सरगुजा समय अंबिकापुर – सरगुजा संभाग में स्वास्थ्य विभाग के कुछ अफसर ऐसे बैठे है जिन्हें सरगुजा की मासूम जनता के स्वास्थ्य सेवाओं से होनी वाली असुविधा से कोई लेना देना नहीं है। इन्हें सिर्फ अपनी जेब अवैध एवं दलाली पूर्वक की गई कमाई से मोटी रकम भरने से मतलब है।
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि सरगुजा में पूर्णकालीन शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी जो कि तत्कालीन नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी रह चुके है इनके ऊपर नर्सिंग होम एक्ट के प्रभारी रहते हुए कई बड़े बड़े गंभीर आरोप भी लग चुके है जिसमें एक मामला सुर्खियों में था जिसमें इनके निजी अस्पताल दयानिधि में भर्ती मरीज से पैसे लेने सरकारी अस्पताल में FIR करवाने एवं मीडियाकर्मियों से हुज्जतबाजी करने का विडियो वायरल हुआ था तब शासकीय डॉक्टर काफी सुर्खियों में छाए हुए थे।

आपको बता दे कि संदीप त्रिपाठी ने नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी होने का जम कर फायदा उठाया और अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी धर्मपत्नी के नाम से संचालित निजी अस्पताल दयानिधि जो कि कन्या परिसर रोड़ विशुनपुर अंबिकापुर जिला सरगुजा में स्थित है । को नियम विरुद्ध तरीके से फायदा पहुंचाते हुए करोड़ों रुपए का भुगतान आयुष्मान भारत योजना के तहत फर्जी तरीके से प्राप्त कर लिया ।

जबकि वर्ष 2022 में विभाग द्वारा उक्त हॉस्पिटल में लिफ्ट एवं रैंप नहीं होने के साथ अन्य कई कमियों का हवाला देते हुए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना के तहत पंजीयन करने को मना कर दिया था बावजूद उसके डॉक्टर संदीप त्रिपाठी अपने नर्सिंग होम एक्ट के प्रभारी होने का फायदा उठाते हुए आयुष्मान कार्ड योजना का पंजीयन अपने निजी अस्पताल दयानिधि में करते हुए लगभग 5 से 6 करोड़ रुपए का भुगतान करवा लिया जबकि आज दिनांक तक उक्त निजी अस्पताल दयानिधि में लिफ्ट रैंप की कमियां बरकरार है बावजूद उसके आयुष्मान भारत योजना का पंजीयन तमाम कमियों के बावजूद करवा लिया गया जिसको संदीप त्रिपाठी के पद का दुरुपयोग ही माना जा सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि उक्त दयानिधि हॉस्पिटल जिसे पूर्णकालीन शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी ने अपने आप को उक्त हॉस्पिटल का स्वामी स्वघोषित करते हुए 09 बेड वाले अस्पताल को तमाम सुविधाओं को दरकिनार करते हुए कई कमियों के बावजूद अपने नर्सिंग होम एक्ट के प्रभारी होने के कारण पद का दुरुपयोग करते हुए 11 बेड और बढ़वा लिया जो कि नियम विरुद्ध तरीके से ही होना माना जा रहा है जो कि जांच का विषय बना हुआ है।
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि सरगुजा के तत्कालीन कलेक्टर विलास भोस्कर ने कई शिकायतों एवं खबर प्रकाशन के बाद डॉक्टर संदीप त्रिपाठी को नर्सिंग होम एक्ट के प्रभार से हटाने का आदेश देते हुए दयानिधि निजी हॉस्पिटल में जारी आयुष्मान योजना एवं लिफ्ट, रैंप की कमी, बिना पार्किंग के मेन सड़क किनारे संचालित होने वाले निजी अस्पताल जिसमें 09 बेड की जगह किसके जांच उपरांत 11 बेड बढ़ाकर कुल 20 बेड के अस्पताल संचालन की अनुमति प्राप्त की की जांच करने का निर्देश दिया।

जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग के JD अनिल शुक्ला ने CMHO पी एस मार्को को भी पत्राचार करते हुए मामले की जांच करते हुए जांच रिपोर्ट मांगी थी परन्तु तत्कालीन कलेक्टर विलास भोस्कर के स्थानांतरण होने से CMHO पी एस मार्को साहब को अपने चहेते डॉक्टर संदीप त्रिपाठी को बचाने का आधार एवं अवसर मिल गया।
विशेष सूत्रों से प्राप्त जानकारी से शासकीय डॉक्टर अपने निजी अस्पताल से लगभग 5-6 करोड़ के फर्जी भुगतान प्राप्त करके स्वयं के नाम वाली लगभग 65 से 70 लाख की कार से शहर में धूल उड़ाते हुए घूम रहे है।
जिस हिसाब से डॉक्टर संदीप त्रिपाठी के द्वारा कई कार जिसकी कुल कीमत करोड़ों में है में धड़ल्ले से भ्रमण कर रहे है उससे विभाग को इनके चल अचल संपत्ति की भी जांच करने की जरूरत है कि एक शासकीय डॉक्टर 65 से 70 लाख की एक कार एवं अन्य कई कार अपने स्वयं के नाम से लेकर घूम रहा मतलब कि यह स्पष्ट होता दिख रहा है कि शासन के राजकोष को अपने निजी अस्पताल दयानिधि हॉस्पिटल में फर्जी तरीके से आयुष्मान कार्ड योजना के तहत भुगतान प्राप्त कर मौज काट रहे हैं एवं मरीज एवं मरीजों के परिजन सिर्फ शिकायत करने तक ही सीमित हो जा रहे है कार्यवाही कुछ नहीं हो पा रही।

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि तत्कालीन कलेक्टर विलास भोस्कर ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया था कि उक्त तमाम मामले की जांच करते हुए तत्काल प्रभाव से डॉक्टर संदीप त्रिपाठी को नर्सिंग होम एक्ट के प्रभार से पृथक किया जाए एवं आयुष्मान कार्ड योजना के माध्यम से दयानिधि हॉस्पिटल को नियम विरुद्ध तरीके से लाभ पहुंचाने एवं कई कमियों के बावजूद अस्पताल में 09 बेड से बढ़ाकर टोटल बेड की संख्या 20 करने के मामले में अगर डॉक्टर संदीप त्रिपाठी की शालिप्ता है तो तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्यवाही भी की जावे परन्तु CMHO साहब की मेहरबानी से डॉक्टर संदीप त्रिपाठी पर अभी जांच लंबित है।
विशेष सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्तमान में जिला अस्पताल में बैठे CMHO साहब की भी कहानी यही है कि CMHO साहब का स्वयं का भी प्राइवेट क्लिनिक लखनपुर में संचालित हो रहा है जिसके वजह से CMHO साहब स्वयं सरकारी अस्पताल में 11 बजे आना एवं लखनपुर में संचालित प्राइवेट क्लिनिक जो कि CMHO पी एस मार्को के द्वारा ही संचालित किया जाता है उसमें 4:00 बजे से अपने निजी मरीजों को देखने की होड़ में शासकीय कार्य अगर रुकता हैं रुके. मतलब साफ हैं यहां CMHO पी एस मार्को के साथ वही वाली कहानी है कि चोर चोर मौसेरा भाई जब CMHO साहब खुद प्राइवेट क्लिनिक में मरीज देख रहे है तब वह क्या डॉक्टर संदीप त्रिपाठी एवं दीपक गुप्ता के ऊपर कार्यवाही करेंगे।

अब देखने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग में लगातार नजर बनाए रखने वाले एवं स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने वाले नवनियुक्त सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत CMHO पी एस मार्को के उड़ते पर को कतरते हुए इस शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी जो कि बेखौफ होकर अपने निजी स्वार्थ को साधते हुए शासन के आंखों में धूल झोंक कर करोड़ों का भुगतान निजी अस्पताल दयानिधि के माध्यम से ले रहे है और शासकीय अस्पतालों से मरीजों को अपने निजी अस्पताल में इलाज भर्ती कर पैसा उगाही करने वाले डॉक्टर पर अब क्या कार्यवाही करते है।

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि सरगुजा जिला में डॉक्टर संदीप त्रिपाठी निजी अस्पतालों में माफियाओं वाली भूमिका का संचालन कर रहे है जिसका उदाहरण है डॉक्टर दीपक गुप्ता जो कि स्वयं शासकीय अस्पताल में हमर लैब का सहायक प्रभारी है बावजूद उसके जिला सरगुजा, जशपुर, बलरामपुर तीनों जिला में लगभग 10-12 निजी अस्पतालों में संचालित पैथोलैब में अपने नाम एवं सिग्नेचर वाली रिपोर्ट धड़ल्ले से प्रदान की जा रही है जिसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।

ये CMHO एवं डॉक्टर संदीप त्रिपाठी के साथ साथ डॉक्टर दीपक गुप्ता किसी भी अधिकारी को अधिकारी समझने को तैयार ही नहीं इनका सिर्फ एक ही मंसूबा है अवैध उगाही खुलेआम भ्रष्टाचार करना और अवैध उगाही से प्राप्त धन की कुछ छिटे CMHO पर भी मारना यह एक अत्यंत गंभीर मामला है जिसे सरगुजा के नवनियुक्त कलेक्टर अजीत वसंत को समझने एवं जांच करवाने की जरूरत है।
जिसके बाद सरगुजा जो कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में से एक है वहां आम नागरिकों के लिए सरकार से प्राप्त तमाम योजनाओं का लाभ सीधा – सीधा मिल सके।

