सरगुजा समय अंबिकापुर – सरगुजा संभाग में स्वास्थ्य विभाग के लगातार गिरते स्तर पर लगाम लगाने अब संयुक्त संचालक अंबिकापुर के पद में बैठे अनिल शुक्ला ने अपनी कमर कस ली हैं।
सरगुजा संभाग में लगातार स्वास्थ्य विभाग में लचर व्यवस्था को सुधारने की जवाबदारी स्वास्थ्य विभाग के JD ने उठा ली है इसका उदाहरण यह देखने को भी मिला कि अभी एक दिन पूर्व ही उदयपुर स्वास्थ्य केंद्र के निरीक्षण में निकले JD अनिल शुक्ला ने पाया कि उदयपुर में स्वास्थ्य विभाग से एक दर्जन से अधिक कर्मचारी अपने ड्यूटी से नदारत थे जिसमें अस्पताल के BMO साहब भी नदारत मिले जिसके वजह से तत्काल स्वास्थ्य विभाग के JD ने BMO की छुट्टी करते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था को तंदुरुस्त करने के उद्देश्य से तत्काल BMO का प्रभार दूसरे डॉक्टर को दे डाला और बताया कि स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही की कोई गुंजाइश नही है।

सरगुजा आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में से एक है जहां मासूम गरीब ग्रामीण आदिवासियों के लिए राज्य एवं केंद्र सरकार के द्वारा कई तरह की लाभान्वित योजनाओं का संचालन किया जाता है परन्तु अफसोस की इसका सीधा – सीधा लाभ उन तक नहीं पहुंच पाता जिसका एक मात्र कारण है जिला के मुखिया बने बैठे CMHO एवं नर्सिंग होम एक्ट के प्रभारी इनके लापरवाही के कारण जिलों से लेकर गांव- गांव तक झोला झाप डॉक्टर अपने पैर अंगद की पैर के तरह जमा रखें है जिसका एक मात्र कारण है शहर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र,सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला अस्पताल तक इलाज के नाम पर बड़ी लापरवाही ।

हाल ही मे देखने को मिला कि हॉस्पिटल बंद होने के कारण कार में महिला का प्रसूति करवाना पड़ा तो कही झोला छाप डॉक्टर के इलाज के कारण मरीज को मृत्यु सैया में सोना पड़ गया यह सब इसी तरह के डॉक्टरों के दलाली का असर है जिन्हें मासूम मरीजों से कोई वास्ता नहीं सिर्फ अपने जेब भरने से मतलब है मासूम जनता मरती है तो मरे कुछ दलाल डॉक्टर अपना जेब भरे।

इसी कड़ी में सरगुजा समय ने एक खबर प्रकाशन किया था जिसमें हमने बताया था कि उदयपुर स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉक्टर दीपक गुप्ता कैसे अपने डिजिटल सिग्नेचर का अवैध तरीके से प्रयोग करते हुए कई निजी अस्पतालों एवं क्लिनिक में मरीजों के ब्लड जांच रिपोर्ट अवैध रूप से प्रदान किया जा रहा है कभी सरगुजा जिले के CMHO ने लेटर जारी करते हुए पूर्व में भी दिशानिर्देश जारी किया था कि किसी भी प्रकार के डिजिटल सिग्नेचर वाले जांच रिर्पोट तथ्यहीन एवं संदेहास्पद माने जाएंगे जिसका कोई भी तथ्य मान योग्य नहीं होगा बावजूद उसके सरगुजा CMHO के द्वारा डॉक्टर दीपक गुप्ता के कारनामों को नजर अंदाज करते हुए उनके डिजिटल सिग्नेचर वाली जांच रिपोर्ट देने ओर मासूम मरीजों के जान से खिलवाड़ करने के लिए खुल्ला छूट दे रखा गया है ऐसा माना जा सकता है?

अब डॉक्टर दीपक गुप्ता के डिजीटल सिग्नेचर वाले मामले के साथ साथ मासूम मरीजों के जान से खिलवाड़ एवं उदयपुर में पोस्टिंग होते हुए भी सरगुजा जिला अस्पताल में संलग्नीकरण करना किसकी मजबूरी है यहबतो भगवान ही जाने परन्तु सरगुजा समय की खबर को गंभीरता से लेते हुए सरगुजा स्वास्थ्य विभाग के JD ने अब CMHO को जांच कर 3 दिवस में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दे डाला है।

अब विचारणीय बात यह है कि अगर CMHO साहब का चहेता डॉक्टर दीपक गुप्ता निकला तो वह कैसे करेंगे क्योंकि चार निजी अस्पतालों के डिजिटल सिग्नेचर वाले रिपोर्ट तो सरगुजा समय ने ही अपने वेब पोर्टल में खबर के माध्यम से दे डाला है जिसकी जांच करने में CMHO साहब को आसानी होगी। उसके बाद भी अगर सिग्नेचर के माध्यम से डॉक्टर साहब नाम वाली रिपोर्ट चाहिए होगी तो चार ओर निजी अस्पताल के रिपोर्ट भी सरगुजा समय के द्वारा खबरवाके माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा ।
अब देखने वाली बात यह है कि जिला सरगुजा CMHO साहब अपने आला अफसर के आदेश का पालन करते है कि चहेतो को बचाने का प्रयास ।
आज के समय में सच्चाई खबर छापने से संबंधित दलालों द्वारा थाना पुलिस का धमकी भी दिया जाता है कि खबर मत छापों नहीं तो FIR दर्ज करवा देंगे झूठे केस में फंसा देंगे तो कोई नहीं दलाल भैया आप FIR करवाए हम मासूम जनता के हित के लिए खबर छापेंगे लड़ेंगे और आपकी दलाली भारी पड़ी और हमारे खिलाफ अपराध पंजीबद्ध करवा दिए तो कोई नहीं जेल भी चले जाएंगे लेकिन फिर छूटेंगे और फिर जनता के लिए लड़ेंगे और दलालों के खिलाफ ख़बर और छापेंगे।
वैसे एक बात बताए दलाल भैया वो जो आप मर्डर करवाने वाला धमकी दिए थे उसको अपनाए अगर आप उसमें सफल हो जाएंगे तो आप बच जाएंगे नहीं तो झूठे केस में जेल जाऊंगा तो भी आप तो दलालों के सरदार न बन जाएंगे ।

