सरगुजा समय अंबिकापुर :- सरगुजा संभाग में लागातार निजी अस्पतालों के संचालक एवं कुछ दलालीपूर्वक कार्य करने वाले डॉक्टरों की तादात बढ़ती जा रही हैं जिसके वजह से इन दलालरूपी डॉक्टरों कों अपने निजी अस्पताल में तमाम सुख सुविधाओं कों मेनेटन करने के लिए मरीजों की आवश्यकत होती हैं जिसके वजह से कुछ निजी हॉस्पिटल के संचालक एवं दलाली पूर्वक नीति से कार्य करने वाले डॉक्टरों कों अपने निजी अस्पताल में मरीज लाने के लिए दलाल एजेंट की मौन स्वीकृति वाले नियत से नियुक्ति कर लेते हैं।
इन मौन स्वीकृति वाले एजेंट दलालों का यह काम होता हैं की अगर कोई ग्रामीण अपने स्वास्थ्य से सम्बंधित किसी भी मामले के ईलाज के लिए शहर का रुख करते हैं और ईलाज के लिए जिला चिकित्सालय एवं मेडिकल कॉलेज जाते हैं तो इन दलालों के द्वारा उन्हें नाना प्रकार के प्रलोभन देकर स्वयं के निजी लाभ के लिए निजी अस्पताल में एडमिट करवा दिया जाता हैं।
उसके बाद उक्त निजी हॉस्पिटल के द्वारा तमाम प्रकार हथकंडे अपनाते हुए मासूम मरीजों एवं उनके परिजनों का आर्थिक दोहन चालू किया जाता हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बतौली निवासी अलका लकड़ा को पेट दर्द की शिकायत हुई जिसके पश्चात 24 अप्रैल को अंबिकापुर के संकल्प अस्पताल में उक्त युवती कों भर्ती कराया गया था। अस्पताल में तमाम प्रकार के ईलाज एवं जाँच उपरांत ऑपरेशन किया गया जिसके बाद 7 मई को मरीज कों छुट्टी दे दी गई।
परन्तु मरीज के परिजनों के अनुसार, तीन दिन तक महिला की तबीयत ठीक रही, लेकिन फिर अचानक सांस लेने में तकलीफ होने लगी उसके बाद जब उसे दोबारा संकल्प अस्पताल लाया गया, तो डॉक्टर द्वारा एक इंजेक्शन दिए जाने के तुरंत बाद उसकी हालत बिगड़ गई और देर रात इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए बतौली थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अब इस तरह के तमाम कारनामो के बावजूद सम्बंधित निजी हॉस्पिटल पर किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं होने के कारण इन दलालों के हौसले बुलंद हैं एवं बेखौफ होकर तमाम उक्त दलाल रूपी एजेंट चंद सिक्कों कों बटोरने के चक्कर में मासूम ग्रामीणों के जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में सरगुजा की सबसे बड़ी विडम्बना हैं की जब यहाँ के नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी ही स्वघोषित तरीके से निजी अस्पताल का संचालन कर रहे हैं तो बाकी के निजी अस्पताल संचालको कों डरने की कोई बात नहीं हैं क्योंकि जब निजी हॉस्पिटल में लगने वाले तमाम आरोपों पर नियंत्रण करने वाला अधिकारी ही निजी अस्पताल का स्वघोषित संचालक हो फिर बाकी लोगों कों किस कार्यवाही का भय यहाँ तमाम कार्यवाही कमीशन रूपी नोटों से भरें लिफाफे में बंद हैं।
तमाम प्रकार के विवादों में घिरे रहने वाले स्वघोषित निजी अस्पताल के संचालक एवं नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी पर छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री का किस कारण स्नेह हैं की उक्त तमाम विवादित डॉक्टरों के मसीहा डॉक्टर पर क्यों तगडी मेहरबानी बनाते हुए अपनी स्वयं की सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल करने की कोसिस की जा रही।

