सरगुजा समय अंबिकापुर – बलरामपुर – सरगुजा संभाग या फिर यह कहे कि जो सरगुजा अंबिकापुर को जानता भी नहीं वह RTI लगाने के महारथी डी के सोनी को सामाजिक कार्यकर्ता एवं RTI एक्टिविस्ट को पुरस्कार वितरण कर देता है।
बड़े बड़े हीरो हीरोइन इन्हें पुरस्कार देते है जिसका महिमा मंडल शहर में लगे नो जॉन होर्डिंग में प्रचार प्रसार बतौर फ्लैक्सी के माध्यम से किया जाता है ।

परन्तु मजाल है नगर निगम के अधिकारी कर्मचारी अधिवक्ता डी के सोनी के ऊपर कोई कार्यवाही कर सके।
शहर में लगातार एक निजी चैनल के द्वारा अधिवक्ता डी के सोनी के ऊपर कई गंभीर आरोप लगते हुए प्रथम उनके निवास प्रमाण पत्र से लेकर RTI के नाम पर भयादोहन करते हुए अवैध उगाही एवं करोड़ों की संपत्ति बनाने तक का आरोप लगाया एवं हाल ही में मैनपाट में नव निर्मित तथास्तु रिसॉर्ट जो कि डी के सोनी के स्वामित्व वाली है जिसका निर्माण नियम विरुद्ध तरीके से करने एवं वन विभाग की भूमि के अधिग्रहण करने की बात सामने आई है जिसका आरोप एक निजी चैनल के स्वामी ने लगाया है।

खैर अब आते है डी के सोनी एवं उप अभियंता सुजीत गुप्ता के मामले में तो आपकी जानकारी के लिए बता दे कि अधिवक्ता डी के सोनी ने जल संसाधन विभाग संभाग क्रमांक 02 रामानुजगंज में पदस्थ उप अभियंता सुजीत गुप्ता के ऊपर एवं अन्य पर लगभग दो करोड़ रुपए के शासकीय राशि के फर्जीवाड़े का आरोप लगते हुए कोर्ट में 156 (3) के तहत परिवाद पेश किया परिवाद पेश करने का वर्ष लगभग 2022 था आज 2026 का पहला दिन है मतलब लगभग साढ़े तीन साल में डी के सोनी ने लगभग दो करोड़ के फर्जीवाड़ा करने वाले जल संसाधन विभाग संभाग क्रमांक 02 रामानुजगंज के आरोपियों पर कार्यवाही करवाने में असमर्थ नजर आ रहे है या फिर निजी चैनल के स्वामी द्वारा लगाए गए अवैध उगाही का मामला सच साबित हो रहा है।

क्योंकि जिस उप अभियंता सुजीत गुप्ता पर डी के सोनी ने शासकीय राशि के फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाया वही उप अभियंता अब डी के सोनी के तमाम प्रयासों एवं दर्ज परिवाद पर अपनी आँखें तरेरते हुए पुनः अपना पोस्टिंग रामानुजगंज में ही करवा लिया ।

अब विचारणीय बात यह है कि या तो अधिवक्ता डी के सोनी का दबदबा मार्केट में कम होता नजर आ रहा है या फिर जिस निजी चैनल ने डी के सोनी के ऊपर RTI के नाम पर भयदोहन करते हुए अवैध उगाही का आरोप लगाया है वह सच साबित हो सकता है जिसके कारण 2022 में दर्ज परिवाद में कार्यवाही होने के जगह अप अभियंता ने अपनी पदस्थापना पुनः रामानुजगंज करवाते हुए अधिवक्ता डी के सोनी के ऊपर करारा तमाचा लगाना ही माना जा सकता है ।

अंबिकापुर शहर के साथ साथ पूरे छत्तीसगढ़ में यह गंभीर चर्चा का विषय बना हुआ है कि RTI कार्यकर्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता के नाम पर सैकड़ों पुरस्कार लेने वाले अधिवक्ता डी के सोनी का यह पुरस्कार सुनियोजित एवं पेमेंट के आधार पर निर्धारित होता है ।

आम नागरिकों को यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि RTI लगाने वाला कोई RTI कार्यकर्ता नहीं होता यह आम नागरिकों का अधिकार है सूचना का अधिकार आम नागरिकों का अधिकार है इसे कोई भी लगा सकता है इसके लिए कोई आरटीआई कार्यकर्ता का अलग से संज्ञा नहीं दिया जाता यह संज्ञा स्वयं से लोग लगा लेते है ।

