सरगुजा समय अंबिकापुर:- रामानुजगंज रोड स्थित निजी सिद्धार्थ हॉस्पिटल एक बार फिर विवादों के घेरे में है। पूर्व में एक्सपायरी वैक्सीन लगाने के गंभीर मामले के बाद अब अस्पताल प्रबंधन की एक और खौफनाक व गैर-जिम्मेदाराना करतूत सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल के स्टाफ ने साढ़े तीन साल के एक मासूम बच्चे को 5 महीने पहले एक्सपायर हो चुका एंटीबायोटिक इंजेक्शन लगा दिया।
5 महीने पहले एक्सपायर हो चुका था इंजेक्शन, बच्चे की रगों में उतारा:- लखनपुर निवासी शम्स खान अपने 3 वर्ष 6 माह के पुत्र उमैर खान के इलाज के लिए सिद्धार्थ हॉस्पिटल पहुंचे थे। डॉक्टर के परामर्श के बाद अस्पताल स्टाफ ने मासूम को ‘Amikacin 250 mg’ इंजेक्शन लगा दिया। अगले दिन जब पिता ने खाली शीशी (बैच नंबर: L-24E-5B) को देखा तो दंग रह गए—उस पर एक्सपायरी डेट अप्रैल 2026 दर्ज थी, जबकि इंजेक्शन सितंबर 2026 में लगाया गया था। पीड़ित पिता ने तुरंत कलेक्टर से इसकी लिखित शिकायत कर सीसीटीवी फुटेज व मेडिकल रिकॉर्ड जब्त करने की मांग की।
नोडल अधिकारी डॉ. पी. के. सिन्हा की टीम ने की जांच, मिलीं 3 शीशियां एक्सपायरी इंजेक्शन:- शिकायत मिलते ही स्वास्थ्य महकमा हरकत में आया। नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ. पी. के. सिन्हा एवं उनकी टीम ने सिद्धार्थ अस्पताल में तत्काल दबिश देकर सघन जांच की। जांच के दौरान अस्पताल के वार्ड व स्टॉक में दवाओं के रख-रखाव में भारी लापरवाही उजागर हुई। डॉ. पी. के. सिन्हा और उनकी टीम ने मौके से 3 शीशी (नग) एक्सपायरी इंजेक्शन बरामद कर जब्त किए। जांच में एक्सपायरी इंजेक्शनों का मिलना यह साफ दर्शाता है कि अस्पताल में मरीजों को एक्सपायर्ड दवाएं देना कोई अनजाने में हुई भूल नहीं, बल्कि नियमित लापरवाही का हिस्सा बन चुका है।
ऐसे अस्पतालों से आम नागरिकों को सावधान रहने की जरुरत है एवं अस्पताल से दुरी बनाने की सख्त आवश्यकता है :- ऐसे अस्पतालों में जाने से बचने की जरुरत है सिद्धार्थ अस्पताल की यह निरंतर दोहराई जा रही आपराधिक लापरवाही मरीजों के जीवन के लिए सीधा खतरा है। पहले एक्सपायरी वैक्सीन और अब मासूम बच्चों को एक्सपायर्ड एंटीबायोटिक देना बेहद घातक है, जिससे किडनी फेलियर, दवा का बेअसर होना या जानलेवा एलर्जिक शॉक लग सकता है। जब प्रबंधन बुनियादी एक्सपायरी जांचने के प्रति भी संवेदनहीन है, तो आम जनता को सतर्क रहने और ऐसे लापरवाह अस्पताल में जाने से पूरी तरह बचने की सख्त जरूरत है। साथ ही, किसी भी अस्पताल में इलाज के दौरान हर दवा और इंजेक्शन की एक्सपायरी डेट स्वयं जांचना बेहद जरूरी है।
