सरगुजा समय छत्तीसगढ़ अम्बिकापुर :- अंबिकापुर में उप संचालक डॉ आर पी शुक्ला के कारनामें आजकल बड़े बड़े भ्रष्ट अफसरों के लिए एक मिसाल बन रहे है, बवाली शुक्ला साहब के कारनामें और नियम विरुद्ध तरीके से कार्य हो और विभाग से लेकर सरकार तक में बवाल ना हो यह हो ही नहीं सकता, शुक्ला साहब ने बड़े आराम से एक बड़ा बवाल खड़ा कर दिया है, अब बवाल कैसे किया है यह आप स्वयं इस खबर में पढ़े।
बवाली डॉ. शुक्ला साहब ने चतुर्थ श्रेणी के पद पर लुटाया अफसर का वेतन: सीधे 15 लाख का अतिरिक्त भुगतान।
एक ही कर्मचारी के दो-दो वेतन निर्धारण, पेंशन 18 हजार से सीधे 53 हजार के पार।
सुप्रीम कोर्ट से हारी फर्जी मार्कशीट की 8 लाख की रिकवरी दबाई।
प्रमुख सचिव तक पहुंची गूंज: प्रभारी उपसंचालक और बाबू पर FIR व रिकवरी की मांग।
सरकारी खजाने की रखवाली करने वाले ही अगर सेंधमारी पर उतर आएं तो क्या होगा? अम्बिकापुर पशुधन विकास विभाग से निकला यह सनसनीखेज मामला इसका जीता-जागता सुबूत है। अदालत के फैसले की आड़ लेकर और नियमों को रद्दी की टोकरी में डालकर एक सेवानिवृत्त कर्मचारी पर 18 लाख रुपये लुटाने का खुला खेल खेला गया। मामले की शिकायत सीधे छत्तीसगढ़ शासन के प्रमुख सचिव (कृषि एवं पशुपालन विभाग) तक करने की तैयारी है, जहां शिकायत में प्रभारी उपसंचालक डॉ. आर.पी. शुक्ला और स्थापना प्रभारी मधु सिंह के खिलाफ आपराधिक एफआईआर (FIR) दर्ज कर वसूली की गुहार लगाई गई है।
खेल नंबर 1: कोर्ट ने कहा ‘चतुर्थ श्रेणी’, बवाली साहब ने बना दिया ‘अधिकारी’ :- जनवरी 2025 में सेवानिवृत्त हुए सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्राधिकारी इंद्र देव सिंह के एरियर भुगतान में सीधे 15 लाख रुपये का फटका लगाया गया। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (WPS 5139/2024) ने स्पष्ट आदेश दिया था कि 1999 से 2007 तक की सेवा को ‘वैक्सीनेटर’ (चतुर्थ श्रेणी) मानकर एरियर दिया जाए। लेकिन प्रभारी उपसंचालक ने कथित मिलीभगत से चतुर्थ श्रेणी के बजाय सीधे कार्यपालिक तृतीय श्रेणी (सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्राधिकारी) का वेतनमान जोड़कर करीब 15 लाख रुपये का ज्यादा भुगतान कर दिया।
खेल नंबर 2: 6 महीने में दो-दो वेतन निर्धारण, कोषालय को भी कर दिया गुमराह वित्तीय नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए एक ही कर्मचारी का दो बार अलग-अलग वेतन निर्धारण किया गया: 7 मई 2025: पहला आदेश जारी कर अंतिम वेतन 36,200 रुपये तय हुआ और पेंशन 18,100 रुपये स्वीकृत हुई। 22 दिसंबर 2025: कोर्ट आदेश का बहाना बनाकर दूसरा आदेश जारी हुआ, जिसमें अंतिम वेतन सीधे 53,300 रुपये दर्शा दिया गया और ट्रेजरी को गुमराह कर सत्यापन भी करा लिया गया।
खेल नंबर 3: फर्जी मार्कशीट की 8 लाख की रिकवरी फाइलों में दफन:- शिकायत में यह भी खुलासा हुआ है कि उक्त कर्मचारी को 11वीं की फर्जी मार्कशीट के कारण पूर्व में उच्च पद से डिमोट किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बावजूद उच्च पद पर रहते हुए लिए गए अतिरिक्त 8 लाख रुपये की वसूली उपसंचालक द्वारा नहीं की गई और शासन को सीधा चूना लगाया गया।
बिना डायरेक्टर की अनुमति 18 लाख का आहरण फरवरी 2026 में अंतिम एरियर भुगतान से पहले सक्षम प्राधिकारी (संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं) से कोई अनिवार्य मंजूरी नहीं ली गई।
शिकायतकर्ता ने प्रमुख सचिव से मांग की है कि आहरण-संवितरण अधिकारों का दुरुपयोग करने वाले डॉ. आर.पी. शुक्ला और सहायक ग्रेड-2 मधु सिंह से पूरी राशि मय ब्याज वसूल कर दोनों के खिलाफ गबन व धोखाधड़ी की गैर-जमानती धाराओं में तत्काल एफआईआर दर्ज कराए जाने की शिकायत में मांग की गई है ।
सबसे बड़ी बात यह भी है की इंद्र देव सिंह वेक्सीनटर के पद पर रहते हुए अनुपस्थित होने की अवधि लगभग 9 साल की थी बावजूद उसके बवाली उप संचालक डॉ शुक्ला ने संचालक से बिना अनुमति लिए एरियस भुगतान कर दिया जो की नियम विरुद्ध है इस बड़े बवाल में उप संचालक डॉ आर पी शुक्ला पर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए थी जो की अभी तक नहीं हुई है जिसके कारण विभाग के मंत्री की छबि धूमिल हो रही है।
