सरगुजा समय अंबिकापुर – संभाग के सबसे बड़े महाविद्यालय पीजी कॉलेज एवं जिले में वरिष्ठ एवं नियमित प्राचार्य होने के बावजूद नियमविरुद्ध तरीके से प्रभारी प्राचार्य के हाथों कमान शिक्षानीति को दिखाया ठेंगा अपने निजी स्वार्थ के लिए हजारों छात्र छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ की हो रही तैयारी पीजी कॉलेज में प्राचार्य की कुर्सी बना राजनीतिक अखाड़ा।
सरगुजा संभाग में सबसे बड़े महाविद्यालय का ख्याति प्राप्त होने वाले पीजी कॉलेज अंबिकापुर में प्राचार्य की कुर्सी की जैसे लुट मची हो या यह कहा जा सकता है कि अब यह कुर्सी किसी मलाईदार कुर्सी से कम साबित होता नहीं दिख रहा।
पीजी कॉलेज में प्राचार्य की कुर्सी संभालने के लिए अब आपकी योग्यता एवं वरिष्ठता किसी चीज की जरूरत नहीं है अब आप यहां की प्राचार्य की कुर्सी संभालने के लिए नेता मंत्री के सेवक बने रहिए एवं मंत्रियों की चापलूसी करते रहिए इसका इनाम आपको संभाग के सबसे बड़े कॉलेज का बतौर प्रभारी प्राचार्य के रूप में मिलेगा।

ऐसा हम नहीं कह रहे यह अनोखा मामला हमारी बातों को स्वयं में साबित करता दिख रहा है। क्योंकि इस तरह का नियम विरुद्ध अनोखा कारनामा सिर्फ राजनीतिक पकड़ के द्वारा ही किया जा सकता है न कि किसी वरिष्ठता एवं योग्यता के आधार पर।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार राजीव गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय अंबिकापुर में जहां लगभग आधा दर्जन से भी अधिक वरिष्ठ प्रोफेसर पदस्थ है एवं सरगुजा जिले में कई नियमित प्राचार्य मौजूद है बाद उसके भी एक जूनियर प्रोफेसर को इतने बड़े महाविद्यालय का प्रभारी प्राचार्य बना देना हास्यास्पद स्थिति निर्मित हो गई है जो कि शिक्षा एवं सामाजिक स्थिति में अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बात है।
मिली जानकारी के अनुसार संभाग के सबसे बड़े महाविद्यालय पीजी कॉलेज की कमान अब प्रभारी प्राचार्य डॉ. अनिल कुमार सिन्हा को बनाया गया है जबकि इस कालेज में इनसे भी वरिष्ठ प्रोफेसर एवं जिले में नियमित प्राचार्य मौजूद है ।
लेकिन इत तरह से नियम विरुद्ध बेतुके फरमान वाले आदेश से महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्र छात्राओं के भविष्य पर अत्यंत घातक असर पड़ना लगभग – लगभग तय है।
अब इस आदेश के बाद महाविद्यालय में उन वरिष्ठ प्रोफेसरों एवं जिले में पदस्थ नियमित प्राचार्यों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ा हो गया है अब इन वरिष्ठों को अपने से जूनियर के आदेश का पालन करते हुए अपने स्वाभिमान को ताक में रखते हुए कार्य करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा ।

इस तरह से तमाम योग्य एवं वरिष्ठ प्रोफेसरों एवं नियमित प्राचार्य को दरकिनार एवं उनकी योग्यता को ठेंगा दिखाते हुए एक राजनीतिक संरक्षण प्राप्त व्यक्ति को महाविद्यालय का प्रभारी प्राचार्य बनाया जाना इस बात को स्पष्ट करता है कि आपकी राजनीतिक पकड़ मजबूत एवं नेता मंत्रियों की चापलूसी में महारथ हासिल होना चाहिए तब जा कर आप इस तरह के नियम विरुद्ध तरीके एवं बेतुके फरमान वाले आदेश जारी करवाकर अपने वरिष्ठों के सर पर तांडव कर सकते है ।
अत्यंत विचारणीय बात यह है कि तत्कालीन प्राचार्य डॉक्टर स्नेहलता श्रीवास्तव जो कि लगभग 8 से 9 माह बाद रिटायर्ड होने वाली है उन्हें प्राचार्य की कुर्सी से हटाते हुए अन्य कई वरिष्ठों को नजरअंदाज करते हुए डॉ.अनिल सिन्हा को संभाग के सबसे बड़े कॉलेज की कमान दे डाली मतलब की जिस जगह में काबली एवं सीनियर व्यक्ति हो उसके बाद भी अनुभवहीन को बतौर प्रभारी प्राचार्य बनाना अत्यंत गंभीर मुद्दा है या फिर यह कहा जाए कि अवैध धन उगाही करने का यह एकमात्र सफर प्रारंभ किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शासन में अगर किसी शासकीय सेवक की रिटायरमेंट में एक साल बचा होता है उसे कही अन्यत्र ट्रांसफर करने से बचती है परन्तु इस तरह के बेतुके आदेश से यह अत्यंत गंभीर मामला दिखता है ।
सबसे बड़ी विडम्बना तो यह है कि सरगुजा संभाग के सबसे बड़े महाविद्यालय में प्रभारी प्राचार्य डॉक्टर अनिल कुमार सिन्हा को प्राचार्य के अतिरिक्त प्रभार के साथ – साथ महाविद्यालय का आहरण संवितरण अधिकार भी सौंपा दिया गया है जिसमें जल्द ही वित्तीय अनियमितता की खबरें भी सामने आ सकती है।
उक्त आदेश के परिपालन में शुक्रवार को पूर्वान्ह अनिल कुमार सिन्हा ने प्रभारी प्राचार्य के अतिरिक्त प्रभार पर कार्यभार ग्रहण कर लिया है अब शिक्षण संस्थान में बैठे आला अफसरों को कौन सा गुरुमंत्र मिला की इतने महत्वपूर्ण पद को प्रभारी प्राचार्य के हाथों सौंप दिया गया अब अंदर की बात तो भगवान जाने परन्तु इस तरह के बेतुके फरमान वाले आदेश को निरस्त करते हुए जिले में मौजूद नियमित प्राचार्य एवं अन्य वरिष्ठ प्रोफेसरों को मौका मिलना चाहिए जिससे महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्र छात्राओं के सुनहरे भविष्य को गढ़ा जा सके ना कि इस तरह के नियम विरुद्ध आदेश से बच्चों के भविष्य को अधर में डालने का प्रयास किया जाना चाहिए।

