सरगुजा समय अंबिकापुर सीतापुर :- कहते हैं की अगर सियासत में नौटंकी और ड्रामे का तड़का न लगे, तो बात हजम नहीं होती।
विधायक रामकुमार टोप्पो और नायब तहसीलदार का विवाद अब ‘तू डाल-डाल, मैं पात-पात’ की तर्ज पर चल रहा है। विधायक रामकुमार टोप्पो ने कल ऐलान किया कि वे अनुशासित हैं और खुद गिरफ्तारी देंगे। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आ गया जब कानून का पालन कराने वो स्थानीय थाने नहीं, बल्कि लाव-लश्कर के साथ सरगुजा आईजी को अपनी गिरफ़्तारी देने की बात कह दिया.. सूत्रों का दावा हैं की विधायक पहले गिरफ़्तारी सीतापुर से ही देने की बात कही थी लेकिन बाद में पुरे प्लानिंग के हिसाब से गिरफ़्तारी सरगुजा आईजी को देने की बात सामने आने लगी और रास्ते में प्रारम्भ हुआ हाई वोल्टेज ड्रामा।
मगर धन्य हैं उनके समर्थक! जो मंगारी के पास बिल्कुल सही वक्त पर, सही जगह पर सड़क पर लेट गए। विधायक जी ने भी जनता की ‘भावनाओं’ का पूरा सम्मान किया। उन्होंने कहा, “मैं तो कानून का सम्मान करने जा रहा था, लेकिन जनता नहीं मान रही, तो मैं क्या करूँ?” >

जनता पूछ रही है: अगर गिरफ्तारी ही देनी थी, तो चुपचाप दो सुरक्षाकर्मियों के साथ जाकर पुलिस के सामने बैठ जाते। ये समर्थकों का चक्काजाम और रोना-धोना क्या केवल अपनी ही सरकार के अफसरों और पुलिस पर दबाव बनाने का ‘जुगाड़’ था? बहरहाल, अफसर हड़ताल पर हैं, जनता परेशान है और विधायक जी अपने घर में ‘अनुशासित’ बैठे हैं।
बता दे की यह लड़ाई अब सिर्फ एक विधायक और तहसीलदार की नहीं रह गई है, बल्कि यह ब्यूरोक्रेसी बनाम पॉलिटिक्स का बड़ा अखाड़ा बन चुकी है। अधिकारियों की हड़ताल से जनता के काम ठप हैं। कल हुए ड्रामे के बाद अब पुलिस पर भी दबाव है कि वह इस मामले में क्या स्टैंड लेती है। क्या पुलिस सत्ताधारी दल के विधायक पर हाथ डालेगी, या फिर यह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? नजरें अब रायपुर के अगले कदम पर टिकी हैं।

