क्या किसी बड़ी जनहानि के बाद जागेगा राजीव गांधी पीजी कॉलेज, नगर निगम, राजस्व और
क्या किसी बड़ी जनहानि के बाद जागेगा राजीव गांधी पीजी कॉलेज, नगर निगम, राजस्व और वन विभाग?
सरगुजा समय अंबिकापुर। शहर की सबसे व्यस्त सड़कों में शुमार एमजी रोड पर हर दिन हजारों जिंदगियां मौत के साए में सफर करने को मजबूर हैं। राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के समीप मुख्य मार्ग पर स्थित एक विशाल और भारी यूकेलिप्टस का पेड़ किसी भी क्षण बड़े हादसे का कारण बन सकता है। बारिश और तेज हवाओं के बीच यह जर्जर पेड़ सीधे दो भारी बिजली ट्रांसफार्मरों के ऊपर झूल रहा है। अगर यह पेड़ गिरा, तो ट्रांसफार्मर फटने, हाई-वोल्टेज करंट फैलने और भीषण आग लगने से मौके पर ही भयावह तबाही मच सकती है।
चार विभागों की आपराधिक चुप्पी और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का खेल
राजीव गांधी पीजी कॉलेज प्रशासन: कॉलेज की सीमा पर खड़े इस खतरनाक पेड़ को लेकर संस्थान मुखिया का रवैया पूरी तरह लापरवाह है। प्रतिदिन हजारों छात्र-छात्राएं इसी रास्ते से गुजरते हैं, लेकिन प्रबंधन ने इसे हटवाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
नगर निगम अंबिकापुर: शहर की सुरक्षा और खतरनाक पेड़ों की छंटाई का दावा करने वाला नगर निगम प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। क्या निगम को किसी मासूम की जान जाने का इंतजार है?
राजस्व एवं वन विभाग: सीमा विवाद और पेड़ काटने की कागजी अनुमतियों की आड़ में वन विभाग और राजस्व विभाग मामले को एक-दूसरे के पाले में फेंक रहे हैं। फाइलों के चक्कर में जनता की सुरक्षा को ताक पर रख दिया गया है।
विद्युत विभाग (CSPDCL): 11 केवी लाइन और दो विशाल ट्रांसफार्मरों के ठीक ऊपर खड़े इस खतरे को देखकर भी विभाग ने अब तक कोई सुरक्षात्मक कार्रवाई नहीं की है।
सड़क पर मंडराता काल, कभी भी हो सकता है बड़ा विस्फोट
एमजी रोड से हर मिनट सैकड़ों कारें, दोपहिया वाहन और पैदल राहगीर गुजरते हैं। पेड़ के नीचे ही दो भारी ट्रांसफार्मर स्थापित हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि यह पेड़ तारों और ट्रांसफार्मरों पर गिरा, तो पूरा इलाका आग के गोले में तब्दील हो सकता है और करंट की चपेट में आने से कई जानें जा सकती हैं।
जनता सीधे तौर पर सवाल कर रही है—क्या जिला प्रशासन और ये चारों विभाग केवल हादसे के बाद मुआवजे की घोषणा करने के लिए बैठे हैं? समय रहते इस पेड़ को नहीं काटा गया, तो होने वाले हर नुकसान और जनहानि के जिम्मेदार सीधे तौर पर ये लापरवाह अफसर होंगे।
