सरगुजा समय अंबिकापुर :- अंबिकापुर (सरगुजा) आदि शक्ति मां महामाया की पावन धरा अंबिकापुर में इस वक्त आस्था, मर्यादा और संस्कृति पर सबसे बड़ा प्रहार देखने को मिल रहा है। जिस पावन वेला में समूचा अंचल देवी जसगीत, उपवास और सात्विक अनुष्ठानों से गुंजायमान होना चाहिए, ठीक उसी वक्त सरगुजा पैलेस मैदान सहित शहर के तमाम बड़े होटलों और रिसॉर्ट्स ने नवरात्रि और डांडिया को अंधाधुंध कमाई का ‘प्राइवेट धंधा’ बना डाला है।
भक्ति और परंपरा के नाम पर बाहरी अभिनेत्रियों—उर्वशी रौतेला और अक्षरा सिंह को बुलाकर अश्लीलता परोसने और लाखों-करोड़ों के वीआईपी टिकट व पास बेचने का यह खुला खेल अब बेनकाब हो चुका है। स्थानीय नागरिकों, मातृशक्ति और धार्मिक संगठनों में इस ‘कमर्शियल तमाशे’ को लेकर जबरदस्त उबाल है।

डांडिया के नाम पर भद्दा मज़ाक, रिसॉर्ट-होटलों में ‘डिस्को कल्चर’
पारंपरिक डांडिया और गरबा मां दुर्गा के महिषासुर मर्दिनी रूप की स्तुति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुष्ठान है। मगर अंबिकापुर में होटल और रिसॉर्ट संचालकों ने इसे पब-संस्कृति और खुले बाजार में तब्दील कर दिया है:
टिकट बेचकर मोटी कमाई: आम नागरिकों और युवाओं से डांडिया के नाम पर हजारों रुपये के टिकट और पास वसूले जा रहे हैं। धार्मिक पर्व अब केवल रसूखदारों के पैसे पीटने का जरिया बन चुका है।
ग्लैमर की आड़ में फूहड़ता का खेल: आयोजकों ने केवल टिकटों की बिक्री बढ़ाने और भीड़ बटोरने के लिए बाहरी ग्लैमरस चेहरों को कई लाख के खर्च पर आमंत्रित किया है। जिस मंच से मां की स्तुति निकलनी चाहिए, वहां द्विअर्थी गानों और भड़कीले नृत्यों का तमाशा सजाने की तैयारी है।

स्थानीय लोक-संस्कृति का अपमान: सरगुजा की माटी जसगीत, करमा और शैला जैसी समृद्ध कलाओं की धनी है, लेकिन स्थानीय कलाकारों को दरकिनार कर केवल ‘कैश’ बटोरने के लिए बाहर से फूहड़ता का आयात किया जा रहा है।
“धार्मिक मामलों में भी नहीं थमी मुनाफे की भूख!” सोशल मीडिया से लेकर शहर के चौक-चौराहों तक जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। प्रबुद्ध नागरिकों और सनातनी संगठनों का सीधा सवाल है:
“क्या जगत जननी मां दुर्गा की आराधना अब होटलों और रिसॉर्ट्स के मुनाफे का साधन बनेगी? डांडिया के नाम पर अश्लील चेहरों को मंच देना और फिर धर्म की आड़ में टिकट बेचना सनातन आस्था का खुला माखौल है। यह भक्ति नहीं, बल्कि आस्था का बाजारीकरण है जिसे अंबिकापुर की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।”
फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टा और एक्स (Twitter) पर युवाओं के साथ साथ आम नागरिकों एवं सनातन एवं धार्मिक कार्यक्रमों कों बढ़ावा देने वालों ने विरोध की मुहिम छेड़ दी है।

टिकट बेचकर डांडिया कराने पर लगे पूर्ण रोक: पावन धार्मिक पर्व को व्यावसायिक धंधा बनाकर टिकट बेचने वाले तमाम आयोजनों की अनुमति तत्काल निरस्त करने की कार्यवाही करने की जरुरत है।
अश्लीलता परोसने वाले आयोजनों पर शिकंजा: डांडिया के नाम पर पश्चिमी डिस्को और अश्लील नृत्यों को बढ़ावा देने वाले वेन्यूज की जांच कर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
अंबिकापुर की जनता ने स्पष्ट संदेश दे दिया है—”आस्था हमारी जान है, यह कोई बिकने वाला सामान नहीं; धर्म के नाम पर फूहड़ता और कमाई का यह गंदा खेल अब फौरन बंद होना चाहिए!”
