सरगुजा समय अंबिकापुर :- सरगुजा संभाग में पटवारियों का अंदाज एकदम से अलग निराला होना माना जाता हैं कहने कों तो इनके पद एक मात्र पटवारी का होता हैं जिनकी वेतनमान की बात की जाए तो हजारों में होती हैं परन्तु इनके करनामे करोड़ों वाले होते हैं।
जिसमे सरगुजा संभाग के सरगुजा जिला में पदस्थ एक पटवारी जो अपने आप कों तत्कालीन कलेक्टर विलास भोस्कर एवं कई अन्य तत्कालीन कलेक्टरों का खास होने का दावा अंबिकापुर में किया जाता रहा हैं जिसका जिता जागता उदाहरण देखने कों सरगुजा में लगातार मिलता रहा। जिससे यह स्पस्ट होता हैं की उक्त पटवारी के द्वारा कलेक्टर के खास होने का दावा करना गलत नहीं था क्योंकि उक्त पटवारी ने यह विदेश यात्रा एवं कार्यालय से बिना अवकाश लिए अनुपस्थित होते हुए कई अन्य जगह का भ्रमण करते हुए जम कर मौज मस्ती करने का दावा किया जा रहा हैं जहाँ इस पटवारी के द्वारा 10-15 दिनों तत्कालीन कलेक्टरों के आँख में धूल झोकते हुए अपने विभाग के अफसर से मिलीभगत कर खूब सैर सपाटा किया जिसका वेतन भी सरकार से प्राप्त करता रहा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें की उक्त पटवारी के करनामे इतने बड़े बड़े एवं निराले हैं की शहर में यह चर्चा काफ़ी रही की इस पटवारी के इसारे पर तत्कालीन कलेक्टर कार्य करते हैं इसी कारण इनके विदेश यात्रा में किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गई।
अब देखने वाली बात यह हैं की वर्तमान में सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत के द्वारा इस बेकाबू पटवारी के विदेश यात्रा एवं मनमौजी वाले प्रविति से कार्य करने के मामले में कार्यवाही कब तक हो पाती हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें की उक्त पटवारी का दबदबा इतना तगड़ा हैं की अंबिकापुर तहसील से तबादला रोकवा पाने में जब कलेक्टर के सामने दाल नहीं गली और उसका तबादला अन्य तहसील में कर दिया गया तो वहां भी उक्त जुगाडू पटवारी ने एक विभागीय अफसर से जुगाड़ लगवा कर अपने मन मुताबिक हल्का नंबर में अपनी पोस्टिंग सम्बंधित अफसर कों आर्थिक लाभ प्रदान करके करवा लिया।
इस पटवारी के विदेश यात्रा एवं विभाग से बिना अनुमति एवं अवकाश लिए कार्यालय से नदारत होकर अन्य कई पर्यटक स्थल में मौज मस्ती उस वक्त भी किया गया जब राज्य में सरकार का यह आदेश था की कोई भी शासकीय अधिकारी कर्मचारी अपने मूल पदस्थापना स्थान से नदारत नहीं रहेंगे उस वक्त भी इस दबंद एवं बेलगाम पटवारी के द्वारा अन्य राज्य एवं अन्य देश में बेखौफ रूप से मौज मस्ती करते रहे। इस पटवारी के इस तरह के कारनामें से यह कहावत सिद्ध होता नजर आता हैं की बाप बड़ा ना भैया सबसे बड़ा रूपया।

