अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध का नया मोड़| चीन ने अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी बोइंग से नए जेट विमानों की डिलीवरी लेने से इनकार कर दिया है। यह निर्णय अमेरिका द्वारा चीनी वस्तुओं पर 145% टैरिफ लगाने के जवाब में लिया गया है।
चीन का निर्णय और उसका प्रभाव
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चीन ने अपनी सभी एयरलाइनों को निर्देश दिया है कि वे बोइंग से नए विमान और अमेरिकी निर्मित विमान संबंधी उपकरणों की खरीदारी तुरंत रोक दें।
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इस कदम से बोइंग के शेयरों में 3% की गिरावट आई है, जबकि यूरोपीय प्रतिस्पर्धी एयरबस के शेयरों में 1% की वृद्धि हुई है।
- चीन की प्रमुख एयरलाइंस—एयर चाइना, चाइना ईस्टर्न और चाइना सदर्न—ने 2025 से 2027 के बीच 179 बोइंग विमानों की डिलीवरी की योजना बनाई थी, जो अब अनिश्चित हो गई है।
अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध की पृष्ठभूमि
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी वस्तुओं पर 145% तक के टैरिफ लगाए हैं, जिसके जवाब में चीन ने अमेरिकी वस्तुओं पर 125% टैरिफ लगाया है।
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चीन ने अमेरिकी कंपनियों से विमान संबंधी उपकरणों और पुर्जों की खरीदारी भी रोक दी है, जिससे मौजूदा बोइंग विमानों के रखरखाव पर भी असर पड़ेगा।
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इसके अलावा, चीन ने अमेरिका को दुर्लभ पृथ्वी धातुओं और मैग्नेट्स के निर्यात पर भी रोक लगा दी है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उपकरणों के निर्माण में आवश्यक हैं
बोइंग के लिए संभावित परिणाम
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बोइंग के लिए चीन एक प्रमुख बाजार है, और इस निर्णय से कंपनी की वैश्विक बिक्री पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
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कंपनी ने इस स्थिति पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय बोइंग के लिए एक बड़ा झटका है।

आगे की संभावनाएं
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चीन की एयरलाइंस अब यूरोपीय निर्माता एयरबस या घरेलू निर्माता COMAC की ओर रुख कर सकती हैं
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विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह टकराव जारी रहा, तो अमेरिका-चीन व्यापार, जिसकी 2024 में अनुमानित कीमत $650 बिलियन थी, पूरी तरह से ठप हो सकता है।
यह निर्णय अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध में एक नया मोड़ है, जिसका प्रभाव वैश्विक विमानन उद्योग और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है।
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