17/05/2026
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सरगुजा समय अंबिकापुर – लगातार विवादों से नाता रखने वाले दयानिधि हॉस्पिटल एवं डॉक्टर संदीप त्रिपाठी जो शासकीय डॉक्टर भी है इनके रसूखदार दबंगई एवं राजनीतिक पकड़ के बारे में हम लगातार आपको अपने खबरों के माध्यम से बताते रहे है।

लगातार कई कमियों के बावजूद या निजी अस्पताल धड़ल्ले से बेखौफ संचालित हो रहा है करोड़ों के भुगतान आयुष्मान कार्ड के माध्यम से सरकार को गलत जानकारी देते हुए उठाया जा रहा है। परन्तु कार्यवाही के नाम पर डॉक्टर त्रिपाठी महोदय एवं निजी दयानिधि हॉस्पिटल पर आला अफसरों की हिम्मत नहीं हो पा रही।

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि उक्त हॉस्पिटल में लिफ्ट के नाम पर मरीजों से सिर्फ मजाक किया गया है इनके यहां उपलब्ध लिफ्ट जमीन में मात्र दो एंगल पे टीका हुआ है जो कि कभी भी टूट या गिर सकता है। परन्तु जब डॉक्टर त्रिपाठी महोदय खुद नर्सिंग होम एक्ट के अफसर थे तो इनके ऊपर कार्यवाही करने वाला कौन ही होगा खुद के निजी अस्पताल में खुद से जांच कर समस्त नियमों को ताक में रखते हुए अवैध तरीके से आयुष्मान कार्ड के माध्यम से करोड़ों का भुगतान प्राप्त कर रहा है उक्त हॉस्पिटल में लगे लिफ्ट से ऐसा प्रतीत होता है कि यहां मरीजों के हड्डियों को जोड़ने के बजाय और हड्डियां टूट जाए ऐसी मानसा उक्त लिफ्ट बया करती है।

लगातार काफी शिकायतों के बाद सरगुजा कलेक्टर के निर्देश के बाद नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी से डॉक्टर संदीप त्रिपाठी की छुट्टी तो हो गई क्योंकि कलेक्टर के आदेश के बाद यह कार्यवाही करना स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों की मजबूरी हो गई थी परन्तु कलेक्टर के अन्य निर्देश को स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों ने अनसुना कर दिया।

क्योंकि सरगुजा कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिया था कि उक्त डॉक्टर संदीप त्रिपाठी की निजी अस्पताल दयानिधि में सहभागिता एवं शासकीय डॉक्टर रहने के बावजूद अपने अस्पताल को अवैध तरीके से लाभ पहुंचाने एवं नियम विरुद्ध तरीके से निजी अस्पताल में आयुष्मान योजना से हुए भुगतान की जांच करने के पश्चात अगर उक्त डॉक्टर संदीप त्रिपाठी दोषी पाया जाता है तो निलंबित करने के निर्देश दिए थे पर स्वास्थ्य विभाग के कुछ आला अफसर इस संदीप त्रिपाठी के द्वारा अवैध उगाही से कमाए धन का एक हिस्सा आला अफसरों के जेब में भी भरता है इस कारण स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर सोने की अंडे देने वाली मुर्गी को हलाल नहीं करना चाहते ऐसा प्रतीत होता है।

खैर देर आए दुरुस्त आए वाली कहावत यह पर माना जा सकता है भले ही दो महीने बाद निजी अस्पताल दयानिधि जो कि कन्या परिसर रोड़ विशुनपुर में स्थित है कि जांच करने स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची तो अब देखने वाली बात यह है कि उक्त निजी दयानिधि हॉस्पिटल के तमाम कमियों के बाद उक्त हॉस्पिटल एवं डॉक्टर त्रिपाठी पर कार्यवाही होती है कि इस बार पुनः उक्त निजी अस्पताल एवं डॉक्टर अपने पहुंच का लाभ लेते हुए जांच रिपोर्ट को अपने मन मुताबिक बनवा लेगा।

विशेष सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार निजी अस्पताल दयानिधि अस्पताल में वर्ष 2022 में एक पत्र स्वास्थ्य विभाग से जारी किया गया था जिसमें यह उल्लेख किया गया था कि उक्त निजी अस्पताल में रैंप की व्यवस्था नहीं होने के कारण आयुष्मान भारत योजना का लाभ नहीं दिया जा सकता परन्तु उसके बाद भी बिना पार्किंग बिना लिफ्ट बिना रैंप के उक्त हॉस्पिटल में आयुष्मान योजना के तहत कई करोड़ रुपए का वारा न्यारा करते हुए शासन को करोड़ों रुपए की आर्थिक क्षति पहुंचते हुए अपना निजी आर्थिक लाभ अवैध रूप से अर्जित किया जिसकी जांच होना अत्यंत आवश्यक है जिसका निर्देश सरगुजा कलेक्टर ने भी स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों को दिया था।

कभी देख है इस अजूबा लिफ्ट जिसमें मरीज की जान बचाने के जगह चली जाए ।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नौ बिस्तर वाले अस्पताल को संदीप त्रिपाठी ने नियम विरुद्ध तरीके से शासन से कई तथ्य छुपाते हुए ग्यारह बिस्तर बढ़ा लिया यह कारनामा तब हुआ जब त्रिपाठी महोदय स्वयं ही नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी थे। मतलब कि तमाम प्रकार से स्वयं शासकीय डॉक्टर रहते हुए निजी अस्पताल दयानिधि जो कि इनके धर्मपत्नी के नाम से संचालित हो रहा है उसमें इन्होंने जम कर मेहरबानी बरसाई है । अवैध तरीके से बिना लिफ्ट बिना पार्किंग बिना रैंप के आयुष्मान योजना का लाभ लेते हुए अस्पताल में बिस्तरों की संख्या भी नियम विरुद्ध तरीके से बढ़वा लिया ।

खैर अब देखने वाली बात यह है कि हाल ही में हुए निजी अस्पताल दयानिधि के जांच रिपोर्ट एकदम निष्पक्ष तरीके से बनते हुए उक्त हॉस्पिटल एवं डॉक्टर पर कार्यवाही होती है कि जांच टिम में मौजूद सदस्यों को भी रसूखदार दबंग एवं राजनीतिक पकड़ रखने वाले डॉक्टर संदीप त्रिपाठी से भय खाते हुए जांच रिपोर्ट डॉक्टर त्रिपाठी के मन मुताबिक बनेगा।

अगली खबर में हम आपको बताएंगे कि किस – किस आला अफसर की मिलीभगत से तमाम प्रकार के अवैध रूप से कारनामे करते हुए निजी अस्पताल दयानिधि को अनुचित तरीके से विभाग एवं सरकार को चुना लगाया गया।

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