानी है, यहाँ सुजीत गुप्ता के भ्रष्टाचार की हवस में इस हद तक गिर जाएगा कि खुद को ‘चपरासी’ बना ले, ऐसा इतिहास में पहली बार सुना जा रहा है।

जल संसाधन विभाग रामानुजगंज संभाग क्रमांक 02 में पदस्थ अनुविभागीय अधिकारी (SDO) सुजीत कुमार गुप्ता ने जालसाजी और वित्तीय डकैती का ऐसा ब्लूप्रिंट तैयार किया, जिसे देखकर बड़े-बड़े शातिर अपराधी भी ट्यूशन लेने इसके पास पहुंच जाएं।

 

​जनता अब सीधे प्रशासन का कॉलर पकड़कर पूछ रही है की “फर्जी पद और जाली दस्तखत का यह नंगा नाच करने के बावजूद इस SDO से फर्जी चपरासी बन विभाग एवं बैंक को भ्रमित करते हुए गोपनीय जानकारी प्राप्त कर लिया जिससे इस भ्रष्ट SDO पर अब तक एफआईआर क्यों नहीं हुई?” यह अत्यंत विचारणीय बात हैं।

कुर्सी SDO की, चोला चपरासी का: बैंक का वो पत्र जिसने खोल दी चपरासी सुजीत गुप्ता की पोल !

​जब पैसे की भूख और सड़ चुके सिस्टम का गठबंधन होता है, तो सुजीत कुमार गुप्ता जैसे किरदारों का जन्म होता है। सरकारी पत्र (पत्र क्रमांक 2853/स्था. दिनांक 15/08/2022) और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के आधिकारिक जवाब ने इस महा-फर्जीवाड़े का जो चेहरा बेनकाब किया है, वो रोंगटे खड़े करने वाला है:

गोपनीयता की धज्जियां: वित्तीय वर्ष 2022-23 के मई महीने के सरकारी चेक का पूरा काला चिट्ठा निकालने के लिए इस अधिकारी ने खुद को ‘चपरासी’ घोषित कर दिया।

​बैंक ने कबूला सच: बैंक के शाखा प्रबंधक ने लिखित में दिया कि अनुविभागीय अधिकारी के कहने पर ‘चपरासी श्री सुजीत कुमार गुप्ता’ को ये तमाम सामग्रियां और स्टेटमेंट सौंपे गए।

शर्मनाक सच: जिस कुर्सी पर बैठने के लिए लोग सालों मेहनत करते हैं, उस पद की गरिमा को इस अधिकारी ने चंद रुपयों की खातिर चपरासी के पैरों में रोल दिया

कागजों पर बंटीं रेवड़ियां, बिना काम ठेकेदारों पर लुटाए सरकारी करोड़ों!

​इस ‘चपरासी’ बनने के खेल के पीछे कोई मजबूरी नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये का गबन छिपा था। ऐसा माना जा सकता हैं। आपकी जानकारिबके लिए बता दे की सुजीत गुप्ता के द्वारा यह पहला कारनामा नहीं हैं जब ये अपने निजी लाभ के लिए SDO से चपरासी बन गए इसके रसूख इतने तगड़े हैं की अधिकारीयों को बड़ा जल्द अपने भस्ट नीतियों को साधने के लिए अपने आगोश मे ले लेता हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दे की वर्तमान मे ही कार्यपालन अभियंता नारायण प्रसाद डहरिया एवं SDO सुजीत गोता के द्वारा बिना कार्य करवाये ही अग्रिम भुगतान कर दिया गया था जिसके शिकायत के बाद आनन फानन मे कार्यपालन अंभियंता एवं सुजीत गुप्ता की आपसी मिलीभगत से कार्य प्रारम्भ कराया गया हैं जो अभी वर्तमान दिनांक तक चल रहा हैं

बिना कार्य किए अग्रिम भुगतान से ​ठेकेदारों की चांदी: डीपी कंस्ट्रक्शन (997924, 563689 रुपये) और मेसर्स संजय कुमार गुप्ता (431438 रुपये) जैसे चहेते ठेकेदारों को बिना एक तिनका हिलाए, बिना कोई जमीनी काम कराए, कागजों पर ही लाखों-करोड़ों रुपये का फर्जी भुगतान कर दिया गया। यह सीधे-सीधे जनता के टैक्स के पैसे पर डकैती है!

नतमस्तक आला अफसर, घुटनों पर पुलिस: आखिर इस ‘गॉडफादर’ का आका कौन?

​सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि इस महा-फर्जीवाड़े के दस्तावेज चीख-चीखकर तमाम प्रकार से हुए फर्जीवाड़े की गवाही दे रहे हैं, लेकिन जल संसाधन विभाग के आला अफसर इस भ्रष्ट अधिकारी के सामने नतमस्तक हैं। स्थानीय पुलिस और थाना प्रभारी की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जिस थाने की नाक के नीचे यह पूरा जालसाजी का खेल रचा गया, वो थाना प्रभारी आखिर क्यों इस मामले से मुंह मोड़कर बैठे हैं? सुजीत कुमार गुप्ता को किसका संरक्षण प्राप्त है? वो कौन सा सफेदपोश नेता या बड़ा अधिकारी है जो इस ‘चपरासी SDO’ की ढाल बना हुआ है?

इस तमाम फर्जीवाड़े एवं SDO से चपरासी बनने के खेल के विरुद्ध कार्यवाही का भरोसा अब बलरामपुर जिला नवनियुक्त कलेक्टर साहिबा से ही किया जा सकता हैं !

SDO से चपरासी बनने की कला रखने वाले सुजीत कुमार गुप्ता को अच्छे से मालूम है कि भ्रष्टाचार के इस दलदल में “किसे कितना हिस्सा देना है, और किस रसूखदार के तलवे चाटकर अपनी चमड़ी बचानी है।” लेकिन इस बार मामला जनता की अदालत में है जहाँ से बच निकलना आसान नहीं हैं।

इस पुरे मामले मे अब नवनियुक्त बलरामपुर कलेक्टर के लिए यह परीक्षा की घड़ी है। क्या वे इस महा-भ्रष्टाचारी, फर्जी दस्तखत के उस्ताद और खुद को चपरासी बताने वाले SDO को तत्काल सस्पेंड कर सलाखों के पीछे भेजेंगे, या फिर जांच के नाम पर इस फाइल को भी सरकारी बस्ते में दफन कर दिया जाएगा? 

SDO से चपरासी बने सुजीत कुमार गुप्ता “साहब ने पैसों की खातिर पद बेचा, ईमान बेचा और खुद को चपरासी बना डाला। अब देखना यह है कि कानून इस जालसाज का घमंड कब टूटता है और इसकी सही जगह यानी ‘जेल’ कब भेजता है!”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *