सरगुजा समय अंबिकापुर :- अभी कुछ ही समय पूर्व छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री ने स्वच्छता कों लेकर किसी अधिकारी के द्वारा की जाने वाली लापरवाही में कड़े कार्यवाही की बात कह कर गए हैं परन्तु निगम आयुक्त एवं यातायत प्रभारी पर शायद उप मुख्यमंत्री के बातों का कोई असर नहीं पड़ा इनकी कार्यशैली से ऐसा लगता हैं की उप मुख्यमंत्री के बात कों एक कान से सुन दूसरे से निकाल दिया जिसके कारण ही शहर की सुंदरता कों एक व्यवसाई द्वारा अपने व्यापारीक लाभ के लिए अवैध फ्लेक्सी से शहर के हर चौक चौराहा कों बैनर फ्लेक्सी से पाट दिया.
इस तरह से शहर में अवैध रूप से बैनर फ्लेक्सी लगवाने ऐसा प्रतीत होता हैं की शहर में भू माफिया, रेत माफिया, सट्टा माफिया,कोयला माफिया, के बाद शहर में अब पटाका माफिया भी कोई बन सकता हैं.
मिली जानकारी के अनुसार मुकेश पटाखा एजेंसी के संचालक ने सभी अधिकारोंयों कों मैनेज कर रखा हैं जिसके वजह से खुलेआम शहर में ट्रैफिक सिग्नल हो या फिर शहर का हर चौक चौराहा तमाम जगह अपने अवैध फ्लेक्सी से शहर में गन्दगी मचा रखा हैं जिस कारण से सम्बंधित विभाग नगर निगम के अफसर एवं यातायात प्रभारी शांत हैं या फफिर यह भी माना जा सकता हैं की इन अफसरों की मौन स्वीकृति से ही उक्त व्यापारी ने शहर कों अपने निजी एवं व्यापारीक लाभ लेने के लिए बदरंग बना दिया और अपनी पहुंच से सम्बंधित विभाग के हाथ पैर बांध रखा हैं जिसकी वजह से सम्बंधित विभाग कार्यवाही करने में असमर्थ दिख रहा हैं।

इस व्यापारी के बढ़ते मनोबल एवं हौसले की बात अगर की जाए तों महानुभाव ने शहर के चौक में लगे ट्रैफिक सिग्नल, बिजली के खम्भे, स्मारक तक कों नहीं छोड़ा इस व्यापारी के हौसले इतने बुलंद हैं की चौक में लगे सिग्नल कों भी आधा ढक दिया। इन रसूखदार एवं दबंग व्यापारी के फ्लेक्सी से शहर के हर चौक चौराहे यहाँ तक की महामाया माँ मंदिर चौक ता ढके हुए हैं उसके बाद भी यातायत प्रभारी का किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं करना एवं छोटे – छोटे ठेले गुंटी चला कर अपना एवं अपने परिवार का भरण पोषण करने वालों पर इनके ज़बानी चाबुक चलती अक्सर दिख ही जाती हैं।
लेकिन मुकेश पटाखा एजेंसी के संचालक जो इनके ट्रैफिक सिग्न तक कों अवैध होर्डिंग फ्लेसी से ढाक कर रख दिया और समस्त नियमों की धज्जिया खुलेआम उड़ा रहा हैं उस महोदय पर ना ही इनकी जुबानी चाबुक चल पा रही हैं नहीं ही कार्यवाही के लिए इनकी कलम चल रही हैं. अब इसे व्यापारी की दबंगई कहा जाए या या फिर व्यापारी का रसूख या पैसों के दम पर सभी कों देख लेने का खुल्ला चैलेंज यह तों सम्बंधित व्यापारी या सम्बंधित विभाग ही जाने।

परन्तु इस व्यापारी के इस बढ़ते हौसला एवं तमाम नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाने वाले व्यापारी के आगे इन अधिकारीयों का नतमस्तक होने का कारण क्या हैं यह आम जनता समझ सकती ही जिसकी चर्चा अक्सर पान ठेलों से लेकर चाय के ठेलों तक चलतें रहती हैं. खैर शहर में चर्चाओ के बाजार से यह भी चर्चा उठ कर आ रही हैं की शहर के आला अफसर बड़े व्यापारी पर हाथ डालने से पहले अत्यंत रूप से घबराते हैं इस लिए जल्दी कार्यवाही करने की हिमाकत नहीं कर पाते अब इस चर्चा पर कितनी सच्चाई हैं यह तों सम्बंधित विभाग ही जाने या फिर यहाँ के आला अफसर कार्यवाही कर अपने व्यवहार ख़राब नहीं करना चाहते हैं.
इस दबंग एवं रसूखदार पटाखा व्यवसाई के हरकतों से एसा प्रतीत होता हैं की पीजी कॉलेज ग्राउंड में छोटे छोटे व्यापारियों कों दबाने एवं अपनी साख मजबूत करने के हिसाब से ऐसा किया जा रहा हैं इसमें कितने अफसरों की मौन स्वीकृति हैं यह तों समझ से परे हैं लेकिन शहर की जनता कों शहर की सुंदरता पर अपने अवैध फ्लेक्सी बैनर पोस्टर से बदरंग करने वाले रसूखदार व्यापारी कों सबक सिखाते हुए पीजी कॉलेज में छोटे छोटे व्यवसाई से पटाखा लेना चाहिए ना की अपने आप की पटाखा माफिया बनने के रहा में चलने वाले से.
शहर के सुंदरता कों चौक चौराहों में अपने व्यापारीक लाभ के लिए अवैध बैनर फ्लेसी लगा कर शहर की सुंदरता पर ग्रहण लगाने वाले इस व्यापारी पर यातायात प्रभारी एवं नगर निगम आयुक्त दोनों कों इस पर बड़ी कार्यवाही करनी चाहिए आखिर किसके परमिशन से ट्रैफिक सिग्नल कों अवैध फ्लेक्सी बैनर के द्वारा ढाका गया एवं इसके बैनर पोस्टर के चक्कर में सिग्नल नहीं दिखने से किसी की जान चली जाती तों इसकी जवाबदेही किसकी होंगी इसका विचार सरगुजा पुलिस अधिक्षक कों करना चाहिए।

