सरगुजा समय छत्तीसगढ़ सरगुजा :-
अंबिकापुर के बड़े बड़े नामी होटलों में 500 से 5000 तक बिके गरबा डांडिया के पास, सेलिब्रिटी पर लुटाए गए लाखों; आस्था की आड़ में कमर्शियल लूट पर टैक्स अफसर ‘निद्रासन‘ में क्यों?
छत्तीसगढ़ सरगुजा अंबिकापुर:-गोस्वामी तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस (बालकाण्ड) की एक पंक्ति है जिसमें
“समरथ कहँ नहिं दोषु गोसाईं। रबि पावक सुरसरि की नाईं॥” का उल्लेख किया गया है जिसका अर्थ है की जो अत्यंत सामर्थ्यवान, शक्तिशाली अथवा सर्वाधिकार संपन्न है, उसे किसी भी बात या नियम के उल्लंघन का दोष नहीं लगता।
तो सरगुजा में डांडिया एवं गरबा के नाम पर करोड़ों रूपए का वारा न्यारा करने वाले रसूखदार दबंगों पर कार्यवाही करने की हिमाकत सबंधित विभाग नहीं जुटा पा रही है ऐसा माना जा सकता है। क्योंकि गरबा डांडिया करवाने वाले तमाम आयोजक सामर्थवान जान पड़ते है जिसके कारण इनके द्वारा कराए गए आयोजन में खुलेआम GST चोरी तो किया गया है परन्तु इनका दोष नहीं माना जा सकता है क्योंकि ये गरीब व्यापारी नहीं बल्कि समर्थवान् लोगों की श्रेणी में आते है। ऐसा माना जा सकता है।

जहाँ एवं ओर एक आम नागरिक अगर किसी साधारण होटल में बैठकर दो निवाले खा ले या प्यास बुझाने के लिए 20 रुपये की पानी की बोतल खरीद ले, तो बिल पर 5 से 18 फीसदी तक जीएसटी तुरंत ठोक दिया जाता है।
टैक्स न चुकाने पर छोटे दुकानदारों पर चाबुक चलाने में माहिर राज्य कर और वाणिज्यिक कर (GST) विभाग का यह कानून रसूखदारों के सामने आते ही अचानक पंगु क्यों हो जाता है? यह सवाल इस वक्त सरगुजा संभाग के हर जागरूक नागरिक के जेहन में दौड़ रहा है।
सरगुजा में अफसरों के आते ही इनके अलग ही हिसाब चालू हो जाते सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जहाँ नियम विरुद्ध कार्य करने वालों पर कार्यवाही करने की आवश्यकता होती है वही विभाग के अफसर इन आयोजनों में पहली पंक्ति में लगे सोफे एवं कुर्सीयों की सोभा बढ़ाते नजर आ ही जाते है सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बड़े महानगरों से आये इन सेलिब्रिटियों के कार्यक्रमों कों देखने के लिए विभाग के अफसरों कों फ्री का पास एवं पहली पंक्ति में स्थान मिल जाता है तो इनकी कार्यवाही लगभग लगभग वही स्थिल होती नजर आने लगती है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें की हाल ही में बीते नवरात्रि पर्व के दौरान आस्था और परंपरा के नाम पर अंबिकापुर के कई नामी होटलों, मैरिज लॉनों और फार्म हाउसों में जो कुछ हुआ, वह एक तक़राह से करोड़ों रुपये के कमर्शियल धंधे के अलावा कुछ नहीं था। समाज में धर्म श्रद्धा भक्ति के नाम पर सिर्फ अश्लीलता परोसने का कार्य कई आयोजन कर्ताओं ने किया है जिससे शहर में धार्मिक आयोजनों से विश्वनीयता पर बड़ा सवाल हो रहा है ऐसे आयोजन कर्ताओं का एक ही उद्देश्य रहता है स्वयं लाभ अर्जित करना ओर बड़े पैमाने में GST चोरी करना ओर शासन कों आर्थिक छती पहुंचना।

शहर के दिग्गज दिग्गज होटलो मैरिज लान में गरबा और डांडिया नाइट्स के नाम पर 500 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक के वीआईपी और वीवीआईपी पासेस खुलेआम बेचे गए। मुंबई और बड़े महानगरों से कई लाख रुपये की मोटी फीस देकर सेलिब्रिटीज को मंच पर उतारा गया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसाए पूरे सरगुजा संभाग एवं अंबिका शहर में इस तरह के इवेंट्स से आयोजकों ने करोड़ों की कमाई कर ली, लेकिन सरकार के खजाने में टैक्स का एक फूटी कौड़ी जमा हुआ या नहीं, इस पर जिम्मेदार महकमा आंखें मूंदे बैठा है यह अत्यंत गंभीर एवं विचारणीय बात है।

गरबा डांडिया के नाम पर आयोजक एवं होटलो के द्वारा खुलेआम कानून धज्जियां उड़ाई गई कहां गया 18 से 28 फीसदी टैक्स?:- मिली जानकारी के अनुसार जीएसटी अधिनियम के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि किसी भी प्रकार के व्यावसायिक मनोरंजन कार्यक्रम, म्यूजिक शो या टिकटेड इवेंट्स पर 18 से 28 प्रतिशत तक टैक्स देय होता है। इसके अलावा करोड़ों के टिकट बिके, कोई पक्का बिल नहीं 500 से लेकर 5,000 रुपये तक के डिजिटल और फिजिकल पास बेचे गए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह भी है की बेचे गए टिकटो पर जीएसटी नंबर दर्ज था? अगर हा टो विक्री किए गए टिकटो की संख्या कों किसने प्रमाणित किया की कितने टिकट बिक्री किए गए यह सबसे बड़ा जाँच का विषय है। यह भी देखने वाली बात है की क्या जनता से वसूले गए इस पैसे का टैक्स सरकार को दिया गया?

सेलिब्रिटी फीस पर RCM की अनदेखी? : मिली जानकारी के अनुसार बाहर से आए कलाकारों को 5 से 10 लाख रुपये तक नकद व ऑनलाइन माध्यमों से भुगतान दिए गए। नियमत: आयोजक को इस भुगतान पर ‘रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म’ (RCM) के तहत विभाग को 18% जीएसटी चुकाना अनिवार्य होता है। लेकिन शहर के आयोजकों ने 18% GST चुकाया की नहीं इसकी जानकारी या तो विभाग कों होंगी यह फिर आयोजक कर्ताओं कों।
लाखों की स्पॉन्सरशिप का खेल: मंच, बैकड्रॉप और होर्डिंग्स पर स्थानीय व्यापारियों से ली गई लाखों रुपये की प्रायोजन राशि का कोई टैक्स रिकॉर्ड सामने नहीं है यह भी चर्चा शहर में काफ़ी जोरों पर है की इस आयोजनों में स्पॉन्सरशिप देने वाले दुकानदारों की भी GST की जाँच होनी चाहिए।
सवाल यह उठता है कि क्या जीएसटी विभाग के इंटेलिजेंस विंग और एंटी-इवेजन ब्यूरो को शहर की नामी होटलों में बजते डीजे और बिकते महंगे टिकट नजर नहीं आए? जब सामान्य व्यापारी का रिटर्न लेट होने पर नोटिसों की झड़ी लगा दी जाती है, तो इन बड़े आयोजकों के बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन एवं कैश की स्क्रूटनी करने से विभाग के हाथ किसने बांध रखे हैं?

जनता का सीधा सवाल: कब जागेगा कुंभकर्णी विभाग?:- शहर और संभाग के छोटे व्यापारी और आम जनता अब सीधे तौर पर सवाल खड़े कर रहे हैं कि क्या टैक्स भरने की जिम्मेदारी सिर्फ गरीब और मध्यम वर्ग की है? बड़े बड़े रसूखदारों हॉटल संचालकों एवं मैरिज लान के संचालकों एवं उस संस्थान में धर्म के नाम पर अश्लीलता फैलाने वाले एवं करोड़ों रूपए की आर्थिक छती सरकार कों पहुंचाने वालों पर कार्यवाही के जगह मेहरबानी क्यों है।
क्या आस्था और उत्सव का नाम जोड़ देने से किसी को टैक्स चोरी का खुला लाइसेंस मिल जाता है?:- यदि विभाग सचमुच निष्पक्ष है, तो सरगुजा कलेक्टर, नगर पालिक निगम, पुलिस अधीक्षक, एसडीएम कार्यालय, खाद्य विभाग से ली गई भीड़ की अनुमति, होटलों की बुकिंग रसीद, सोशल मीडिया एवं शहर में हर चौक चौराहो पर बैनर पोस्टर के प्रचार पोस्टर और आयोजकों के बैंक स्टेटमेंट खंगालकर कड़ी जाँच करवाई जाए।

और तमाम आयोजकों पर दो दोषी पाए जाते है उनपर एवं किए गए कार्यक्रम वाले स्थान चाहे वह हॉटल हो मैरिज गार्डन हो या अन्य स्थल पर धारा 74 के तहत तत्काल कुर्की और 100% जुर्माने की नोटिस थमाते हुए कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए। वरना यह साफ माना जाएगा कि अफसरों की मेहरबानी और मिलीभगत से शासन के करोड़ों के राजस्व को चूना लगाया गया है।
अब देखना यह है कि करोड़ों के इस खेल पर जीएसटी के अधिकारी अपनी निद्रा तोड़ते हुए कठोर कार्यवाही करते है हैं या फिर फाइलों को रसूखदारों के दबाव में आकर दबा दिया जाता है।
जल्द ही हम इस पुरे मामले की जानकारी विभागवार आपके सामने खबर के माध्यम से लेकर आएंगे की किस विभाग ने इस मामले में क्या भूमिका निभाई है।
