सरगुजा समय अंबिकापुर :- कहने कों तो छत्तीसगढ़ मे भाजपा की सुशासन वाली सरकार हैं परन्तु धरातल पर इस वाक्य का कोई लेना देना नहीं हैं।
अंबिकापुर मे गुदरी चौक स्थापित लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल के संचालक एवं स्टॉफ कों अपने निजी स्वार्थ साधने के चक्कर मे जबरजस्ती विवाद करवा दिया गया जबकि जिस ट्रांसफार्मर का विवाद बताया जा रहा हैं वह ट्रांसफार्मर विवाद का विषय हैं ही नहीं अगर यह ट्रांसफार्मर विवाद का विषय रहता तो ट्रांसफार्मर लगाने के लिए विद्युत विभाग ने सर्वप्रथम बिजली पोल लगाया होगा उस समय विवाद नहीं फिर क्रेन के माध्यम से ट्रांसफार्मर कों उस पोल मे चढ़ाया गया होगा कोई विवाद नहीं उसके बाद 11 केवी पवार सप्लाई का केबल खींचा गया कोई विवाद नहीं मुख्य विवाद कब बताया जा रहा जब उस ट्रांसफार्मर मे पवार सप्लाई किया जाने लगा तब।
मतलब साफ दीखता हैं की यह मोहल्ले मे निवासरत लोगों की नहीं बल्कि स्वयं के हित कों साधने की पूरी प्रक्रिया थी क्योंकि अगर मोहल्ले के लोगों के हित एवं आम नागरिकों कों उक्त अस्पताल से होने वाली समस्याओं की बात होती तो बिजली पोल लगाने समय ही विरोध किया जाता लेकिन ऐसा नहीं हुआ मतलब स्पष्ट हैं की निजीस्वार्थ की पूर्ति नहीं हुई इस लिए इसे मोहल्ले वासियों के समस्याओं एवं सड़क जाम होने का कारण बता कर पुरे प्लानिंग से घटना की कहानी लिखी एवं उसी क्रम मे घटना कों घटित किया गया।
बता दें की भाजपा के कार्यकर्ताओं ने गुंडई करते हुए अपने आलाकमान नेताओं कों कटघरे मे खड़ा कर दिया अब देखने वाली बात यह होंगी की वह कार्यकर्त्ता जिन्हे आम जनता से कोई सरोकार नहीं हैं जिनके मोहल्ले मे गीता प्रेस मे आग लगने के बावजूद सब अपने मस्ती मे मदमस्त थे जिन्होंने इस आग लगने के समय नदारत रहे वही गुदरी चौक स्थित अभय सिंह जिन्होंने एक दिन पूर्व इलाज करवा अंबिकापुर आये थे वह बीमारी वाले हालत मे गीता प्रेस मे लगे आग कों बुझाने का प्रयास किया था परन्तु ये जो आज वार्ड की समस्याओं की बात कर रहे हैं तत्काल आग लगने की स्थिति मे पहुंच भी नहीं पाए थे और आज सरेआम गुंडई करके भाजपा के आला कमान के सर कों झुकाने एवं उन्हें सवालों के घेरे मे खड़े कर दिए हैं जिसमे कांग्रेस कों बैठें बैठाये राजनितिक मुद्धा मिल गया हैं क्योंकि आदिवासियों के हित की बात करने वाली पार्टी के कार्यकर्ताओं ने आदिवासी पत्रकार कों ही धो डाला अब अनुसाशन का गुड़गान गाने वाली भाजपा पार्टी इन गुंडागर्दी करने वाले कार्यकर्ताओं पर कुछ कार्यवाही करती हैं या फिर हाथी के दाँत दिखाने के कुछ और खाने के कुछ और वाली कहावत चरितार्थ कर दिया जायेगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें की जब गीता प्रेस मे आग लगी थी तब मेरे स्वयं के द्वारा लगभग आधा घंटा तक ये शर्मा परिवार जिनके स्वयं के फर्नीचर की दूकान हैं उनसे बिजली पवार सप्लाई काटने के लिए प्लास की मांग करते रहे लेकिन लगभग आधा घंटा गकत इन लोगों मे किसी ने प्लास नहीं दिया और गीता प्रेस मे लगे आग से अपने हाथ सेकते दिखे बड़ी मस्सकत के बाद प्लास दिया गया तब मेरे द्वारा ट्रांसफार्मर से ग्रिफ निकालकर पावर सप्लाई बंद किया गया उस समय ये मोहल्ले एवं आम नागरिकों की हित समझने वाले गायब थे जबकि सभी का घर अगल बगल ही था।
सबसे बड़ी विडंबना देखिये शहर मे लगातार अपराध बढ़ता जा रहा हैं लेकिन पुलीसिया व्यवस्था एकदम लचर एवं लाचार होती नजर आ रही हैं विचारणीय बात हैं की जिस स्थान पर कोतवाली थाना का प्रभारी मौजूद हो वहां महिला डॉक्टर कों धमकाना अस्पताल संचालक पर हमला करना गाड़ी मे तोड़फोड़ करके जान से मारने का प्रयास करना बिजली विभाग के अफसर कों माँ बहन की गाली देते हुए देख लेने की बात कहते हुए धमकी देना एवं तमाम मामले मे मिडिया कवरेज करने आये आदिवासी पत्रकार की पिताई कर देना वो भी कोतवाली थाना प्रभारी की मौजूदगी मे अत्यंत निंदनीय हैं।
इसका मतलब साफ हैं की कोतवाली थाना प्रभारी भाजपा कार्यकर्ताओं के गुंडई के आगे नतमस्तक हो गए एवं कोतवाली प्रभारी की मौजूदगी एवं मौन स्वीकृति ही इस घटना कों भारी सह प्रदान किया जिससे पत्रकार की पिटाई डॉक्टर के ऊपर हमला गाड़ी मे तोड़ फोड़ जैसी घटना घटित हो गई जिससे जिम्मेदार थाना प्रभारी कों भी माना जा सकता हैं।
अगर कोतवाली थाना प्रभारी तत्पर रहते माहौल एवं भीड़ पर कंट्रोल कर लेते एवं हुड़दंगई करने वालों कों हिरासत मे ले लिया जाता और डॉक्टर के गाड़ी मे तोड़फोड़ करने वालों कों तत्काल हिरासत मे लिया जाता तो भीड़ उग्र नहीं होती और घटना घटने से बच जाता लेकिन ऐसा प्रतीत होता हैं की भाजपा के कार्यकर्ताओं की गुंडई की कहानी लिखी जा चुकी थी जिसके आगोश मे अस्पताल संचालक महिला डॉक्टर अन्य स्टॉफ बिजली विभाग के अफसर एवं आदिवासी पत्रकार सभी आ गए जिन्हे डराया धमकाया मारा गया लेकिन कोतवाली प्रभारी मुकदर्शक बने रहे जिससे यह स्पष्ट होता हैं की प्रभारी महोदय कोतवाली थाना संभाल पाने मे असमर्थ है।
सबसे बड़ी बात की अस्पताल एवं भाजपा कार्यकर्ताओं के बिच बढे विवाद मे नगर निगम की भूमिका भी काफ़ी महत्वपूर्ण एवं संदिग्ध हैं जो की जाँच का विषय भी हैं।

