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सरगुजा समय अंबिकापुर: – प्रशासन बना ‘जनसुविधाओं का दुश्मन’, वर्षों पुराने सार्वजनिक शौचालय को तोड़ने पर आमजन में भारी आक्रोश जहाँ एक ओर भाजपा सरकार स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वच्छता और जनसुविधाओं के विस्तार का दावा करती हैं, वहीं अंबिकापुर में जिला एवं नगर निगम प्रशासन की कार्यशैली इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है।
शहर के हृदय स्थल पर थाना चौक मायापुर पानी टंकी के पास एवं कलेक्ट्रोरेट परिसर में स्थित वर्षों पुराने सार्वजनिक शौचालय को बिना किसी ठोस वैकल्पिक व्यवस्था के ध्वस्त कर दिया गया इस सार्वजनिक शौचालय को ध्वस्त करने की कवायद के पीछे कुछ राजनीतिक रसूखदार एवं प्रशासनिक अधिकारीयों की दलाली एवं निजी स्वार्थ छुपा दिखाई देता है यह माना जा सकता है। शहर के ह्रदय स्थल से इस कदर सार्वजनिक शौचालय को ध्वस्त करते हुए गायब कर देने से आम नागरिकों में भारी रोष व्याप्त है।
आपकी जानकारी के लिए बता दे की उक्त स्थान थाना चौक एवं कलेक्ट्रोरेट परिसर में स्थित यह सार्वजनिक शौचालय वर्षों से शहर के व्यस्ततम क्षेत्रों में आने वाले राहगीरों, महिलाओं, बुजुर्गों और दिहाड़ी मजदूरों के लिए एक बड़ी राहत केंद्र रहा है। परन्तु प्रशासनिक व्यवस्थाओ एवं चंद राजनीतिक रसूखदारों के कारण स्थानीय लोगों से सार्वजनिक शौचालय की सुविधाओं को छीनने का कार्य करते हुए एक स्थान थाना चौक पर निजी दुकान खोलवा दिया गया वही कलेक्ट्रोरेट परिसर में सार्वजनिक शौचालय को तोड़वा कर पार्क बनवा दिया गया।
आम लोगों का आरोप है कि निगम प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना या जनसुनवाई के इस जनहित एवं मुलभुत सुविधा को समाप्त करने का निर्णय ले लिया है। जो की सरासर गलत है एवं आम नागरिकों के अधिकार का हनन भी है।
इस मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि प्रशासन ने आम नागरिकों की बुनियादी जरूरतों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है। जिसे आम नागरिकों को काफ़ी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
वैकल्पिक व्यवस्था का अभाव: शौचालय तोड़ा जा रहा है, लेकिन आसपास के क्षेत्र में कहीं भी दूसरा शौचालय उपलब्ध नहीं कराया गया है।
छात्र छात्राओं सहित महिलाओं और बुजुर्गों की सबसे बड़ी परेशानी: इस दलाली पूर्व कार्य से सबसे अधिक कठिनाई महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों को हो रही है, जिन्हें अब शौचालय जाने के लिए खुले में या लंबी दूरी तय करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अंबिकापुर नगर निगम एक एक दौर यह भिबठा जहाँ खुले में मूत्र त्याग करना एवं शौच को जाने पर जुर्माने का प्रावधान था लेकिन अब प्रशासन एवं राजनीतिक रसूखदारों के दलाली पूर्वक कार्य से आम नागरिक खुले में शौच जाने को मजबूर है।
जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी: स्थानीय निवासियों एवं सरगुजा समय के संपादक ने जब इस संबंध में निगम के अधिकारियों से बात करने की कोशिश की, तो प्रशासन ने संतोषजनक जवाब देने के बजाय अपनी आंखें मूंद ली हैं।
क्या कहते हैं स्थानीय लोग?
स्थानीय निवासियों का कहना है, “हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर बनी-बनाई जनसुविधाओं को उजाड़ना कहां का न्याय है? प्रशासन को शौचालय तोड़ने से पहले यह सोचना चाहिए था कि गरीब और आम आदमी अपनी दैनिक जरूरतों के लिए कहां जाएगा।”
प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल
अंबिकापुर की जनता अब इस बात से सवाल पूछ रही है कि क्या स्मार्ट सिटी और स्वच्छता के नाम पर आम आदमी की बुनियादी जरूरतों की बलि दी जा रही है? नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि इस निर्णय को वापस नहीं लिया गया और जनसुविधाओं को बहाल नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।

