17/05/2026
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उपसंचालक कृषि की लगाम रिश्वतखोर अधिकारी विनायक पाण्डेय के हाथ में, संयुक्त संचालक के समस्त पत्रों को दिखाया ठेंगा ?

शुभांकुर पाण्डेय सरगुजा समय अंबिकापुर :- एक पुरानी कहावत हैं की एक भ्रष्टाचारी विभाग पर भारी के प्रभाव से प्रभावित होकर विनायक पाण्डेय कृषि विकास अधिकारी अंबिकापुर बड़े आराम से अपने भ्रष्टाचारी एवं घूसखोरी वाले नीति से अपने अधिकारियों को अपने तलवे के नीचे दबा कर रखने में कामयाब हो रहे हैं ऐसा अम्बिकापुर के खाद एवं बीज व्यापारियों एवं विभाग के ईमानदार अधिकारी कर्मचारी के द्वारा उन पर कई बार आरोप लगाया गया जिसकी शिकायत विभाग के आला अफसर से लेकर कलेक्टर, कमिश्नर तक से की गई परंतु उनके बचाव पक्ष के लिए आतुर होने वाले उपसंचालक के कारनामें से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इस घूसखोर विनायक पाण्डेय को तमाम प्रकार से आला अफसरों का संरक्षण प्राप्त हैं जिसकी वजह से यह सरगुजा व्यापारियों को कलेक्टर, कमिश्नर से लेकर रायपुर तक के लोगों को कमीशन का पैसा पहुंचाने की बात कह कर अवैध उगाही करने के लिए आतुर है.

मिली जानकारी के अनुसार उपसंचालक कृषि अंबिकापुर जिला सरगुजा के पद पर आसीन अधिकारी पीतांबर सिंह दीवान घूसखोर विनायक पाण्डेय के लिए सिर्फ एक तरह से रबर स्टाम्प की तरह कार्य करने वाले प्रतीत हो रहे हैं क्योंकि उप संचालक कृषि विभाग अंबिकापुर के द्वारा अपने आला अफसर से प्राप्त तमाम प्रकार से प्राप्त शिकायत पत्रों पर कार्यवाही के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति करके घूसखोर अधिकारी को कर्तव्य निष्ठा एवं ईमानदारी पूर्वक कार्य करने का फर्जी सर्टिफिकेट जारी कर अपने आला अफसर को गुमराह एवं भ्रमित करने का कार्य बड़े ईमानदारी पूर्वक किया जा रहा है जिसकी जांच करने की हिमाकत शायद सरगुजा कलेक्टर एवं सरगुजा संभाग कमिश्नर के पास भी नहीं हो पा रही है. इस प्रकार की बात हम नहीं कह रहे हैं इस प्रकार के तमाम शिकायत एवं पत्राचार का पुलिंदा खुद विभाग को प्राप्त कमिश्नर, कलेक्टर के एवं संयुक्त संचालक के पत्रों को दलालरूपी अधिकारी एवं उपसंचालक द्वारा अपने एवं घूसखोर विनायक पाण्डेय के बचाव में इस कदर आतुर है कि उनके सामने कमिश्नर एवं कलेक्टर के द्वारा जारी किए गए पत्रों पर भी भ्रामक जानकारी स्वयं के विवेक अनुसार या फिर यह कहा जाए की घूसखोर विनायक पाण्डेय के नेतृत्व में सरगुजा कमिश्नर एवं कलेक्टर के आदेशों का जवाब बनता है.

घूसखोर कृषि विकास अधिकारी विनायक पाण्डेय का दबदबा एवं रसूख विभाग पर इस कदर बरकरार है कि एक उपसंचालक कृषि क़ो घूसखोर पर कार्यवाही करने के लिए हाथ पाँव कापने लगते हैं इसका कारण क्या हैं यह तो स्वयं उपसंचालक कृषि ही जाने या फिर यह कहा जा सकता है की इस दलाल रूपी अधिकारी के घूसखोरी वाले पैसे से उच्च अधिकारी को भी अप्रत्यक्ष रूप से सरोकार है जिसमें उनकी भी जेब गर्म होती नजर आ रही हैं.

मिली जानकारी के अनुसार संयुक्त संचालक कृषि संभाग सरगुजा के द्वारा लगभग तीन से पांच पत्र उपसंचालक कृषि को विनायक पाण्डेय के खिलाफ लगातार मिलने वाले शिकायत पर जांच कर कार्रवाई करने के लिए उपसंचालक को पत्राचार के माध्यम से अवगत कराते हुए जांच करके कार्यवाही करने का निर्देश दिया गया परंतु एक पुरानी कहावत है संगत से गुण आत हैं संगत से गुण जात वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए उपसंचालक ने यह साबित कर दिया कि घूसखोर विनायक पाण्डेय के संगत का असर उपसंचालक के ऊपर भी काफी मात्रा में व्याप्त है जिसके कारण अपने उच्च अधिकारियों के पत्र को ठेंगा दिखाने एवं उनके आदेश का ईमानदारी पूर्वक जांच कर कार्रवाई करने की जगह दलाली पूर्वक रवैया अपनाते हुए घूसखोरी विनायक पाण्डेय क़ो जिसका रिश्वत का पैसा लेते हुए वीडियो आम लोगों के पास बड़े आसानी से प्राप्त हो जा रहा हैं उस घूसखोर दलाल रूपी अधिकारी के बचाव में तमाम प्रकार के आला अफसर जुट गए हैं जिससे यह प्रतीत होता हैं की इस दलाल रूपी अधिकारी के घूसखोरी के माध्यम से प्राप्त पैसा का बंदरबाट इन सब में बड़े आसानी से किया जता हैं.

उपसंचालक सरगुजा कृषि विभाग के द्वारा जिस प्रकार से विनायक पाण्डेय को एक खुला सांड की तरह शहर में अवैध उगाही के लिए छोड़ा गया उससे यह प्रतीत होता है कि इसके द्वारा अवैध प्रकार से घूसखोरी के माध्यम से किए गए उगाही के रकम को निचले स्तर से लेकर आला अफसर तक जमकर बंदर बाँट किया जा रहा है जिस कारण से दलाल रूपी अधिकारी विनायक पाण्डेय के ऊपर विभाग कार्यवाही करने से बच रहा है…….

इस मामले की तमाम जानकारी हमारे टीम के द्वारा लगातार एकत्रित की जा रही है जल्द ही आपको इस पूरे मामले का प्रकरण पूरे विस्तार के साथ प्रस्तुत किया जाएगा. क्रमशः…..

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