सरगुजा समय अंबिकापुर :-
अंबिकापुर सरगुजा (छत्तीसगढ़) के कन्या परिसर रोड़ विशुनपुर में स्थित निजी अस्पताल दयानिधि एवं यहाँ के स्व घोषित संचालक शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी अपने कारनामें एवं मरीजों को ईलाज ऑपरेशन करने के बाद स्थाई विकलांग बनाने के लिए लगातार चर्चाओं में बने ही रहते हैं।
दयानिधि अस्पताल अंबिकापुर में स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार सवालिया निशान लगाते हुए एक खौफनाक घटना घटने की बात सामने आई है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अंबिकापुर के दयानिधि अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती हुए एक 53 वर्षीय व्यक्ति को डॉक्टर संदीप त्रिपाठी की लापरवाही बहुत भारी पड़ गई डॉक्टर ने मरीज को जीवन भर के लिए विकलांग बना दिया ऐसा आरोप पीड़ित के परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर संदीप त्रिपाठी द्वारा की गई सर्जरी ने इलाज के बजाय मरीज को वह दर्द दिया जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
यमराज डॉक्टर के द्वारा कई लोगों के ऑपरेशन करने के बाद स्थाई विकलांग बनने की शिकायत मिलती ही रहती हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें की जशपुर (बगीचा) निवासी लैब्यो राम को 28 दिसंबर 2024 को इलाज के लिए इस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार, उनके बाएं पैर की जांघ की हड्डी में मामूली फ्रैक्चर था। अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, डॉ. संदीप त्रिपाठी ने ‘ORIF विद डिस्टल फीमर प्लेटिंग’ और ‘पटेला फिक्सेशन’ का ऑपरेशन किया। लेकिन परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर की घोर लापरवाही और गलत सर्जरी के कारण मरीज का पैर बुरी तरह सड़ गया या ऐसी जटिलता पैदा हो गई कि अंततः मरीज को अपना पैर ही कटवाना पड़ा।
पीड़ित के स्थाई विकलांग बनने से परिजनों का गुस्सा सातवे आसमान में हैं वही परिजनों पर सवाल उठाते हुए डॉक्टर को जल्लाद की संज्ञा भी दें डाली हैं।
घटना के बाद पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों ने डॉक्टर पर निशाना साधते हुए कहा, “हमने मरीज को ठीक करने के लिए अस्पताल भेजा था, न कि अपना अंग कटवाने के लिए। डॉक्टर संदीप त्रिपाठी की लापरवाही ने एक हंसते-खेलते इंसान को अपाहिज बना दिया है।” परिवार ने इसे महज एक चिकित्सीय चूक नहीं, बल्कि एक अक्षम्य अपराध करार दिया है।
एक शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी के द्वारा खुलेआम निजी दयानिधि अस्पताल का संचालक करना सरगुजा संभाग के सयुंक्त संचालक, CMHO एवं जिला के मुखिया के सामने एक बड़ी चुनौती हैं की खुलेआम एक शासकीय डॉक्टर निजी अस्पताल का संचालन वर्षो से कर रहा हैं।
नियमविरुद्ध तरीके से अस्पताल का संचालन करते हुए कई करोड़ रूपए आयुष्मान योजना के तहत प्राप्त करते हुए स्वयं शासकीय नौकरी में रहते हुए करोड़ों रूपए वाली कार की सवारी कर रहे हैं इसकी जाँच कर कड़ी कार्यवाही करने की विभाग के आला अफसरों से लेकर रायपुर में बैठे स्वास्थ्य विभाग जवाबदार अधिकारीयों को जरुरत हैं।
ना जाने कितने लोगों को अपाहिज बनाने के बाद डॉक्टर संदीप त्रिपाठी की रहसी वाली जीवन आई हैं जिसके कारण करोड़ों की गाड़ी की सवारी हो रही हैं।
डॉक्टर की बेशर्मी की हद उस समय समझी जा सकती हैं की पीड़ित के परिजन ने सरगुजा समय के सम्पादक को बताया की डॉक्टर संदीप त्रिपाठी के द्वारा पीड़ित को बाहर ले जाकर प्लास्टिक का पैर लगवाने एवं पैसा देने की बात कही।
आप देखने वाली बात यह भी हैं इस शासकीय डॉक्टर र्वम् निजी अस्पताल के संचालक पर कार्यवाही होती हैं की सब इस डॉक्टर के रसूख के आगे नतमस्तक होते हुए कार्यवाही से वंचित करते हैं।

