10/10/2026
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संस्कार और माता-पिता के प्रति समर्पण जीवित रहे तो कोई बच्चा अवसाद का शिकार नहीं हो सकता: राज्य अलंकरण से सम्मानित शिल्पा पाण्डेय


सरगुजा समय अंबिकापुर। शासकीय राजमोहिनी देवी कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय एवं ‘विजन’ समाजसेवी संस्था के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर एक दिवसीय वृहद कार्यशाला का आयोजन किया गया। ‘जीवन अनमोल है’ अभियान के तहत आयोजित इस कार्यशाला में लगभग 500 छात्राओं ने भाग लिया, जहाँ विषय-विशेषज्ञों ने मानसिक तनाव, आत्मघाती कदमों की रोकथाम, सोशल मीडिया के संतुलित उपयोग और माता-पिता के प्रति कृतज्ञता के भाव पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।


खास बात 20 वर्षों का सेवा कार्य: विजन संस्था की संयोजक  शिल्पा पाण्डेय को महिला एवं बाल कल्याण के क्षेत्र में दो दशकों के उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य सरकार द्वारा राज्य अलंकरण ‘माता बहादुर कलारिन सम्मान’ से नवाजा जा चुका है।


18 हजार विद्यार्थियों तक पहुंच: विजन संस्था छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल एवं उच्च शिक्षा विभाग की अनुमति से विगत छह महीनों में 18,000 से अधिक छात्र-छात्राओं के बीच ‘जीवन अनमोल है’ अभियान संचालित कर चुकी है।


1158 जिंदगियों को नई राह: संयोजक शिल्पा पाण्डेय अब तक गंभीर मानसिक अवसाद एवं आत्महत्या की प्रवृत्ति से जूझ रहे 1,158 बच्चों की समय पर काउंसलिंग कर उन्हें सुरक्षित सामान्य जीवन लौटा चुकी हैं।


माता-पिता से संवाद ही अवसाद का सबसे बड़ा उपचार: शिल्पा पाण्डेय:- मुख्य वक्ता शिल्पा पाण्डेय ने कहा कि वर्तमान युवा पीढ़ी में बढ़ता मानसिक अवसाद गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा, “माता-पिता के त्याग, संस्कारों और माँ की प्रसव पीड़ा के दर्द को दिल में धारण करने वाला बच्चा कभी मानसिक रूप से कमजोर नहीं हो सकता।”
उन्होंने वर्तमान दौर में मोबाइल के अत्यधिक उपयोग पर आगाह करते हुए कहा कि आज मोबाइल हमें नियंत्रित करने लगा है, जबकि नियंत्रण हमारे हाथ में होना चाहिए। किसी भी गलती, असफलता या डर की स्थिति में पश्चाताप की आग में घुटने या आत्मघाती कदम उठाने के बजाय सबसे पहले अपने परिजनों से बात करनी चाहिए। सोशल मीडिया पर निजी तस्वीरें, मोबाइल नंबर या घर का पता साझा करने से बचने की हिदायत देते हुए उन्होंने कहा कि जीवन केवल हमारा नहीं है, इस पर उन माता-पिता और गुरुजनों का भी हक है जिन्होंने हमें इस मुकाम तक पहुँचाया है।


वक्ताओं ने साझा किए जीवन के प्रेरक अनुभव:- संस्कार और चरित्र ही असली ताकत: कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विद्यालय सरगुजा संभाग की संचालिका बीके राजयोगिनी विद्या दीदी ने कहा कि संस्कार जीवन की दिशा और चरित्र उसकी ऊंचाई तय करता है। स्थिर और मजबूत चरित्र वाला व्यक्ति किसी भी विपरीत परिस्थिति में घबराता नहीं है।


मुस्कान से बदलती हैं परिस्थितियां: स्वच्छता समिति अंबिकापुर की अध्यक्ष सुश्री शशिकला सिंह ने 430 स्वच्छता दीदियों के कार्य का उदाहरण देते हुए कहा कि विपरीत हालात में भी हौसला और मुस्कान बनाए रखने से उम्मीद की नई किरण जरूर निकलती है।


स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन: मेडिकल कॉलेज की नोडल अधिकारी (रेड क्रॉस व ऑर्गन-ब्लड डोनेशन) डॉ. शारदा भगत ने छात्राओं के शारीरिक स्वास्थ्य, विशेषकर एनीमिया की रोकथाम पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हीमोग्लोबिन स्तर 12 से कम न हो, इसके लिए खानपान पर ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि शारीरिक रूप से मजबूत होकर ही मानसिक मजबूती पाई जा सकती है।


मदद मांगने में संकोच न करें: मेडिकल कॉलेज की काउंसलर श्रीमती अंजुला मिश्रा ने कहा कि मानसिक तनाव एक हकीकत है। यदि मन परेशान हो, तो परिजनों से साझा करें या निसंकोच मनोवैज्ञानिक व काउंसलर की मदद लें।


अभिभावक हमेशा साथ खड़े हैं: समाजसेवी सतीश केडिया ने छात्राओं से अपील की कि वे अपने माता-पिता से कोई बात न छिपाएं, क्योंकि हर अच्छी-बुरी परिस्थिति में अभिभावक ही सबसे बड़े ढाल बनकर खड़े रहते हैं।


हेल्पलाइन नंबर जारी, मिला समाधान का भरोसा:- कार्यशाला के दौरान विजन संस्था की वालंटियर संगीता सिंह ने संस्था का हेल्पलाइन नंबर साझा करते हुए छात्राओं से कहा कि यदि कोई अपनी निजी या मानसिक परेशानी खुलकर नहीं बता पा रही हो, तो वे हेल्पलाइन पर संदेश भेजकर निःशुल्क समाधान व परामर्श प्राप्त कर सकती हैं।


महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. एजेंन टोप्पो ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए मानसिक स्वास्थ्य दिवस की शुभकामनाएं दीं और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की छात्राओं के अनुशासन व सहभागिता की सराहना की। कार्यक्रम का सफल संचालन कॉलेज की प्राध्यापिका आशा गोयल ने किया। आयोजन को सफल बनाने में विजन संस्था के वालंटियर राजू यादव, हर्षल यादव तथा स्वच्छता समिति की कोर कमेटी सदस्य ज्ञानकता कुजूर का विशेष योगदान रहा।

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