सरगुजा समय अंबिकापुर:- अंबिकापुर सरगुजा में कु….. ते की तरह पनपते निजी अस्पतालों की संख्या शहर में संचालित किराना दुकान एवं मोबाईल दुकान से भी ज्यादा होती जा रही हैं जिसका कारण स्वास्थ्य विभाग एवं नगर पालिक निगम दोनों हैं इनके नियम विरुद्ध तरीके से कार्य करने वाली नीति का बड़े पैमाने में जाँच का विषय हैं।
एक ओर जहाँ स्वास्थ्य विभाग बड़े बड़े दावे के साथ सरगुजा में स्वास्थ्य व्यवस्थाओ के सुचारुपन की बाते करती नहीं थकती तो दूसरे तरफ वही स्वास्थ्य विभाग में शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी जैसे लोग अपने पत्नी के नाम से संचालित अस्पताल कों नियम विरुद्ध तरीके से लाभ दिलवाने एड़ी छोटी एक करके करोड़ों की अवैध कमाई करवा देता हैं जहाँ पर स्वास्थ्य विभाग अपनी मौन स्वीकृति प्रदान कर देता हैं लेकिन कार्यवाही नहीं होती।
बता दें की हाल ही में अंबिकापुर के गुदरी चौक में स्थित लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल में ट्रांसफार्मर लगाने के बात कों लेकर काफी हो हल्ला हुआ कुछ भाजपा नेताओं के द्वारा उक्त अस्पताल के संचालक के वाहन में तोड़फोड़, बिजली विभाग के अधिकारी कों गाली गलौज जान से मारने की धमकी के साथ आदिवासी पत्रकार की पिटाई के साथ नगर पालिक निगम की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर दिया जहाँ नगर निगम के ऊपर आरोप यह लगाया गया की निगम कमिश्नर ने उक्त अस्पताल के अवैध निर्माण वाले भाग कों तोड़ने का आदेश जारी किया बावजूद उसके ट्रांसफर कैसे लगाया जा रहा जहाँ पर नगर निगम के कार्यशैली पर सवाल खड़ा हो गया।
हम आपको बताते हैं की सरगुजा में नगर पालिक निगम के कई तत्कालीन आयुक्त से लेकर वर्तमान आयुक्त की कार्यशैली काफ़ी संदेहास्पद रही हैं निगम आयुक्त के साथ साथ नगर निगम के भवन शाखा में वर्षो से कब्ज़ा जमाये बैठें अधिकारी तमाम प्रकार के नियम विरुद्ध निर्माण के आका माने जा रहे हैं इनके इसारे पर तमाम भवन अवैध निर्माण के राह में हैं जो आगे चलकर विवाद का रूप ले लेते हैं। और ये अफसर मात्र नोटिस जारी कर अवैध धन उगाही करने का कार्य करते आ रहे हैं, अगर ऐसा नहीं होता तो अवैध एवं नियम विरुद्ध तरीके से निर्माण में गायत्री अस्पताल एवं भजगावाली निजी अस्पताल कों वर्षो पहले तोड़ने के आदेश का पालन नगर निगम क्यों नहीं करवा पाई क्यों अपने ही आदेश कों कमिश्नर कों बार बार बदलना एवं अपने ही आदेश का अवहेलना करना पड़ा यह जाँच का विषय हैं।
अंबिकापुर में संचालित भजगावली अस्पताल, गायत्री अस्पताल, दयानिधि अस्पताल एवं एस आर एस अस्पताल, माता राजरानी मेमोरियल अस्पताल, मासूम अस्पताल, शिशु मंगलम जैसे कई निजी अस्पताल, क्लिनिक मॉल, मेगा शॉप, विशाल मेगा मार्ट, एवं कई अन्य बिल्डिंग हैं जहाँ अवैध एवं नियम विरुद्ध तरीके से अस्पताल एवं अन्य व्यवसायिक प्रयोजनन में भवन कों लाया जा रहा हैं जिसके जाँच उपरांत कई कमिया भी सामने आती रही हैं लेकिन नगर निगम के द्वारा कार्यवाही के नाम पर सिर्फ मोटी रकम उगाही की जाती हैं ऐसा प्रतीत होता हैं।
सुचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी में नगर निगम ने जो दस्तावेज प्रदान किया उसमे निजी अस्पताल गायत्री हॉस्पिटल के बहुत बड़े भाग एवं 4 फ्लोर का निर्माण अवैध रूप से किया गया हैं जिसको तोड़ने का आदेश नगर निगम ने ही जारी किया था भजगावली अस्पताल के अवैध निर्माण में भी तोड़ने का आदेश नगर निगम ने ही दिया लेकिन टुटा नहीं।
इससे यह समझा जा सकता हैं की नगर निगम में वर्षो से भवन शाखा में बैठें अफसर जो की अपने घूसखोरी वाली नियत से कार्य कर रहे हैं एवं नियम विरुद्ध तरीके से निजी अस्पताल कों संचालित करने अनापति प्रमाण पत्र भी जारी कर रहे हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें की सुचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी में निजी अस्पताल दयानिधि कों नगर निगम के द्वारा जारी किये गए NOC अथार्थ अनापत्ती प्रमाण पत्र में स्पष्ट लिखा गया हैं की इस स्थान एवं भवन पर अस्पताल का संचालन किया जा सकता हैं लेकिन अगर कोई शिकायत आती हैं तो यह अनापत्ति प्रमाण पत्र स्वतः शून्य हो जायेगा।
मतलब इस तरह के अनापत्ती प्रमाण पत्र कों रेवड़ी के तरह बाटना नगर निगम में भवन शाखा में वर्षी से पदस्थ अधिकारी की घूसखोरी वाली नियत से कार्य करना दर्शाता हैं।
इसी नगर निगम के एक तत्कालीन आयुक्त एवं यही भवन शाखा के स्टॉफ के दलाली एवं घूसखोरी के कारण नावापारा में स्थित भूमि जो नवनिहाल बच्चों के आँगनबाड़ी के लिए भूमि आवंटित किया गया था आज तक बंसल इलेक्ट्रिकल के संचालक के अवैध कब्ज़ा से मुक्त नहीं करवा पाए ऐसी कार्य शैली नगर निगम के कई आयुक्त एवं वर्षो से एक स्थान पर काबिज अफसरों की हैं जिसके कारण सरगुजा में अवैध निर्माण, अवैध भूमि कब्ज़ा, अवैध तरीके से निजी अस्पताल का संचालन, अवैध तरीके से क्लिनिक का संचालन किया जा रहा हैं और नगर निगम के अफसर नियम विरुद्ध कार्य करते हुए अवैध धन उगाही में ही मदमस्त हैं।
जल्द ही आपको इस नगर निगम के द्वारा कैसे कई निजी अस्पताल के अवैध निर्माण कों पैसा लेकर वैध कर दिया गया का खुलासा के माध्यम से बताया जायेगा।
स्वास्थ्य विभाग की निजी अस्पतालों के नियम विरुद्ध तरीके से संचालन शासकीय डॉक्टर एवं तत्कालीन नर्सिंग होम एक्ट के प्रभारी संदीप त्रिपाठी की अपनी पत्नी के नाम से संचालित दयानिधि अस्पताल पर मेहरबानी, गायत्री एवं भजगावली निजी अस्पताल के नहीं टूटने के पीछे की कहानी अगले खबर में हम आपको बताएँगे।

