सरगुजा समय अंबिकापुर:- संभाग मुख्यालय अंबिकापुर के चौक-चौराहों पर इन दिनों नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। घड़ी चौक से लेकर आकाशवाणी तिराहा, संगम चौक, बनारस रोड और देवीगंज रोड, थाना चौक बंगाली चौक बिलासपुर चौक —शहर का ऐसा कोई कोना नहीं बचा है जहां अवैध लोहे के विशालकाय होर्डिंग्स और बेतरतीब लटकते फ्लेक्स ने शहर की खूबसूरती पर कालिख न पोती हो। सबसे बड़ा सवाल यह है कि महापौर द्वारा अवैध होर्डिंग्स लगाने वालों और संबंधित एजेंसियों पर ‘सीधी FIR’ दर्ज कराने का जो कड़ा ऐलान किया गया था, वह आखिर फाइलों से निकलकर जमीन पर कब उतरेगा?
शहर के व्यस्त चौराहे पर स्थापित बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के चबूतरे और रेलिंग को व्यावसायिक कंपनियों ने विज्ञापन का अड्डा बना दिया है। ज्वेलरी ब्रांड ‘किशना’ के बड़े-बड़े पोस्टर प्रतिमा स्थल के चारों ओर कतारबद्ध तरीके से चिपका दिए गए हैं, जिससे प्रतिमा स्थल का स्वरूप पूरी तरह विज्ञापनी घेरे में तब्दील हो चुका है।

अंबिकापुर शहर की सुंदरता और सार्वजनिक मर्यादा को ताक पर रखकर व्यावसायिक विज्ञापनों का अवैध मकड़जाल लगातार फैलता जा रहा है। शहर के प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर बेरोकटोक लगाए जा रहे अवैध पोस्टर और होर्डिंग न केवल यातायात और दृश्यता को बाधित कर रहे हैं, बल्कि महापुरुषों के सम्मान को भी ठेस पहुंचा रहे हैं।
हवा में उड़ गए में वादे, ज़मीन पर ‘अंधेरगर्दी’ कुछ समय पहले निगम प्रशासन और महापौर ने सार्वजनिक मंच से ताल ठोकते हुए चेतावनी दी थी कि बिना अनुमति शहर में विज्ञापन टांगने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, उनके खिलाफ संपत्ति विरूपण अधिनियम के तहत थानों में नामजद एफआईआर होगी। लेकिन धरातल पर हकीकत बिल्कुल उलट है। आज तक न तो किसी बड़ी विज्ञापन एजेंसी पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हुआ और न ही किसी रसूखदार पर डंडा चला। जनता पूछ रही है—क्या वह बयान केवल जनता का गुस्सा शांत करने के लिए दिया गया जुमला था, या फिर विज्ञापन माफिया के रसूख के आगे नगर निगम का बुलडोजर पंचर हो चुका है?

शहर में जहाँ विज्ञापन माफीयाओं से आम नागरिक तंग है और हादसों का शिकार हो रहा वही निगम के राजस्व को करोड़ों की चपत भी हो रही है। बता दें की शहर के मुख्य चौराहों पर लगे ये अवैध होर्डिंग सिर्फ आंखों की चुभन नहीं हैं, बल्कि नगर पालिक निगम के खजाने में लगने वाला करोड़ों रुपये का डाका भी हैं।
शहर में नगर निगम की व्यवस्था के बजाय नरक निगम वाली स्थिति दिख रही है अंबिकापुर में न अनुमति, न टैक्स बावजूद विज्ञापन माफिया की मौज :- जहाँ शहर में कायदे से हर होर्डिंग का टेंडर, साइज का निर्धारण और वार्षिक विज्ञापन कर जमा होना चाहिए। मगर अंबिकापुर नगर निगम में वर्षो से काबिज विज्ञापन प्रभारी के सांठगांठ के खेल के चलते बिना तय कर शुल्क दिए लाखों के कमर्शियल प्रचार खुलेआम अवैध रूप से चल रहे हैं।

नगर निगम की फ्लेक्स उतारने की नौटंकी मासूम जनता कों भ्रमित करने का कार्य : निगम का अतिक्रमण दस्ता कभी-कभार दबाव बनने पर केवल फ्लेक्स फाड़कर खानापूर्ति कर लेता है। लोहे के भारी-भरकम फ्रेम वहीं छोड़ दिए जाते हैं। 48 घंटे के भीतर उसी लोहे के ढांचे पर दूसरा नया विज्ञापन सीना ताने खड़ा नजर आता है।
शहर में लगे अवैध होर्डिंग से आंधी-तूफान में शहर की जनता के सिर पर ‘मौत का साया’ हरदम मंडराता रहता है परन्तु निगम के आला अफसर निद्रासन अवस्था में व्यस्त रहते है और वही सम्बंधित विभाग के प्रभारी कमीशन की मोटी रकम के कारण मुँह आँख एवं अपना हाथ बंद कर लेते है।
बता दें की सड़क किनारे और डिवाइडरों के बीच बिना किसी तकनीकी सुरक्षा प्रमाण-पत्र (Structural Stability Certificate) के खड़े किए गए ये लोहे के विशालकाय बोर्ड कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं। तेज आंधी या बारिश के दौरान इन वजनी ढांचों के गिरने से राहगीरों की जान जाने का खतरा हमेशा बना रहता है। शहरवासी यह समझ नहीं पा रहे कि निगम प्रशासन किसी बड़े हादसे और किसी मासूम की जान जाने का इंतजार क्यों कर रहा है?

जानकारी के लिए बता दें की यहाँ संपत्ति विरूपण अधिनियम का खुला उल्लंघन: शासकीय व सार्वजनिक संपत्तियों तथा स्मारकों पर बिना अनुमति प्रचार सामग्री लगाना सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है। बावजूद उअके कार्यवाही के नाम पर सिर्फ जुमलाबाजी एवं मिडिया में बड़े बड़े वादों की बयानबाजी तक सिमित है।
नगर निगम अंबिकापुर से जनता के सीधे एवं तीखे सवाल सवाल: एफआईआर कब दर्ज होगी? सिर्फ मीडिया में सुर्खियां बटोरने के लिए बयान दिया गया था या थानों में तहरीर भी भेजी जाएगी? लोहे के अवैध ढांचे जब्त क्यों नहीं होते? सिर्फ कपड़ा फाड़ने से अवैध कारोबार कैसे रुकेगा, क्रेन चलाकर स्ट्रक्चर कब काटे जाएंगे? प्रिंटिंग प्रेसों पर नकेल कब? बिना निगम के वैध पंजीयन क्रमांक के धड़ल्ले से बैनर छापने वाले प्रिंटरों पर संपत्ति विरूपण का केस कब बनेगा?

शहर की जनता अब खोखले आश्वासनों से तंग आ चुकी है। अगर नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने जल्द ही इस ‘होर्डिंग माफिया’ के खिलाफ कड़े कदम नहीं उठाए, तो यह तय है कि शहर की सड़कों पर उतरकर नागरिकों को खुद अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।
इस पुरे मामले में जानकारी लेने के लिए हमन नगर निगम आयुक्त विनय अग्रवाल एवं निगम महापौर मंजूषा भगत से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया परन्तु उनसे संपर्क नहीं जो पाया वही महामाया होंडा शो रूम के संचालक ने इस तरह के अवैध होर्डिंग शहर में लगाने की बात किसी ठेकेदार कों देने की बात बताई।
