सरगुजा समय सूरजपुर :- छत्तीसगढ़ में लीलाओ का भरमार हैं यहाँ के मंत्री अपने मंत्रालय वाले विभाग कों छोड़कर अन्य मंत्री के मंत्रालय वाले विभाग कों संभालने एवं सवारने का झूठा प्रयास करते दीखते रहते हैं जबकि सच्चाई यह हैं की इन मंत्री महोदय से अपने ही विभाग वाला मंत्रालय नहीं सम्भल रहा।

बता दें की कुछ माह पूर्व में छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के द्वारा मदिरा दुकान का निरिक्षण करते हुए बड़े गर्व के साथ अपने सोशल मिडिया प्लेटफार्म में पोस्ट करते हुए बताया की आज गौरेला पेंड्रा मरवाही जिला स्थित मदिरा दुकान का निरिक्षण कर व्यवस्थाओ का जायजा लिया जो की आबकारी मंत्री के कार्य क्षेत्र का मामला है। परन्तु स्वास्थ्य मंत्री अपना विभाग छोड़ आबकारी विभाग का जायजा एवं व्यवस्था देख रहे हैं जबकि छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति बत्तर से भी बत्तर हैं।

खैर मंत्री जी के कारनामें मंत्री एवं मुख्यमंत्री ही समझें हमें क्या हम आपको जानकारी बताने वाले हैं वह घटना हैं एक लोभी एवं दलाली पूर्वक कार्य करने वाले डॉक्टर की जिसके द्वारा अपने एवं अपने चहेते निजी अस्पताल के संचालक कों लाभ और मासूम गरीब मरीज से आर्थिक दोहन करने का मामला सामने आया हैं जिसके कारण एक मासूम बच्ची की मौत हो गई।

विशेष सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार थाना ओंडगी के ग्राम कर्री के निवासी बुद्धदास की 15 वर्षीय पुत्री रवीना सिंह का हाथ टूट गया था जिसके ईलाज के लिए रवीना के परिजनों ने ईलाज के लिए जिला अस्पताल सूरजपुर लेकर गए यहाँ पर डॉक्टर अजय साहू जो की हड्डी रोग विशेषज्ञ है से मुलाक़ात हुई लेकिन डॉक्टर ने ईलाज के नाम पर आयुष्मान कार्ड से प्राइवेट अस्पताल सौभाग्य में चलने बोला गया जहाँ पर टूटे हुए हाथ का ऑपरेशन किया जायेगा।

मिली जानकारी के अनुसार डॉक्टर अजय साहू के द्वारा मरीज के परिजनों कों अपने बहकावे एवं भरोसे में लेकर निजी सौभाग्य हॉस्पिटल में लेकर के चला जिसके बाद निजी सौभाग्यम हॉस्पिटल जो शासकीय डॉक्टर विकास भगत के द्वारा संचालित किया जा रहा हैं के ऑपरेशन थिएटर में मरीज कों ऑपरेशन से पहले एनेस्थीसिया लगाया गया जिससे की मरीज की हालत गंभीर हो गई सांस लेने में तकलीफ होने लगी जिसके बाद आनन फानन में मरीज कों सूरजपुर में ही साधुराम हॉस्पिटल में भेजा गया जहाँ मरीज की गंभीर स्थिति कों भाफ्ते हुए तत्काल मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर के लिए रेफर कर दिया गया जहाँ 31/03/26 कों मासूम बच्ची रवीना की मृत्यु हो गई।

मिली जानकारी के अनुसार अब सबसे बड़ी बात यह हैं की उक्त सौभाग्य हॉस्पिटल भी जिला चिकित्सालय सूरजपुर में पदस्थ शासकीय डॉक्टर विकास भगत की छत्रछाया में चल तहा हैं कई शासकीय डॉक्टर अपने परिजनों एवं मित्रगण के नाम से निजी अस्पताल का पंजीयन कागजों में करवा रहे हैं लेकिन हकीकत में उक्त निजी अस्पताल का संचालन शासकीय डॉक्टर द्वारा ही किया जा रहा हैं।
मतलब शासकीय सेवा के नाम पर सिर्फ मौज उड़ाई जा रही हैं असली कमाई का खेल तो निजी अस्पताल खोल कर किया जा रहा हैं जहाँ कई मासूम ग्रामीणों की ईलाज के अभाव में मौत हो रही हैं और स्वास्थ्य मंत्री महोदय शराब दुकान का निरिक्षण कर सोशल मिडिया में पोस्ट डाल अपनी किरकिरी करवा करवा रहे हैं।

मिली जानकारी के अनुसार सौभाग्यम हॉस्पिटल में आईसीयु की सुविधा नहीं होने के बावजूद इन शासकीय डॉक्टरों के द्वारा मासूम बच्ची का ऑपरेशन यहाँ किया जाना इन डॉक्टरों के द्वारा आयुष्मान योजना से पैसा निकालना मुख्य उद्देश्य माना जा सकता हैं।
मामले में डॉक्टर अजय साहू ने बताया की शासकीय डॉक्टर विकास भगत का ही सौभाग्यम हॉस्पिटल हैं और मरीज उनके घर आई थी जिला अस्पताल सूरजपुर नहीं गई थी जबकि परिजनों का कहना हैं की वाह जिला अस्पताल सूरजपुर गए थे जहाँ से निजी अस्पताल में डॉक्टर अजय साहू के द्वारा चलने कहा गया।
इस तमाम मामले की और जानकारी जुटाने में हमारी टीम लगी हुई हैं जल्द ही आपको और विस्तार से बताएँगे की कैसे एक हार्ट पेसेंट कों बिना जाँच किये एनेस्थीसिया लगा दिया गया और बिना आईसीयु वाले निजी अस्पताल सौभाग्यम में ऑपरेशन किया जाने लगा।

