18/09/2026
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60 किमी दूर मैनपाट के पशुपालकों को छोड़ अंबिकापुर में चहेतों की मलाईदार पोस्टिंग; कार्रवाई के बजाय राजनीतिक रसूख और संरक्षण की चर्चाएं तेज….

सरगुजा समय अंबिकापुर (सरगुजा): सरगुजा जिले के पशु चिकित्सा विभाग में संलग्नीकरण (अटैचमेंट) का मामला अब प्रशासनिक मनमानी से आगे बढ़कर गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का रूप ले चुका है। आरटीआई कार्यकर्ता परवेज आलम की शिकायत और सामने आए आधिकारिक दस्तावेजों ने यह उजागर किया है कि उप संचालक डॉ. आर. पी. शुक्ला केवल नियमों को ताक पर रखकर ही काम नहीं कर रहे, बल्कि सरगुजा कलेक्टर से लेकर नवा रायपुर स्थित संचालनालय तक को आधी-अधूरी नोटशीट के जरिए अंधेरे में रख रहे हैं।


राजनीतिक रसूख और संरक्षण की धौंस पर चर्चा गर्म मामला मीडिया में आने और शिकायत दर्ज होने के बाद विभाग के गलियारों में चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, उप संचालक खुले तौर पर विभागीय मंत्री और उच्च राजनीतिक संपर्कों का हवाला देते हुए खुद को पूरी तरह ‘अछूता’ बता रहे हैं। विभाग के अंदरूनी गलियारों में यह सवाल तेजी से गूंज रहा है कि क्या इस पूरे प्रशासनिक संगठन और संलग्नीकरण के खेल को ऊपर से खुला संरक्षण प्राप्त है? क्या अवैध पदस्थापनाओं और नियमों की अनदेखी के पीछे किसी बड़े रसूख और सांठगांठ की ढाल काम कर रही है, जिसके चलते उच्चाधिकारियों के निर्देशों की भी खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं?

कागजी कलाकारी एवं अवैध खेल करती हुए नोटशीट में छुपाई गई हकीकत:- उप संचालक अपने बचाव में जिस नोटशीट और कलेक्टर के अनुमोदन की ढाल ले रहे हैं, असल में वही फाइलों की हेराफेरी का सबसे बड़ा प्रमाण है।

स्वीकृत पद भरे होने के बावजूद नया एवं बड़ा खेल:–  जिला पशु चिकित्सालय अंबिकापुर में 2 पद पहले से स्वीकृत और भरे हुए हैं। इसके अतिरिक्त उप संचालक कार्यालय परिसर (डी.आई. लैब, मोबाइल यूनिट, कृत्रिम गर्भाधान केंद्र, केंद्रीय वीर्य संग्रहालय) में 10 से अधिक पशु चिकित्सक पहले से मौजूद हैं।

10 डॉक्टरों को छोड़ 60 किमी दूर से क्यों?: यदि मुख्यालय में 24 घंटे आपातकालीन सेवा का बहाना था, तो परिसर में मौजूद 10 डॉक्टरों की ड्यूटी लगाने के बजाय 60 किलोमीटर दूर वनांचल मैनपाट (कमलेश्वरपुर) से डॉ. सलिमा मिंज को अंबिकापुर बुलाने की क्या मजबूरी थी? यह तथ्य कलेक्टर से पूरी तरह छुपाया गया।

संचालनालय के आदेश की गलत व्याख्या: नवा रायपुर संचालनालय का 2021 का पत्र स्पष्ट कहता है कि “स्थानीय/निकटस्थ संस्थाओं से वैकल्पिक व्यवस्था की जाए”। क्या 60 किमी दूर स्थित दुर्गम क्षेत्र ‘निकटस्थ’ की श्रेणी में आता है? यह सीधे तौर पर उच्चाधिकारियों को भ्रामक जानकारी देने का मामला है।

एक हाथ से आदेश रद्द, दूसरे हाथ से दोबारा अटैचमेंट
अखबारों में खबर आने के बाद विभाग ने 25 अगस्त 2025 को दिखावे के लिए आदेश क्रमांक 797 जारी कर 6 कर्मचारियों का संलग्नीकरण समाप्त करने का ढोंग रचा, लेकिन उसी दौरान समानांतर नोटशीट चलाकर मैनपाट से चिकित्सक को दोबारा मुख्यालय में पदस्थ करा लिया गया।

प्रभावित कर्मचारी जिनका संलग्न कारण समाप्त करने का आदेश जारी किया गया परंतु आज दिनांक तक यह समस्त कर्मचारी आज भी संलग्न होकर कार्य कर रहे हैं जिसमें :-
डॉ० रूपेश कुमार सिंह – वरिष्ठ पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ 
श्री उमेश कुशवाहा – सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी 
श्री नीरज सिन्हा – परिचारक 
श्रीमति सलीमा मिंज – सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी 
श्री कृष्णा राम – पट्टीबंधक 

तमाम भ्रामक एवं मनमौजी कार्यवाई के मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग:- शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष विजिलेंस या उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। कलेक्टर और शासन को गुमराह करने, वनांचल के पशुपालकों के अधिकारों की अनदेखी करने तथा कथित राजनीतिक रसूख की आड़ में नियम विरुद्ध कार्य करने के आरोप में उप संचालक डॉ. आर. पी. शुक्ला के खिलाफ तत्काल कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। एवं विभागीय मंत्री से तगड़ा सम्बन्ध होने का हवाला देते भयादोहन करने वाली चर्चाओं का भी जाँच होना चाहिए की क्या सच में डॉ शुक्ला के ऊपर मंत्री का आशीर्वाद प्राप्त है जिसके कारण यह खुलेआम नियम विरुद्ध कार्य कर रहे है या फिर मंत्री का नाम बदनाम कर रहें है।

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