एक लाख रूपए के रिश्वत लेते ACB के हत्थे चढ़े सोहन लाल भगत और रिश्वत लेते वीडियो में नपे विनायक पाण्डेय की दलाली में जुटे डीडीए पीताम्बर सिंह दीवान?
विवादित प्रभारी उप संचालक आर. पी. शुक्ला को मलाईदार कुर्सी, वही 2 करोड़ के गबन के आरोपी सुजीत गुप्ता जिस पर थाना रामानुजगंज में ही दर्ज है FIR उसे जेल भेजनें के जगह बतौर ईनाम बनाया उसी थाना क्षेत्र का जल संसाधन विभाग का SDO, वही तमाम नियमों कों दरकिनार करते हुए शासन गाल पर अपनी मनमौजी नीति वाले अंदाज में करारा तमाचा जड़ने वाले पटवारी त्रिभुवन सिंह की अकूत काली कमाई एवं नियम विरुद्ध विदेश यात्रा पर कार्यवाही करने के जगह पर्दा डालने का कार्य करते हुए रसूखदार पटवारी के आगे कार्यवाही करने वाले अफसर एवं तमाम सिस्टम नतमस्तक होता दिख रहा !
सरगुजा समय रायपुर / अंबिकापुर / बलरामपुर/ रामानुजगंज :-
छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में सुशासन और ‘जीरो टॉलरेंस’ के सारे दावों का जनाजा निकल चुका है। प्रदेश में एक ऐसा शर्मनाक और सुनियोजित सिंडिकेट हावी हो चुका है जिसका एकमात्र अघोषित नियम बन गया है—’सरकारी खजाने को चूना लगाओ, रिश्वतखोरी करो, जनता और शासन को गुमराह करो और इनाम के तौर पर मनचाहा प्रमोशन पाओ।’ जिन दागियों, रिश्वतखोरों और गबन के आरोपियों पर हथकड़ी लगनी चाहिए थी, शासन में बैठे कुछ विभागीय दलाल आका उन्हीं के आगे नतमस्तक होकर उन्हें पदोन्नति की मलाईदार रेवड़ियां बांट रहे हैं।

01 लाख रुपये की रिश्वत में ACB से नपे सोहन लाल और निलंबित विनायक पाण्डेय की ‘दलाली’ में जुटे डीडीए पीताम्बर सिंह दीवान?
विशेष सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कृषि विभाग सरगुजा में भ्रष्टाचार और बेशर्मी की पराकाष्ठा हद पार कर चुकी है। उप संचालक कृषि (डीडीए) पीताम्बर सिंह दीवान पर अब सीधे तौर पर रिश्वतखोरों के सिंडिकेट की ‘खुली दलाली’ करने से पीछे नहीं हट रहें है, यह संगीन आरोप हम नहीं लगा रहे बल्कि उनकी स्वयं की कार्यशैली से लग रहें है। सूत्रों की माने तो रिश्वत खोरी के मामले में निलंबन से बहाल होने वाले विनायक पाण्डेय एवं ACB की कार्यवाही के बाद जेल की हवा खा कर वापस आने वाले सोहन भगत कों प्रमोशन दिलवाने के लिए एड़ी चोटी एक करते हुए लगातार रायपुर दौरा एवं विभागीय आला अफसर एवं मंत्रालय का चक्कर लगा रहे हैं।
ACB के हत्थे चढ़ा सोहन लाल भगत: ₹1 लाख की सीधी घूस लेते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा रंगे हाथ दबोचे गए और जेल की सलाखों के पीछे सड़ चुके दागी कर्मचारी सोहन लाल भगत को प्रमोट कराने के लिए पूरी ताकत झोंकी जा रही है।

रिश्वत के वीडियो में रंगे हाथ नपा विनायक पाण्डेय: कैमरे के सामने खुलेआम रिश्वतखोरी करते पकड़े जाने और जांच में अपराध साबित होने के बाद निलंबित किए गए विनायक पाण्डेय की पदोन्नति की गंदी पटकथा उप संचालक पीताम्बर सिंह दीवान के माध्यम से लिखी जा रही है।
मंत्रालय सूत्रों का पुख्ता दावा है कि डीडीए पीताम्बर सिंह दीवान इन दोनों दागी चेहरों—विनायक पाण्डेय और सोहन लाल भगत—को साथ लेकर राजधानी मंत्रालय में टेबल-दर-टेबल पैरवी कर रहे हैं। शासकीय योजनाओं में कमीशनखोरी और बंदरबांट करने वाले इन भ्रष्टाचारियों को पदोन्नत कराने के पीछे मंत्रालय में बैठे एक रसूखदार आला अफसर की कथित रिश्तेदारी और आर्थिक सांठगांठ की आग चारों तरफ सुलग रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आपकी जानकारी के लिए बता दें की सोहन लाल भगत भी वही अफसर है जिसने विजय ट्रेडिंग कम्पनी से 15 लाख रूपए रिश्वत लेने की सुनियोजित प्लानिंग की थी जिसमें विजय ट्रेडिंग कम्पनी के संचालक कों बतौर कार्यवाही का भयादोहन करने के किए DDA पीताम्बर दीवान ने एक टीम बना डाला जिससे सोहन लाल भगत एवं उप संचालक पीताम्बर सिंह दीवान की विजय ट्रेडिंग कम्पनी से 15 लाख रिश्वत लेने में बराबरी का साझा होगा जिसके कारण जो अधिकार जिला के कलेक्टर के पासवर्ड होता है उस अधिकार का उपयोग DDA दीवान ने कर डाला जिससे यह स्पस्ट होता है की क़ृषि विभाग में रिश्वतखोर कों खुला संरक्षण DDA द्वारा क्यों दिया जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार सोहन लाल भगत ने पूरी प्लानिंग के तहा विजय ट्रेडिंग कम्पनी के ऊपर कार्यवाही करने में कमी की एवं तत्कालीन कलेक्टर कों अधूरा फ़ाइल पेस किया गया जिससे की फाइल पूरा करने के बहाने कलेक्टर से वापस फाइल विभाग में आ जाएगी एवं कार्यवाही के जगह रिश्वत वाले पैसे की उगाही कर ली जाएगी। परन्तु इस सब से पहले ACB के हत्थे सोहन भगत एक लाख रूपए रिश्वत लेते चढ़ गया और विजय ट्रेडिंग की फाइल अधर में लटक गई और आज दिनांक तक कार्यवाही नहीं हो पाई।

पटवारी त्रिभुवन सिंह का अवैध विदेश यात्रा, आलीशान फार्म हाउस: दागी पटवारी त्रिभुवन सिंह को बचाने में नतमस्तक तंत्र:- सरगुजा जिले में पदस्थ पटवारी त्रिभुवन सिंह की काली कमाई का साम्राज्य खुलेआम प्रशासनिक तंत्र को मुंह चिढ़ा रहा है। बिना किसी सक्षम प्रशासनिक स्वीकृति के नियम विरुद्ध विदेश यात्राएं करना, करोड़ों की लागत से आलीशान फार्म हाउस खड़ा करना और अपने व रिश्तेदारों के नाम पर आय से अधिक बेहिसाब अकूत संपत्ति बटोरना—इन तमाम काले कारनामों के बावजूद कार्रवाई शून्य है।
सूत्रों की माने तो यह वही पटवारियों के टीम के टीम लीडर है जिन्होंने छत्तीसगढ़ में हुए RI राजस्व निरिक्षक की परीक्षा कों भी अपने रसूख एवं पैसों की ताकत से कब्ज़ा कर डाला था एवं पटवारी से राजस्व निरिक्षक बनने की पूरी तैयारी हो गई थी परन्तु विभागीय के अन्य लोगों ने जिन्हे उक्त परीक्षा का पेपर नहीं मिल पाया उन लोगों के द्वारा शिकायत हल्ला करने पर मिडिया में मामला गर्म होने के कारण इनकी मनोकामना पूरी नहीं हो पाई।

इस तरह से शासन कों अपने क़दमों की धूल समझने एवं नियम विरुद्ध कार्य करते हुए शासकीय सेवक के पद का मज़ाक बनाने वाले रसूखदार पटवारी पर तमाम जाँच करवा कर दोषी पाए जाने पर जिस पटवारी पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर संपत्ति कुर्क होनी चाहिए , उसे बचाने के लिए जिले से लेकर ऊपर तक का पूरा अमला जी-तोड़ मेहनत कर ढाल बनकर खड़ा है।
मंत्रालय को गुमराह करने वाले विवादित डॉ. आर. पी. शुक्ला को मिला प्रमोशन का तोहफा:- पशुधन विकास विभाग का हाल तो और भी बदतर है। सरगुजा से लेकर रायपुर मंत्रालय तक सबको धोखे में रखने और नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाने वाले विवादित प्रभारी उप संचालक डॉ. आर. पी. शुक्ला पर कार्रवाई का डंडा चलाने के बजाय उन्हें प्रथम श्रेणी उप संचालक के पद पर नियमित पदोन्नति की सौगात दे दी गई है। तमाम शिकायतों और विवादों को ताक पर रखकर जारी इस तुगलकी आदेश ने पूरे विभाग के ईमानदार अधिकारियों के स्वाभिमान को कुचल दिया है। एवं ईमानदारी से कार्य करने वालों कों खुली चुनौती देना माना जा सकता है की किस ईमानदारी से नहीं बल्कि नियम विरुद्ध कार्य करो बड़े बड़े घोटाले करो तब जा कर कही प्रमोशन की राह आसान होंगी।

उप अभियंता रहते नरेगा में 24 लाख एवं अन्य में ₹2 करोड़ का गबन, 420 का मुकदमा… फिर भी जल संसाधन के सुजीत गुप्ता बन बैठे SDO!:- भ्रष्टाचार के पोषण की सबसे घिनौनी मिसाल जल संसाधन विभाग, रामानुजगंज (बलरामपुर) में देखने को मिली है। उप अभियंता रहते हुए सुजीत गुप्ता ने नरेगा मद के ₹24 लाख और अन्य कार्यों के करीब ₹2 करोड़ का भारी गबन किया। जिसमें 2 करोड़ ग़बन मामले में रामानुजगंज थाने में 420 (धोखाधड़ी) समेत संगीन धाराओं में अपराध दर्ज हुआ। जिस जालसाज को जेल की कोठरी में होना चाहिए था, उसे सरकार ने प्रमोशन का वीआईपी तोहफा देकर उसी थाना क्षेत्र में अनुविभागीय अधिकारी (SDO) की कुर्सी पर बिठा दिया।
जनता के तीखे सवाल: क्या भ्रष्टाचारियों की ‘चरागाह’ बन चुका है मंत्रालय? रिश्वत लेते जेल जा चुके सोहन लाल भगत और रिश्वत लेते वायरल वीडियो में नपे विनायक पाण्डेय जैसे दागियों को साथ लेकर मंत्रालय में दलाली करने वाले डीडीए पीताम्बर सिंह दीवान पर शासन का बुलडोजर कब चलेगा?
वाह रे विभाग के आला अफसर एवं आका गोरेला पेंड्रा में पोस्टिंग बावजूद उसके जहाँ करोड़ों के ग़बन कर भ्रष्टाचार करने के मामले. ऐ 420 के नामजद आरोपी सुजीत गुप्ता पर अपराध पंजीबंध वही का करवाया सलंग्न। ऐसे भ्रष्ट SDO को जेल भेजने के बजाय मनमुताबिक तरीके से बलरामपुर रामानुजगंज में SDO का पदभार संलग्न करते हुए सौंपने वाले नीति-नियंताओं का जमीर क्या पूरी तरह मर चुकी है?
क्या विवादित आर. पी. शुक्ला की तरह हर नियम तोड़क को मलाईदार कुर्सी से ही नवाजा जाएगा?
आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने वाले पटवारी त्रिभुवन सिंह की जांच दबाने के लिए किसके-किसके मुंह में काली कमाई का हिस्सा ठूंसा गया है?
विजय ट्रेडिंग मामले में कार्यवाही के जगह 15 लाख की रिश्वत लेने के चाह रखने वाले सोहन भगत एवं DDA दीवान पर कार्यवाही क्यों नहीं, किस अधिकार से जिला कलेक्टर के अधिकार वाले कार्य कों DDA दीवान ने अपने कलम से कर डाला। इस गुस्ताखी के लिए दीवान पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं?

साफ है कि छत्तीसगढ़ में ‘जीरो टॉलरेंस’ का नारा भ्रष्टाचारियों की ढाल बन चुका है। अगर शासन ने इन दागी प्रमोशनों को तुरंत निरस्त कर इन चेहरों को जेल नहीं भेजा, तो यह साफ हो जाएगा कि यह भ्रष्टाचार चंद अफसरों का नहीं, बल्कि व्यवस्था के शीर्ष पर बैठे सिंडिकेट का साझा उद्योग बन चुका है।
सरगुजा समय लगातार जनहित के मुद्दों कों आम नागरिकों एवं सरकार के सामने लेकर आता है जल्द ही इन तमाम मामलों में हम आपको बताएँगे की किस अफसर का विभागीय दलाल आका कहाँ बैठा है और किसके सह पर कार्यवाही नहीं हो रही है। अवैध उगाही से शासन कों आर्थिक चोट पहुंचाने वाले तमाम अफसरों का अलग अलग विभाग के विभागीय आका दलाल एवं मंत्रालय अधिकारी का मुखोटा ओढ़ बैठे मुख्य दलाल के चेहरे से मुखौटा उतारने का कार्य करेंगें।
जल्द ही हम आपको इन तमाम अफसरों के काले कारनामो की पोल पुरे प्रमाण एवं साक्ष्य के साथ खोलते हुए आम नागरिकों एवं शासन के सामने खबर के माध्यम से प्रस्तुत करेंगें।
