सरगुजा समय सूरजपुर / भैयाथान: सरगुजा संभाग में आजकल कुछ पटवारियों के द्वारा विभागीय कार्य को छोड़कर जमीन दलाली करने भूत सवार होता नजर आ रहा है, इन दलाल पटवारियों का दबदबा इतना बढ़ गया है की कई तहसीलदार को अपने इशारे में घुमाते नजर आते है ऐसा मामला अंबिकापुर सरगुजा जिला में भी लगातार देखने को मिल रहा है जिसकी जानकारी हम आपको अगले खबर में बताएँगे, अभी आप सूरजपुर में तहसीलदार पटवारी एवं भू माफियाओ की करतूत के बारे में पढ़े।
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक महकमे और महसूल विभाग की कलई खोल दी है. लालच और भ्रष्टाचार की ऐसी दास्तान शायद ही पहले कभी देखी गई हो, जहाँ एक जीवित 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला को कागजों में मृत दिखाकर उनकी करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया.
इस हाई-प्रोफाइल और सनसनीखेज मामले में झिलमिलि (भैयाथान) थाने में तत्कालीन तहसीलदार, पटवारी और अन्य भू-माफियाओं समेत कुल 4 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर (FIR No. 0185/2026) दर्ज कर ली गई है. इस बड़ी कार्रवाई से भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।
तहसीलदार और पटवारी की सीधी और शर्मनाक संलिप्तता
जांच रिपोर्ट के खुलासे ने यह साबित कर दिया है कि बिना सिस्टम की मिलीभगत के इतना बड़ा फर्जीवाड़ा संभव ही नहीं था:
तहसीलदार संजय कुमार राठौर (मुख्य मास्टरमाइंड)?: भैयाथान के तत्कालीन तहसीलदार संजय राठौर ने पद का घोर दुरुपयोग किया. बिना किसी जमीनी हकीकत या तथ्यों की जांच किए, सिर्फ एक महीने के भीतर और अत्यधिक संदिग्ध जल्दबाजी दिखाते हुए बुजुर्ग महिला को मृत मानकर आरोपी वीरेंद्र नाथ दुबे के पक्ष में नामंतरण आदेश पारित कर दिया. हद तो तब हो गई जब तहसीलदार ने खुद अपनी पत्नी (श्रीमती शारदा राठौर) के नाम पर भी उसी विवादित जमीन की रजिस्ट्री करवा ली. कलेक्टर सूरजपुर की जांच में तहसीलदार को इस पूरे षड्यंत्र का प्रथम दृष्टया मुख्य दोषी करार दिया गया है.
हल्का पटवारी एजलिन भगत: पटवारी ने अपनी रिपोर्ट में भारी हेरफेर की. जमीन के पंचनामे में गलत जगह का हवाला दिया और बिना दिनांक की रिपोर्ट पेश कर आरोपियों को सीधे तौर पर जमीन हड़पने में मदद पहुंचाई.
फर्जीवाड़े की वो खौफनाक परतें, जो उड़ायेंगी होश: पीड़िता शैल कुमारी देवी (पति स्व. राधेश्याम दुबे), जिनकी उम्र करीब 75 वर्ष है. उन्होंने यह जमीन कानूनी रूप से 11 अगस्त 1976 को खरीदी थी और तब से लगातार उनका कब्जा व स्वामित्व था.
आरोपियों ने साजिश के तहत एक फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराया, जिसमें दिखाया गया कि बुजुर्ग महिला की मौत 09/02/1967 को हो चुकी है—जबकि असलियत में महिला आज भी जीवित हैं. इस फर्जीवाड़े के आधार पर लगभग 39-57 साल पुराने रिकॉर्ड में फेरबदल किया गया.
पुलिस ने मामले में वीरेंद्र नाथ दुबे, तत्कालीन तहसीलदार संजय कुमार राठौर, पटवारी एजलिन भगत और कमलेश दुबे के खिलाफ BNS (भारतीय न्याय संहिता) की सख्त धाराओं (318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2)) के तहत मामला दर्ज कर लिया है.

