सरगुजा समय अंबिकापुर :- जहाँ एक ओर केंद्र की भाजपा सरकार स्वच्छ भारत का सपना देखते हुए हर गाँव – गाँव में हर नागरिकों के घर – घर में शौचालय निर्माण करवा रही हैं और खुले में सौच न जाने के लिए आम नागरिकों से निवेदन कर रही हैं परंतु सरगुजा में ठीक इसके विपरीत कार्य किया जा रहा हैं।
अंबिकापुर के कोतवाली थाना चौक में पहले सार्वजनिक प्रसाधन लाखों रूपए की लागत से निर्माण हुआ था जिसकों निजी स्वार्थ के कारण ध्वस्त करके दुकान संचालित करने गुंटी रखवा दिया।
जैसा की हमने पहले भी बताया था की अंबिकापुर शहर के सबसे भीड़ भाड़ वाला स्थान थाना चौक जहाँ लगभग प्रतिदिन सैकड़ों मजदूर मजदूरी करने के लिए एकत्रित होते हैं जिसमे महिला कामगर भी रहती हैं जिसके कारण यहाँ सार्वजनिक शौचालय अत्यंत आवश्यक हैं।

जो पूर्व में था भी परंतु कुछ कमीशनखोर दलाली करने वाले अफसर के चक्कर में सार्वजनिक शौचालय कों तुड़वा दिया गया जिसके कारण अब सबसे ज्यादा समस्या महिला मजदूरों कों भी हो रही हैं।
छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार के साथ साथ अब अंबिकापुर के नगर निगम में भी भाजपा की सरकार हैं परंतु पिछली कांग्रेस की सरकार के समय हुए इस कारनामें की जाँच करवाने की जरुरत ना ही नगर निगम आयुक्त समझ रहे ना ही महापौर जबकि यह एक अत्यंत ज्वलंत मुद्धा हैं।
यह अत्यंत गंभीर मामला हैं की कैसे किसी के चाहने मात्र से शासन के लाखों रूपए की संपत्ति कों जमीदोज कर दिया गया और अपने अपने चहेतों कों दूकान संचालन करने की लिए गुंटी लगवा दिया गया।
राहगीरों का जीना हुआ दुर्भर बता दे की सही सलामत हालत वाली पक्की सार्वजनिक शौचालय कों तुड़वाकर फाइबर वाली टैम्पोरेरी शौचालय कों लगवाया गया हैं जो की कबाड़ के रूप में ध्वस्त पड़ा हैं और चौक से गुजरने वाले राहगीरों कों इस शौचालय के गंदगी एवं गन्दी बदबूओं के कारण सास लेना तक दुर्भर हो रहा हैं अगर आप इस इलाके से गुजर रहे हैं तों आपको अपनी सांस रोक कर ही सफर करना पड़ेगा यह मज़बूरी निगम की लापरवाही के कारण हैं।
थाना चौक में अक्सर जाम की स्थिति निर्मित रहती हैं जहाँ इन अवैध रूप से संचालित गुंटी के सामने कई बाईक कार सड़क पर खड़ी रहती हैं जिसके वजह से अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती हैं।
अब देखने वाली बात यह हैं की इस मुद्दे पर श्रीमान नगर निगम आयुक्त कब अपनी नजर फेरते हैं कई बार इस मुद्दे पर नगर निगम आयुक्त से फोन पर चर्चा करने का प्रयास किया गया परन्तु साहब फोन उठाने की जरुरत ही नहीं समझते खैर होना भी चाहिए सरगुजा में अफसरसाही चर्म पर जो हैं।
अब देखने वाली बात यह भी हैं की महापौर मंजूषा भगत के द्वारा इस मामले कों कितना गंभीरता से लेकर जाँच करवाने के पश्चात् कार्यवाही की जाती हैं।

