सरगुजा समय अंबिकापुर :- सरगुजा अंबिकापुर के कन्या परिसर रोड़ विशुनपुर स्थित निजी अस्पताल दयानिधि
सरगुजा समय अंबिकापुर :- सरगुजा अंबिकापुर के कन्या परिसर रोड़ विशुनपुर स्थित निजी अस्पताल दयानिधि जिसका संचालन स्वघोषित शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी जो अपने कारनामों से लगातार विवादों में घिरे रहने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग से लेकर तत्कालीन सरगुजा कलेक्टर से लेकर रायपुर तक के आला अफसरों को मैनेज करने में सक्षम नजर आते रहे हैं उनका एक और मामला सामने आ गया हैं।
जिसमें शिकायतकर्ता ने अपने साथ हुए गलत ईलाज के मामले में वर्तमान कलेक्टर अजित वसंत के समक्ष जनदर्शन के माध्यम से शिकायत करते हुए डॉक्टर कम बिजनेसमैन संदीप त्रिपाठी पर गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराया हैं।

सरगुजा में शासकीय डॉक्टर के निजी हॉस्पिटल से बढ़ते लगातार प्रेम से अवगत कराते हुए शिकायतकर्ता ने सरगुजा में स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़ा करते हुए डॉक्टर संदीप त्रिपाठी पर गलत ऑपरेशन और आयुष्मान कार्ड के ‘खेल’ का सनसनीखेज आरोप लगाया हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दे की अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में निजी अस्पतालों की मनमानी और इलाज के नाम पर मरीजों के शोषण का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है।
जहाँ लुंड्रा निवासी 34 वर्षीय राजकुमार श्रीवास्तव ने अंबिकापुर के ‘दयानिधि अस्पताल’ के डॉक्टर संदीप त्रिपाठी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर जनदर्शन में न्याय की गुहार लगाई है।
शिकायतकर्ता राजकुमार श्रीवास्तव का कहना है कि एक सड़क दुर्घटना के दौरान उनकी कोहनी की हड्डी टूट गई थी। इस गंभीर चोट के इलाज के लिए वे दयानिधि अस्पताल पहुंचे, जहाँ शासकीय डॉ. संदीप त्रिपाठी ने उन्हें ऑपरेशन की सलाह दी। पीड़ित का आरोप है कि डॉक्टर की लापरवाही और गलत ऑपरेशन के कारण न तो उनका हाथ ठीक से मुड़ पा रहा है और न ही सीधा हो रहा है, जिसके चलते वे स्थायी रूप से विकलांग हो गए हैं।

पीड़ित ने अपनी शिकायत में आर्थिक शोषण का भी बड़ा खुलासा किया है:- नकद वसूली: आरोप है कि डॉक्टर ने इलाज के दौरान दो बार में कुल 40,000 रुपये नकद वसूले, और साथ ही साथ आयुष्मान योजना के तहत राशि निकाल ली गई।
डॉक्टर संदीप त्रिपाठी पर गंभीर आरोप यह भी हैं कि उन्होंने आयुष्मान कार्ड के बावजूद ब्रांडेड दवाइयों का बिल भुगतान करने का दबाव बनाया, यह कहकर कि सरकारी योजना की दवाइयां काम नहीं करेंगी।
शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी के द्वारा अन्य मरीजों को भी बनाया गया शिकार:- शिकायतकर्ता ने न केवल अपने साथ हुई घटना का जिक्र किया है, बल्कि अस्पताल पर अन्य मरीजों के जान के साथ भी खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया है। राजकुमार ने अपनी शिकायत में उल्लेख किया है कि उनके भर्ती होने के दौरान, उसी गांव के एक अन्य व्यक्ति (गोबिंद) का भी गलत ऑपरेशन किया गया, जिससे वह भी विकलांग हो गया।
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से डॉक्टर संदीप त्रिपाठी एवं निजी अस्पताल दयानिधि के ऊपर कड़ी कार्यवाही और मुआवजे की मांग भी की हैं :- पीड़ित ने कलेक्टर को दिए गए आवेदन में निम्नलिखित मांगें रखी हैं: डॉ. संदीप त्रिपाठी, जो खुद को विदेश से प्रशिक्षित बताते हैं, उनकी शैक्षणिक डिग्रियों की निष्पक्ष जांच की जाए।

आयुष्मान घोटाले की जांच: आयुष्मान भारत योजना के तहत किए गए फर्जीवाड़े की जांच हो।
आर्थिक मुआवजा: गलत इलाज के कारण शारीरिक दिव्यांगता को देखते हुए 20 लाख रुपये के मुआवजे का आदेश दिया जाए।
फिलहाल, पीड़ित ने कलेक्टर जनदर्शन में अपना आवेदन दर्ज करा दिया है, जिसका टोकन क्रमांक 2020326001138 (सुरक्षा क्रमांक 776) है। पीड़ित अब जिला प्रशासन से उम्मीद लगाए बैठा है कि इस मामले में दोषी डॉक्टर के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अब सबसे बड़ी विडंबना यह हैं की सरगुजा के ईमानदार कलेक्टर की छबि प्राप्त करने वाले वर्तमान कलेक्टर अजित वशंत ने शिकायतकर्ता के शिकायत जो की दिनांक 23/06/2026 को किया था उस गंभीर शिकायत में आज लगभग 17 दिन बीत जाने के बावजूद कोई कार्यवाही क्यों नहीं कर पाए यह भी विचारणीय बात हैं एवं सरगुजा कलेक्टर के ईमानदारी पूर्वक कार्य शैली पर प्रश्नवाचक चिन्ह खड़ा करता हैं।

अब देखने वाली बात यह हैं की सरगुजा कलेक्टर ड्रामेबाज शासकीय डॉक्टर जिसने अपने बीमारी का हवाला देते हुए छुट्टी का आवेदन विभाग को प्रस्तुत करके शासकीय हॉस्पिटल से नदारत होकर धड़ल्ले से निजी अस्पताल दयानिधि का संचालन करते हुए अपने नव निर्मित हॉस्पिटल भवन में बेखौफ बतौर ठेकेदार एवं निजीनियर का रोल अदा कर रहे हैं उनपर क्या कार्यवाही करते हैं।
जबकि इस शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी के निजी अस्पताल दयानिधि के बढ़ते प्रेम के मामले में तत्कालीन कलेक्टर विलास भोस्कर ने डॉक्टर त्रिपाठी को निलंबित करते हुए आयुष्मान योजना के तहत करोड़ों रूपए के अवैध भुगतान की जाँच करवाने का आदेश दिया था। लेकिन तत्कालीन कलेक्टर से लेकर वर्तमान कलेक्टर ने डॉक्टर संदीप त्रिपाठी को निलंबित करवा पाने में अभी तक असमर्थता ही जाहिर की हैं।

