सरगुजा समय बलरामपुर –
छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव 2025 के अवसर पर शासकीय महाविद्यालय बलरामपुर में आज भूतपूर्व छात्र सम्मेलन (Alumni Meet) का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ। यह सम्मेलन महाविद्यालय की स्थापना के प्रथम बैच 2010 से लेकर 2025 तक के सभी पासआउट विद्यार्थियों को समर्पित रहा।
राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के अंतर्गत महाविद्यालय में विभिन्न शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की श्रृंखला चल रही है। इन्हीं कार्यक्रमों के अंतर्गत यह भूतपूर्व छात्र सम्मेलन आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगरपालिका परिषद बलरामपुर के अध्यक्ष लोधी राम एक्का थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में सांसद प्रतिनिधि मंगलम पाण्डेय, भाजयुमो बलरामपुर मंडल अध्यक्ष श्री अंश सिंह एवं अभाविप बलरामपुर जिला संयोजक ऋतिक सिंह उपस्थित रहे। सम्मेलन की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. नंद कुमार देवांगन ने की ।
मुख्य अतिथि लोधी राम एक्का ने अपने संबोधन में कहा कि भूतपूर्व छात्र सम्मेलन महाविद्यालय और पूर्व विद्यार्थियों के बीच मजबूत संबंध बनाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन से महाविद्यालय के विकास और प्रगति को नई दिशा मिलती है। भूतपूर्व छात्र अपने अनुभवों और उपलब्धियों को साझा कर वर्तमान विद्यार्थियों को सही मार्गदर्शन प्रदान कर सकते हैं। इससे न केवल महाविद्यालय की गौरवपूर्ण परंपरा आगे बढ़ती है, बल्कि नई पीढ़ी को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता भी मिलती है।
श्री एक्का ने जोर दिया कि पूर्व छात्र अपनी सफलता की कहानियों से वर्तमान विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, मेहनत और सकारात्मक सोच का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल पुराने छात्रों की स्मृतियाँ ताज़ा होती हैं, बल्कि महाविद्यालय और समाज के बीच सहयोग और सहभागिता की भावना भी मजबूत होती है।
प्राचार्य प्रो. नंद कुमार देवांगन ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि पूर्व छात्र किसी भी शैक्षणिक संस्थान की वास्तविक धरोहर होते हैं। उन्होंने कहा कि किसी महाविद्यालय की साख केवल उसकी इमारतों या सुविधाओं से नहीं, बल्कि उसके विद्यार्थियों की उपलब्धियों और योगदान से बनती है।
पूर्व छात्र जब अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं, तो उनका नाम ही संस्थान की पहचान बन जाता है। यह उपलब्धियाँ महाविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और संस्कारों का प्रमाण होती हैं। उन्होंने आगे कहा कि पूर्व छात्रों की सफलताएँ वर्तमान विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से नए विद्यार्थियों को लक्ष्य तय करने और चुनौतियों का सामना करने का आत्मविश्वास मिलता है।
उन्होंने जोर दिया कि पूर्व छात्रों का संस्थान से निरंतर जुड़ाव महाविद्यालय के शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास के लिए नई संभावनाएँ खोलता है। उन्होंने पूर्व छात्रों से आह्वान किया कि वे अपनी विशेषज्ञता, समय और सुझावों के माध्यम से महाविद्यालय की प्रगति में सक्रिय भूमिका निभाएँ, जिससे संस्था की प्रतिष्ठा और अधिक ऊँचाई प्राप्त कर सके।
विशिष्ट अतिथि श्री मंगलम पाण्डेय ने अपने वक्तव्य में कहा कि महाविद्यालय के पूर्व छात्र विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कर संस्थान का नाम रोशन कर रहे हैं।
उनकी मेहनत, संघर्ष और सफलताएँ वर्तमान विद्यार्थियों के लिए जीवंत उदाहरण हैं, जिनसे उन्हें लक्ष्य तय करने और कठिनाइयों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि पूर्व छात्रों का अनुभव और मार्गदर्शन नई पीढ़ी के लिए मूल्यवान संपत्ति है, जो उन्हें शिक्षा, करियर और समाजसेवा के हर क्षेत्र में सही दिशा प्रदान कर सकता है।
अंश सिंह ने कहा कि भूतपूर्व छात्रों की सहभागिता महाविद्यालय के विकास में नई ऊर्जा का संचार करती है। उनकी सक्रिय उपस्थिति न केवल संस्थान के शैक्षणिक और सांस्कृतिक वातावरण को सशक्त बनाती है, बल्कि महाविद्यालय और समाज के बीच सहयोग की भावना को भी गहरा करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूर्व छात्रों के सुझाव और अनुभव महाविद्यालय की योजनाओं और नई पहलों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित भूतपूर्व छात्र-छात्राओं ने अपने अनुभव साझा किए और महाविद्यालय के शिक्षकों से मिले मार्गदर्शन को जीवन की सफलता का आधार बताया। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे सम्मेलन नियमित रूप से आयोजित किए जाएँ ताकि पूर्व और वर्तमान विद्यार्थियों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान होता रहे।
कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के वर्तमान विद्यार्थियों और भूतपूर्व छात्रों ने संयुक्त रूप से सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। इन प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य, देशभक्ति गीत, समूह गान और लघु नाट्य शामिल थे। छात्रों ने अपनी प्रतिभा से कार्यक्रम को जीवंत बना दिया और दर्शकों ने उत्साहपूर्वक तालियों से उनका स्वागत किया। पूर्व छात्रों ने भी गीत और कविता पाठ के माध्यम से अपनी कला का प्रदर्शन किया। इन प्रस्तुतियों ने न केवल मनोरंजन किया बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और महाविद्यालय की रचनात्मकता को भी उजागर किया।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. नंद किशोर सिंह और संयोजन प्रो. ओमशरण शर्मा ने किया। समापन अवसर पर भूतपूर्व छात्र-छात्राओं को पेन और डायरी देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की सफलता में महाविद्यालय के संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों का विशेष योगदान रहा।

