दिल्ली/रायपुर/अंबिकापुर/बलरामपुर। सरगुज़ा और बलरामपुर जिले में शासकीय कर्मचारी के पद पर होते हुए भी पोस्ट ऑफिस और सहारा समूह का खुद एजेंट बने और अपने परिवार वालो, रिश्तेदारों को भी एजेंट बना डालें। हितग्राहियों का पोस्ट ऑफिस में खाता खोलना था उसे बगैर बताएं सहारा समूह में खाता खोलकर करोड रुपए का हेरा कर डाले। एजेंट हितग्राहियों से द्वारा जमा पैसा मांग रहें है तो अब टालमटोल कर रहे हैं।
सहारा समूह (Sahara India) में लगभग 10 करोड़ निवेशकों का पैसा फंसा हुआ है, और कुल फंसी हुई रकम 1.12 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न सहारा कंपनियों और कोऑपरेटिव सोसाइटियों में निवेशकों की संख्या इस प्रकार है?
प्रमुख सहारा सोसाइटियां और फंसे हुए निवेशक
सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड: लगभग 4 करोड़ निवेशक
सहरियायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी: लगभग 3.71 करोड़ निवेशक
सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्पोरेशन लिमिटेड: लगभग 2.33 करोड़ निवेशक
हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी: लगभग 1.8 करोड़ निवेशक
सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड: लगभग 75 लाख निवेशक
स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी: लगभग 37 लाख निवेशक।
शासकीय कर्मचारी हितग्राहियों का पोस्ट ऑफिस और सहारा समूह में खाता नहीं खोल सकते
पढ़िए सरकारी नियम?
01. छ.ग. सिविल सेवा आचरण नियम + केंद्र के CCS Rules में है कि कर्मचारी किसी “प्रतिबंधित/विवादित वित्तीय संस्था” को प्रमोट नहीं कर सकता। चाहे अपना पैसा हो या हितग्राही का एजेंट/मध्यस्थ बनना भी मना है।
02. सहारा पर अभी बैन है?
SEBI ने 2012 से सहारा की 2 कंपनियों पर नई डिपॉजिट लेने पर रोक लगा रखी है। 4 कोऑपरेटिव सोसाइटीज में भी नई जमा बंद है। अभी सिर्फ CRCS रिफंड चल रहा है। तो नई सदस्यता/खाता खोलने का सिस्टम ही वैध नहीं है। इसके बाद भी एजेंट के द्वारा हितग्राहियों से पैसे लेते रहें और जमा नही किए।
03. कानूनी रिस्क?
अगर आप हितग्राही का खाता खुलवाते हैं और बाद में पैसा फंसता है तो
– विभागीय जांच
– धोखाधड़ी/दुरुपयोग का आरोप
– सेवा से बर्खास्तगी तक हो सकती है
क्योंकि सरकारी कर्मचारी का नाम जुड़ते ही उसे “सरकारी गारंटी” जैसा माना जाता है। शासकीय पद पर रहते हुए खुद न किसी और का सहारा में खाता खोल सकते हैं, ये सेवा नियम और SEBI आदेश दोनों के खिलाफ है, सेवा से समाप्त बर्खास्त हो सकते हैं।

