भाजपाइयों से थाने में तू-तू मैं-मैं की आग बुझी नहीं कि बदमाशों ने दिया पुलिस को खुला चैलेंज, कोतवाली की कमजोर कमान कों मजबूत करने स्वयं कमान संभालने दौड़ रहे CSP राहुल बंसल।
सरगुजा समय अंबिकापुर। जिला मुख्यालय के सबसे महत्वपूर्ण और अति-संवेदनशील कोतवाली थाने में पुलिस विभाग के आला अफसर की ‘खास मेहरबानी’ का खेल अब पूरे शहर की कानून-व्यवस्था पर भारी पड़ने लगा है। कई सीनियर और तजुर्बेकार पुलिस निरीक्षक (TI) महीनों से पुलिस लाइन में खाली बैठकर पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कोतवाली की कमान ‘दो स्टार’ (उप-निरीक्षक) के हवाले कर दी गई है।
जिसका नतीजा यह है कि शहर अपराधियों का सेफ जोन बनता जा रहा है और कोतवाली पुलिस विवादों व वारदातों को संभालने में पूरी तरह नाकाम साबित होती नजर आ रही है।

थाने में खाकी की किरकिरी, मैदान में दौड़ रहे प्रशिक्षु IPS राहुल बंसल :- कोतवाली की प्रशासनिक पकड़ इतनी ढीली पड़ चुकी है कि थानेदार का काम भी सीएसपी व प्रशिक्षु आईपीएस राहुल बंसल को खुद मोर्चा संभालकर करना पड़ रहा है। बीते दिनों कोतवाली परिसर के भीतर ही सत्ताधारी दल भाजपा के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हुई तीखी तू-तू मैं-मैं और भारी हंगामे ने महकमे की कार्यप्रणाली की पोल खोलकर रख दी है। जिसका मुख्य कारण थाना प्रभारी की लचर कार्यशैली कों माना जा सकता है जिसके कारण शहर में खाकी की जमकर किरकिरी हुई।
कोतवाली में चेम्बर के अंदर कुर्सी में बैठ CSP राहुल बंसल से ही तू तू मैं मैं भाजपाइयों द्वारा जम कर किया गया था अभी यह मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि शहर के सीने पर एक और दुस्साहसिक वारदात दर्ज हो गई।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गांधी चौक पर दिनदहाड़े ₹2 लाख की लूट हो गई जिससे लुटेरों के हौसले बुलंद होना एवं पुलिस कों खुल्ला चैलेंज देना माना जा सकता है:– आपकी जानकारी के लिए बता दें की शहर के सबसे व्यस्त और व्यापारिक केंद्र गांधी चौक पर अपराधियों ने दिनदहाड़े ₹2 लाख की सनसनीखेज लूट को अंजाम देकर पुलिस गश्त के दावों की धज्जियां उड़ा दीं। कोतवाली से चंद कदमों की दूरी पर हुई इस बड़ी वारदात ने यह साफ कर दिया है कि बदमाशों के दिल से पुलिस का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है। गांधी चौक जैसे इलाके में जहां हर वक्त लोगों की आवाजाही रहती है, वहां से अपराधी सरेआम नकदी लूटकर फरार हो गए और कोतवाली पुलिस हाथ मलती रह गई।

अजीब विडंबना है की जिस चौक पर पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं सरगुजा विधायक मंत्री का बंगला हो उस चौक पर इतने बड़े वारदात कों अंजाम दें डालना अपराधियों चुस्ती एवं पुलिस प्रशासन की सुस्ती का तगड़ा उदाहरण माना जा सकता है। अंबिकापुर शहर में लगातार बढ़ते अपराधों का ग्राफ खुलेआम यह बयां कर रहा है की शहर में अपराधियों के मन में पुलिस का तनिक भी ख़ौफ़ नहीं है जिसके कारण अब अपराधियों द्वारा खुलेआम पुलिस कों अपराधियों द्वारा खुली चुनौती दी जा रही है।

इस बड़े वारदात से सिर्फ आम नागरिकों एवं व्यापारियों में ही नहीं बल्कि पुलिस महकमे के भीतर भी असंतोष गहराता दिखाई दें रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस विभाग के गलियारों में भी कानाफूसी तेज हो गई है:-
लाइन में टीआई, फील्ड में एसआई: जब जिले में काबिल और अनुभवी पुलिस इंस्पेक्टर मौजूद हैं, तो उन्हें पुलिस लाइन में डंप रखकर एक सब-इंस्पेक्टर पर इतनी मेहरबानी क्यों लुटाई जा रही है?
बैकफुट पर कोतवाली: शहर के सबसे बड़े थाने को संभालने के लिए जिस प्रशासनिक अनुभव, ओहदे और कड़े फैसलों की जरूरत होती है, उसका सीधा अभाव कोतवाली में नजर आ रहा है।

व्यापारियों में भारी आक्रोश: दिनदहाड़े हुई ₹2 लाख की लूट के बाद शहर के कारोबारी वर्ग में असुरक्षा की भावना घर कर गई है। व्यापारियों का कहना है कि अगर शहर का दिल कहे जाने वाले गांधी चौक पर ही सुरक्षा नहीं है, तो फिर आम आदमी की हिफाजत का क्या?
कोतवाली क्षेत्र में लगातार हो रहे बवाल, थाने के भीतर राजनीतिक टकराव और अब गांधी चौक पर दुस्साहसिक लूट—यह सब बताता है कि ‘दो स्टार’ की ताजपोशी शहर पर भारी पड़ रही है। अब देखना यह है कि जिले के आला अफसर अपनी इस कथित मेहरबानी को जारी रखते हैं या फिर कोतवाली की कमान किसी तजुर्बेकार निरिक्षक के हाथ में सौंपते हैं।
