सरगुजा समय अंबिकापुर :- विशुनपुर कन्या परिसर रोड स्थित दयानिधि अस्पताल और उसके संचालक डॉ.
सरगुजा समय अंबिकापुर :- विशुनपुर कन्या परिसर रोड स्थित दयानिधि अस्पताल और उसके संचालक डॉ. संदीप त्रिपाठी की कार्यशैली को लेकर सरगुजा में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। गलत ऑपरेशन और इलाज के चलते कई मरीजों के स्थायी रूप से अपाहिज हो जाने का मामला लगातार गरमाता जा रहा है। अब इस मामले में नया मोड़ तब आ गया जब पीड़ित राजकुमार श्रीवास्तव ने डॉ. त्रिपाठी और उनके दलालों पर सुलह के बहाने बुलाकर ब्लैकमेल करने और फोन पर गंभीर धमकियां दिलवाने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि कलेक्ट्रेट में लिखित शिकायत दर्ज होने के बावजूद अब तक प्रशासन इस पूरे मामले में हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठा है।
इलाज और मुआवजे का लालच देकर बुलाया, फिर शुरू हुआ धमकियों का सिलसिला:- पीड़ित राजकुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कोहनी के गलत ऑपरेशन से उनका हाथ स्थायी रूप से खराब हो चुका है। जब उन्होंने इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई, तो डॉ. संदीप त्रिपाठी और उनके दलालों ने मामले को रफा-दफा करने का दांव चला। पहले राजकुमार के पास फोन करवाकर और घर पर बिचौलिए भेजकर कहा गया कि डॉक्टर साहब दोबारा उनका पूरा इलाज करा देंगे और जो शारीरिक नुकसान हुआ है, उसकी पूरी क्षतिपूर्ति (मुआवजा) भी देंगे।
भरोसा करके जब राजकुमार श्रीवास्तव बातचीत के लिए आगे बढ़े, तो सुलह की जगह ब्लैकमेलिंग का खेल शुरू हो गया। आरोप है कि मिलने बुलाने के बाद उन पर दबाव बनाया गया और जब उन्होंने समझौते से इनकार किया, तो अज्ञात नंबरों से फोन करवाकर उन्हें सीधे तौर पर धमकियां दिलवाई जाने लगीं ताकि वे अपनी शिकायत वापस ले लें।
कई लोग हो चुके हैं स्थायी रूप से अपाहिज, जीवन भर का मिला दर्द
यह मामला सिर्फ एक पीड़ित तक सीमित नहीं है। डॉ. संदीप त्रिपाठी के हाथों इलाज और ऑपरेशन कराने वाले कई अन्य मरीज भी स्थायी रूप से दिव्यांगता (अपाहिजपन) के शिकार हो चुके हैं। मरीजों का कहना है कि ठीक होने की उम्मीद लेकर वे अस्पताल गए थे, लेकिन लापरवाही भरे इलाज ने उन्हें जिंदगी भर के लिए लाचार बना दिया। इन सभी पीड़ितों की व्यथा और साक्ष्य कलेक्टर के सामने रखे जा चुके हैं।
कलेक्टर के चौखट पर न्याय की गुहार, पर प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल:- कई मरीजों के जीवन से खिलवाड़ और पीड़ित राजकुमार श्रीवास्तव को लगातार मिल रही धमकियों के बावजूद जिला प्रशासन की ओर से अब तक डॉ. त्रिपाठी या उनके दयानिधि अस्पताल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। शिकायतें फाइलों में दबी होने के कारण अस्पताल प्रबंधन के हौसले बुलंद हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि अगर जल्द ही दोषी डॉक्टर के खिलाफ सख्त दंडात्मक कदम नहीं उठाए गए और पीड़ितों को सुरक्षा नहीं दी गई, तो वे मामले को उच्च स्तर तक ले जाने को मजबूर होंगे।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डॉ संदीप त्रिपाठी के दलालों के द्वारा एक और आवेदक गोविंद को भी लगातार फोन पर संपर्क करके बुलाने का प्रयास किया जा रहा है जिसे भी क्षतिपूर्ति देने का बात करते हुए भ्रमित एवं गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है इसके दलाल कई बार उसको फोन पर संपर्क कर चुके हैं।
