13/05/2026
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कलेक्टर से पहले उप संचालक क़ृषि से दबाव पूर्वक नियम विरुद्ध तरीके राजसात की कार्यवाही के लिए टीम बनवाने वाला सोहन भगत अब अख़बार में खबर प्रकाशन के लिए भी दें रहा दबाव..

 

सरगुजा समय अंबिकापुर :- सरगुजा समय के द्वारा विजय ट्रेडिंग कंपनी के द्वारा कई फर्जी किसानों के नाम से 40-50 बोरा उर्वरक एवं निर्धारित दर से अधिक दर में उर्वरक बेचने कों लेकर खबर सर्वप्रथम प्रकाशन किया था जिसके बाद उक्त विजय ट्रेडिंग के ऊपर जाँच क़ृषि विभाग के द्वारा की गई जिसमे विजय ट्रेडिंग के द्वारा किये उर्वरक की अवैध सप्लाई फर्जी किसानों के नाम से उर्वरक बेचना एवं निर्धारित दर से अधिक दर में बेचने की सत्यता पाई गई जिसमे विभाग ने विजय ट्रेडिंग कंपनी कों सील कर दिया उसके बाद विभाग कों राजसात की कार्यवाही करनी थी।

 

परन्तु उसी वक्त अंबिकापुर में उर्वरक निरिक्षक सोहन भगत जो भ्रष्टाचार के मामले में वो गन्दी मछली हैं की जिस विभाग एवं जिला में रहेगा वहां के सम्बंधित अफसर कों अपना भ्रष्टाचारी वाले नियत के आगोश में ले बैठेगा।

 

यह पहला उर्वरक निरिक्षक हैं जिसे विभागीय कार्य के बारे में तनिक भी अनुभव नहीं हैं अगर किसी चीज में अनुभव हैं तो भ्रष्टाचार घूसखोरी शासकीय सम्पति की हेरा फेरी इस तरह के कार्य इस अधिकारी के द्वारा पूर्व में भी किया जा चूका हैं जिसका केस इस भ्रष्टाचारी अधिकारी के द्वारा न्यायालय में लड़ा जा रहा है।

 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरगुजा के वर्तमान कलेक्टर अजीत वसंत अपने ईमानदारी एवं नियम पूर्वक कार्य करने के बारे में एवं बेईमान एवं भ्रष्ट अफसर के ऊपर कार्यवाही करने में तनिक भी नहीं लापरवाही बरतते हैं. लेकिन यह भ्रष्ट अफसर सोहन भगत जो की उर्वरक निरिक्षक के पद पर अंबिकापुर क़ृषि विभाग में पदस्थ हैं ने अपने निजी लाभ विजय ट्रेडिंग कंपनी जिसके करोड़ों रूपए के उर्वरक कों शासन के द्वारा राजसात की कार्यवाही करना था उसे बचाने के लिए जिसके लिए उर्वरक निरिक्षक ने 10-15 लाख की डील कर रहे थे और डील फ़ाइनल नहीं होने पर नियम विरुद्ध तरीके से उप संचालक क़ृषि अंबिकापुर से राजसात की कार्यवाही के लिए टीम बनवा डाला जिससे विजय ट्रेडिंग के ऊपर दबाव बना लाखों रूपए वाली डील फ़ाइनल कर सके। लेकिन वर्तमान कलेक्टर जो की अपने ईमानदारी के लिए ही जाने जाते हैं एक टीम बना दिया जिससे उर्वरक निरिक्षक के तमाम अवैध रूप से लाखों की कमाई वाले अरमानों में पानी फिर गया।

 

आपकी जानकारी के लिए बता दें की राजसात की कार्यवाही करने का अधिकार जिला कलेक्टर कों होता हैं ना की उप संचालक क़ृषि का बावजूद उसके कलेक्टर द्वारा राजसात की टीम बनाने से एक माह पहले ही नियम विरुद्ध तरीके से राजसात की कार्यवाही के लिए टीम का गठन सोहन भगत के इसारे एवं दबाव पर उप संचालक पीताम्बर दीवान ने बना डाला।

इससे यह स्पस्ट करता हैं की सोहन भगत किस कदर विजय ट्रेडिंग के करोड़ों के उर्वक कों बचाने एवं बतौर रिश्वत के लाखों लेने के लिए आतुर थे जिसके कारण उप संचालक क़ृषि से दबाव पूर्वक नियमविरुद्ध तरीके से कलेक्टर के अधिकार वाले कार्य की उप संचालक से करवा लिया गया और विडंबना देखिये की उप संचालक कृषि पीताम्बर दीवान ने राजसात की कार्यवाही के लिए टीम गठन भी कर दिया जिसका अधिकार ही इस अधिकारी के पास नहीं हैं मतलब इसका अर्थ स्पस्ट हैं की घूसखोरी में मिलने वाले रकम में उप संचालक क़ृषि सरगुजा पीताम्बर दीवान कों भी उर्वरक निरिक्षक सोहन भगत द्वारा हिस्सा दिया जा सकता था इसी कारण अधिकार से बाहर जाकर उप संचालक ने राजसात फर्जी टीम बना डाली।

विजय ट्रेडिंग कंपनी ने राजसात की कार्यवाही के लिए टीम बनाये हुए सरगुजा कलेक्टर कों भी लगभग एक माह होने कों हैं राजसात की कार्यवाही में नोडल अधिकारी अंबिकापुर SDM फागेश सिन्हा कों बनाया गया हैं अब यह भी देखने वाली कार्यवाही हैं की राजसात की कार्यवाही कब तक होती हैं।

 

विजय ट्रेडिंग कंपनी के राजसात की कार्यवाही के लिए सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत के द्वारा बनाये गए टीम से जब उर्वरक निरिक्षक सोहन भगत विजय ट्रेडिंग कंपनी से अवैध रूप से लाखों रूपए नहीं मिलने का सपना चूर चूर हो गया तब इस अधिकारी के द्वारा सरगुजा समय अख़बार के सम्पादक शुभांकुर पाण्डेय के पर्शनल नंबर में व्हाट्सप्प के माध्यम से कलेक्टर के द्वारा जारी आदेश जिसमे विजय ट्रेडिंग पर राजसात की कार्यवाही के लिए टीम बना हैं कों भेजते हुए खबर छापने के लिए आदेशित किया जाता हैं।

 

सोहन भगत के व्हाट्सप्प मैसेज एवं खबर छापने के लिए दिए आदेश कों देखकर ऐसा प्रतीत होता हैं की सरगुजा समय अख़बार का स्वामी एवं अख़बार इस घूसखोर सोहन भगत का गुलाम हैं जबकि सरगुजा समय एवं अख़बार का स्वामी वह आग हैं जिसके सामने भ्रष्टाचारी घूसखोरी वाले अफसरों की दाल तनिक भी नहीं गलती जिसका जीता जागता  उदाहरण सरगुजा कृषि विभाग में एक अन्य अफसर भी है जो की सरगुजा समय के द्वारा ही उसके घूसखोरी के मामले में खबर प्रकाशन किया गया था जिसमे उक्त अफसर कों निलंबित किया गया था।

उर्वरक निरिक्षक सोहन भगत के किसी भी धमकी चमकी से अख़बार एवं अख़बार के स्वामी कों कोई फर्क नहीं पड़ता हैं क्योंकि वर्षो से इतिहास गवाह हैं की जिस भ्रष्टाचारी अफसर की पोल सरगुजा समय समाचार पत्र ने खोली वह पहले निलंबित एवं अंततः निर्णय शासकीय सेवा समाप्त होता हैं।

 

उर्वरक निरिक्षक सोहन भगत के लिए नसीहत :- सरगुजा समय अख़बार एवं उसके संपादक कों डराने धमकाने एवं पैसे के दम पर अपने गुड़गान करने वाले खबर छापने की उम्मीद ना करें क्योंकि आपने किसी अन्य अख़बार के चाटुकार कों जो पाल रखा हैं उस अख़बार के चाटुकार से यहाँ तुलना नहीं करें और रही बात आपके धमकी की तो डरता तो मै किसी से नहीं हु साहब 🙏

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