15/06/2026
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सरगुजा समय अंबिकापुर :- ​कृषि विभाग का ‘भ्रष्टाचार तंत्र’: रिश्वतखोर विनायक पाण्डेय को उप संचालक पीताम्बर सिंह दीवान का खुला संरक्षण, लखनपुर में प्रभारी वरिष्ठ क़ृषि विकास अधिकारी के पद पर बिठाया।

कहते है की विभाग के आला अफसर उन्ही लोगों को पसंद करते है जो उनके हिसाब से कार्य करने में महारथ हासिल किए होते है, ठीक ऐसा मामला उप संचालक क़ृषि पीताम्बर सिंह दीवान के साथ भी होना माना जा सकता है इन्होने लगभग 90 लाख रूपए का गोलमाल कोरिया जिला में करके अपने आप को किए इस भ्रष्टाचार से बचाने में कामयाब हो गए वैसे ही इन साहब को सिर्फ बेईमान एवं घूसखोर अधिकारी ही पसंद है जिसके कारण ये इन घूसखोरों को मलाईदार कुर्सी प्रदान करते है।

आपकी जानकारी के लिए बता दे की सरगुजा कृषि विभाग इन दिनों एक भ्रष्टाचारीयों का अड्डा बन चुका है, जहाँ भ्रष्टाचार और दागदार रिकॉर्ड वाले कर्मचारियों को सज़ा देने के बजाय उन्हें कुर्सी और पदोन्नति का इनाम दिया जा रहा है।

रिश्वतखोरी के मामले में दोषी पाए जाने के बाद निलंबित होकर रिस्टेट होने वाले कृषि विकास अधिकारी विनायक पाण्डेय को उप संचालक कृषि, पीताम्बर सिंह दीवान का खुला संरक्षण मिल रहा है। यह मिलीभगत प्रशासनिक नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रही है ऐसा माना जा सकता है।

दागदार कर्मचारी विनायक पाण्डेय को ‘वरिष्ठ’ का प्रभार, आखिर किसके इशारे पर? क्यों दागदार कर्मचारी पर मेहरबान है DDA?

​सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक ऐसा कर्मचारी, जिसका 10,000 रुपये रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल वर्ष 06 सितम्बर 2023 को सोशल मिडिया के माध्यम से हुआ था जिसमें विनायक पाण्डेय ने एक डीलर से सैम्पल पास करने के नाम पर रिश्वत लिया था। जिसके बाद विभाग द्वारा विनायक पाण्डेय को निलंबित कर दिया था और जाँच बैठा दिया था।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विभागीय जाँच में दोषी पाए जाने के बाद विनायक पाण्डेय जो की क़ृषि विकास अधिकारी के पद में पदस्थ थे का एक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) रोक विभाग द्वारा रोक दिया गया जहाँ से विनायक पाण्डेय के प्रमोशन में अडचन आना प्रारम्भ हो गया।

अब विचारणीय बात यह है की इस दागदार छबि वाले विनायक पाण्डेय जो कृषि विकास अधिकारी है को ‘वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी’ के महत्वपूर्ण प्रभार वाले पद पर उप संचालक क़ृषि सरगुजा के द्वारा क्यों बैठाया यह अत्यंत विचारणीय बात है।

सूत्रों के मुताबिक, यह नियुक्ति पूरी तरह से विभागीय नियमों को दरकिनार कर की गई है। उप संचालक पीताम्बर सिंह दीवान ने न केवल इस दागदार कर्मचारी को अभयदान दिया है, बल्कि उसे लखनपुर जैसे महत्वपूर्ण केंद्र का सर्वेसर्वा बनाकर भ्रष्टाचार के नए रास्ते खोल दिए हैं। यह स्पष्ट है कि विनायक पाण्डेय का ‘लखनपुर प्रभार’ बिना उच्च स्तरीय मिलीभगत के संभव नहीं था।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लखनपुर में वरिष्ठ क़ृषि विकास अधिकारी की कुर्सी में बैठ कर ये महानुभाव कार्यालय में आतंक मचा के रखें है विनायक पाण्डेय के बेतुके बयान एवं कार्यशैली पर कार्यालय की तमाम महिला कर्मचारियों ने शिकायत कर कड़ी कार्यवाही की मांग भी की थी लेकिन उप संचालक पीताम्बर सिंह दीवान का सबसे खास, विश्वसनीय भ्रष्टाचार एवं घूसखोरी करने में महारथ हासिल किए हुए विनायक पाण्डेय पर कार्यवाही कौन कर सकता है। यहाँ पर वही वाली कहावत चरितार्थ करती है की ‘‘सैया भईया कोतवाल तो भय काहे का”।

​दागदार एवं घूसखोरी में ख्याति प्राप्त विनायक पाण्डेय किस आईएएस अफसर को बना रहे प्रमोशन के लिए पायदान, मंत्रालय में आने वाली रुकावट को किस आईएएस अफसर के द्वारा दूर करने का जिम्मा उठाया गया है यह भी अत्यंत विचारणीय बात है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिस आईएएस द्वारा विनायक पाण्डेय के रुके वेतन वृद्धि एवं प्रमोशन में अड़चन उत्पन्न होने वाली घूसखोरी के मामले में पूर्व में हुए जाँच को प्रभावित करके पुनः जाँच कर क्लीन चिट देने की तैयारी है। उस आईएएस अफसर पर एक जिला में DMF मद में हेर फेर करके बड़ा झोल झाल करने के बाद कई करोड़ रूपए शासन के चपत किया जाने का चर्चा भी काफ़ी गर्म है।

अब विनायक पाण्डेय का लक्ष्य ‘प्रमोशन’ है। सूत्रों के हवाले से एक घूसखोर के दागदार एवं भ्रष्टाचार में महारथ हासिल करने वाले पाण्डेय का प्रमोशन का मामला अब एक इंक्रीमेंट रुकने के कारण फसता नजर आ रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार बता दे की जो प्रमोशन तकनीकी रूप से फंस गया है , उसे निकलवाने के लिए विनायक पाण्डेय ने मंत्रालय में लगातार चक्कर लगा रहे है जिससे मंत्रालय के इस टेबल से उस टेबल में भटकने से उन्हें मंत्रालय में फटकार भी लगी परन्तु इस सब में ये महानुभाव को महारथ हासिल है। चर्चा है कि वे अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर किसी बड़े आईएएस अधिकारी को ढाल बनाकर अपने पुराने गुनाहों को ढंकने की कोशिश कर रहे हैं।

​क्या यह संभव है कि उप संचालक स्तर के अधिकारी का ‘आशीर्वाद’ न हो और घूसखोरी मामले में निलंबित होने के बाद रिस्टेट कर्मचारी विनायक पाण्डेय मंत्रालय में अपनी फाइलें दौड़वा ले? स्पष्ट है कि यह केवल विनायक पाण्डेय की कोशिश नहीं, बल्कि कृषि विभाग के बड़े अधिकारियों का एक सोची-समझी साजिश है।

क्या छत्तीसगढ़ शासन के पास अब क़ृषि विभाग में ईमानदार एवं काबिल अफसर नहीं है जिसके कारण क़ृषि विभाग के पुरे संभाग की कमान ​उप संचालक पीताम्बर सिंह दीवान के हाथ में है, एक ही अफसर कई महत्वपूर्ण पद पर प्रभारी अफसर बनकर बैठा हुआ है जिससे यह प्रतीत होता है की छत्तीसगढ़ शासन में ईमानदार एवं काबिल अफसरों की कमी क़ृषि विभाग में है। DDA की कार्यशैली विनायक पाण्डेय के मामले में निभाने वाली भूमिका अब संदेह के घेरे में है। यदि एक दागदार अधिकारी विभाग की साख को बट्टा लगा रहा है, तो उन्हें संरक्षण देना सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना है।

मंत्रालय के किस अधिकारी के संरक्षण में प्रमोशन की यह ‘डील’ पक्की की जा रही है?, यह भी अत्यंत विचारणीय बात है मामले की गंभीरता को देखते हुए यह जाँच का विषय है की मंत्रालय में कौन वाह अफसर है जिसके इसारे में दागदार छबि वाले विनायक पाण्डेय के प्रमोशन की राह आसान की जा रही है। हालांकि आपकी जानकारी लिए बता दे की घूसखोरी वाले मामले में विनायक पाण्डेय के ऊपर विभाग पहले दोषी मान कर कार्यवाही करते हुए एक वेतन वृद्धि रोक चूका है अब मंत्रालय एवं विनायक पाण्डेय का प्रमोशन का राह आसान करने वाले आईएएस क्या अपने कलम को फ़साने की तैयारी करेंगें या नियमानुसार जाँच कर घूसखोरी एवं दागदार छबि वाले विनायक पाण्डेय पर कार्यवाही करते है।

सरगुजा समय का सीधा सवाल प्रशासन से है क़ृषि विभाग के मंत्री एवं सरकार से है क्या आप रिश्वतखोरों को प्रमोट करने के लिए तैयार हैं, या अब इन ‘महारथियों’ पर कार्रवाई की जाएगी? यह खबर केवल विनायक पाण्डेय के बारे में नहीं है, बल्कि उस भ्रष्ट व्यवस्था के बारे में है जिसे पीताम्बर सिंह दीवान जैसे अधिकारी सरगुजा में पोस रहे हैं, और जमकर भ्रष्टाचार करते हुए सरकार की वित्तीय छति पहुंचाने का कार्य कर रहे है।

इस तमाम मामले में जानकारी लेने के लिए पीताम्बर सिंह दीवान उप संचालक क़ृषि सरगुजा से फोन पर लगातार संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन भ्रस्टाचारियों के मसीहा ने फोन उठाना जरुरी नहीं समझा।

 

हमारी सरगुजा समय की पूरी टीम मंत्रालय के उस अफसर एवं उस आईएएस अफसर की जानकारी जुटाने में लगी है जिन्होंने दागदार छबि एवं घूसखोरी मामले में निलंबित होने के बाद रिस्टेट होने वाले अधिकारी विनायक पाण्डेय को घूसखोरी वाले मामले में हुए पूर्व में हुए कार्यवाही से बचाने एवं प्रमोशन दिलवाने का दावा कर रहे है की तहकीकात की जा रही है। जल्द ही हम आपके सामने इस पुरे मामले की जानकारी खबर के माध्यम से पुरे विस्तार के साथ लाएंगे।