13/06/2026
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सत्ता का अहंकार बनाम प्रशासन की बेबसी, विधायक-नायब तहसीलदार के सह – मात के चक्कर में पिस रही आम जनता…

 

 

सरगुजा समय सीतापुर अंबिकापुर:- सरगुजा जिले के सीतापुर में विधायक रामकुमार टोप्पो और नायब तहसीलदार तुषार मानिक के बीच शुरू हुआ विवाद अब एक शर्मनाक ‘सियासी नाटक’ में तब्दील हो चुका है। अब इस घटना को देखते हुए ऐसा प्रतीत हो रहा है की एक विधानसभा का विधायक एवं एक उप तहसील का नायब तहसीलदार यही मुद्धा सबसे जरुरी बनता दिख रहा है।

छत्तीसगढ़ की आम जनता एवं किसानों की परेशानियों से अब किसी जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीयों का कोई सरोकार नहीं रहा ऐसा प्रतीत होता दिख रहा है। यहाँ अब छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिला के सीतापुर राजापुर उप तहसील में अब विधायक एवं नायब तहसीलदार का मुद्धा गरम है किसानों को खाद मिले या ना मिले आम नागरिकों के काम हो या ना हो अब छत्तीसगढ़ में ठप्प हुए काम काज का दौर पुनः वापसी का एक ही रास्ता दिख रहा है विधायक एवं नायब तहसीलदार का सुलह, अगर इस उपजे विवाद का अंत नहीं होता है तो यक़ीनन अब छत्तीसगढ़ की जनता एवं किसानों को और भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

 

इस पूरे घटनाक्रम में एक ओर जहां कानून का मखौल उड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर आम जनता, किसान और फरियादी अपने छोटे-छोटे राजस्व कार्यों के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। जिससे यह स्पस्ट होता दिख रहा है की जहाँ एक ओर सत्ता के अंहकार में चूर विधायक एवं उनके समर्थक जनता के समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे है वही नायब तहसीलदार तुषार मानिक के समर्थक कलम बंद हड़ताल के नाम पर मौज मस्ती कर रहे है।

 

बता दे की जिस कालाकेंद्र मैदान में नायब तहसीलदार एवं छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ एवं छत्तीसगढ़ राजस्व निरिक्षक संघ के बैनर तले कलमबंद हड़ताल किया जा रहा है उस स्थान पर अधिकांश कुर्सियां खाली देखने को मिल रही है जिससे ऐसा माना जा सकता है की अधिकांश अधिकारी कर्मचारी हड़ताल के नाम पर मौज मस्ती करने हड़ताल वाले स्थान से गायब है।

जब एक मजिस्ट्रेट ने बयां किया ​आंखों देखा हाल: जब नायब तहसीलदार तुषार मानिक बना मारपीट का शिकार तो सीतापुर के एसडीएम फागेश सिन्हा ने मीडिया के सामने स्पष्ट रूप से पुष्टि की है कि विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों ने नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ न केवल दुर्व्यवहार किया, बल्कि उनकी जमकर पिटाई भी की है।

नायब तहसीलदार के चेहरे पर उभरे चोट के निशान और एक मजिस्ट्रेट (एसडीएम) द्वारा दी गई गवाही इस बात का पुख्ता सबूत है कि कानून हाथ में लिया गया है।

गिरफ्तारी का ‘नौटंकी ड्रामा’ और पुलिस की लाचारी:- ​इस मामले में भाजपा सरकार की छवि बचाने के लिए आनन-फानन में विधायक पर FIR तो दर्ज कर दी गई, लेकिन इसके बाद जो हुआ वह किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है, कहावत है की हाथी के दाँत दिखाने के और एवं खाने के और ठीक इसी तर्ज पर विधायक के ​गिरफ्तारी देने का मामला दिखावा मात्र था।

 

मिली जानकारी के अनुसार विधायक ने पहले सीतापुर थाने में गिरफ्तारी देने का ऐलान किया, फिर ऐन मौके पर अपना इरादा बदलकर सरगुजा आईजी ऑफिस जाने की बात कह जिससे यह स्पष्ट होता दिखने लगा की यह गिरफ्तारी गिरफ़्तारी नहीं बल्कि राजनीतिक स्टंट है।

जैसे ही विधायक का काफिला गिरफ्तारी देने निकला, उनके समर्थकों ने महज 15 किलोमीटर दूर ग्राम मंगारी पर ही विधायक के गाड़ी के आगे सड़क पर लेटकर गाड़ी रोक दी और उसके बाद वहां से उन्हें वापस ले आए।

पुलिस की बेबसी: साक्ष्य और चश्मदीद गवाह (एसडीएम) के होने के बावजूद पुलिस प्रशासन का विधायक को गिरफ्तार न कर पाना, शासन-प्रशासन की लचर स्थिति और सत्ता के दबाव को जगजाहिर कर रहा है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विधायक के द्वारा गिरफ्तारी देने के मामले में सैंकड़ो वाहनों के काफिला में पार्टी हाईकमान की फटकार के बाद ही ‘ब्रेक’ लगा था।

सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी के इस ‘हाई-वोल्टेज ड्रामे’ से भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने खासी नाराजगी जताई है। पार्टी की किरकिरी होते देख आलाकमान ने विधायक को सख्त लहजे में फटकार लगाई है, जिसके बाद ही इस ड्रामे पर फिलहाल विराम लगा है।

आम जनता: ‘सुलह’ के इंतजार में पिसा रहा आम आदमी

​इस पूरे प्रकरण की सबसे दुखद तस्वीर वह है जिसे नजरअंदाज किया जा रहा है— राजस्व विभाग का कामकाज ठप होना।

 

छत्तीसगढ़ के किसान अपने खेतों के कागजात, नामांतरण और अन्य जरूरी प्रमाण पत्रों के लिए भटक रहे हैं। विधायक और प्रशासन के बीच चल रहे इस ‘सह-मात’ (चेकमेट) के खेल में शासन की मशीनरी सिस्टम पूरी तरह से पंगु होती नजर आ रही है।

 

आपकी जानकारिबके लिए बता दे की जहाँ एक ओर ‘सुशासन’ सरकार का दावा करने वाली भाजपा सरकार है और दूसरी ओर कानून हाथ में लेने वाले जनप्रतिनिधि विधायक एवं उनके कार्यकर्त्ता है।

 

क्या एक मजिस्ट्रेट की पिटाई के बाद भी प्रशासन केवल ‘तमाशा’ देखता रहेगा? जनता अब यह सवाल पूछने को मजबूर है कि आखिर कब तक उनके काम बड़े विधायक एवं बड़े अफसरों के घमंड के आगे बलि चढ़ते रहेंगे?

 

अब देखने वाली बात यह है की इस नायब तहसीलदार के पिटाई के बाद हड़ताल करने के नाम पर जगह जगह मौज मस्ती करने वाले अफसरों की पिकनिक पर कब लगाम लगेगा और विधायक एवं उनके कार्यकर्ताओ पर लगे आरोपों एवं दर्ज FIR पर कब गिरफ़्तारी होंगी जिससे आम जनता को होने वाली परेशानियों से निजात मिल सके एवं मौज मस्ती पिकनिक करने वाले अफसरों की वापसी पुनः काम काज में हो सके।

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