‘भ्रष्टाचार की चाशनी’ में डूबे SDO सुजीत गुप्ता! पूर्व में किया करोड़ों का गोलमाल फिर गौरेला-पेंड्रा हुआ तबादला लेकिन फिर बलरामपुर ‘अटैचमेंट’ कराकर जल संसाधन विभाग में मचा रहे लूट ?
सरगुजा समय बलरामपुर- रामानुजगंज : बलरामपुर-रामानुजगंज जिले का जल संसाधन विभाग इन दिनों घोटालों के दलदल में धंसा हुआ है। इस पूरे भ्रष्टाचार का ‘मास्टरमाइंड’ एक ऐसे अधिकारी को माना जा रहा है, जिसका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड किसी से छिपा नहीं है। चर्चा है कि पूर्व में सब-इंजीनियर पद पर रहते हुए करोड़ों के घोटाले के आरोपी रहे सुजीत गुप्ता, तबादले के बाद भी अपनी ‘भ्रष्टाचार की लत’ से बाज नहीं आ रहे हैं।

गौरेला-पेंड्रा का मूल पद, फिर भी बलरामपुर से मोह भंग नहीं हो रहा पूर्व में भ्रष्टाचारी वाली ‘मलाई’ से नहीं छूट पा रहा पीछा?
सूत्रों के अनुसार, सुजीत गुप्ता की मूल पदस्थापना गौरेला-पेंड्रा जिले में है। बावजूद इसके, उन्होंने अपनी जुगाड़ू कार्यशैली के दम पर बलरामपुर जिले में खुद को अटैच करवा लिया है। जानकारों का कहना है कि सुजीत गुप्ता को बलरामपुर-रामानुजगंज की ‘भ्रष्टाचार की चाशनी’ इतनी भा गई है कि वे अपने गृह क्षेत्र में भी दोहरी जिम्मेदारी (रामानुजगंज और बलरामपुर SDO का प्रभार) संभाल रहे थे। जिसमें बड़े मान मनउवत के बाद SDO साहब ने रामानुजगंज का प्रभार छोड़ा, SDO सुजीत गुप्ता नियम विरुद्ध कार्य करने के लिए जाने जाते हैं पूरा राज्य एवं खुद जल संसाधन विभाग जानता हैं की कैसे सुजीत गुप्ता नियम विरुद्ध कार्य करते हुए भ्रष्टाचार करके हर जिले में अपने लिए अचल संपत्ति बना रहे हैं। इस तरह के कार्यशैली और ‘पैसे की अंधी चाहत’ के आगे उन्हें किसी कानून एवं कार्यवाही का डर नहीं है।

बिना काम, लाखों का भुगतान: जल संसाधन विभाग बना ‘लूट का केंद्र’,
रामानुजगंज बलरामपुर में अनोखा मामला देखने को मिला हैं हर विभाग में पहले कार्य कराया जाता हैं उसके बाद भुगतान किया जाता हैं, जल संसाधन विभाग में पहले भुगतान हो जाता हैं फिर कार्य करना हैं तो करो नहीं तो पैसा जमा करो। आरोप है कि कार्यपालन अभियंता (EE) नारायण प्रसाद डहरिया और SDO सुजीत गुप्ता की जुगलबंदी ने शासन को लाखों की चपत लगाई है। बिना एक ईंट लगाए, डीपी कंस्ट्रक्शन और संजय कुमार गुप्ता जैसे ठेकेदारों को लाखों रुपये का भुगतान जारी कर दिया गया। जब मामला पकड़ में आने लगा, तो सबूत मिटाने के एवं कार्य करवाने के लिए बलरामपुर का पूरा दफ्तर ही रातों-रात गायब कर दिया गया था ।


’घोटालेबाज’ होने के बावजूद सत्ता की छत्रछाया, सुशासन की सरकार को भ्रष्टाचारी अधिकारी सुजीत गुप्ता ही क्यों पसंद?
हैरत की बात यह है कि जिस SDO पर करोड़ों रुपये के गबन का मामला दर्ज हो और जो पुलिस की रडार पर हो, उसी के हाथ में जिले के जल संसाधन विभाग की चाबियां थमा दी गई हैं। लोगों का कहना है कि सुजीत गुप्ता का भ्रष्टाचार करने का अनुभव इतना पक्का है कि वे घोटाले करके भी आसानी से बच निकलते हैं।
क्या यही कारण हैं की सुशासन वाली विष्णुदेव साय सरकार में एक SDO सुजीत गुप्ता को भ्रष्टाचार करने के लिए खुल्ला छूट दे रखा हैं ऐसा मना जा सकता हैं क्योंकि जिसने अपने सब इंजिनियर के पोस्ट में रहते हुए बलरामपुर रामानुजगंज जिला में कई करोड़ रूपए का वारा न्यारा कर दिया यहाँ तक की सर्वे के कई करोड़ रूपए हजम कर गया वह अधिकारी अब अपने प्रमोशन पाने और SDO बनने के बाद ना जाने किन किन महत्वपूर्ण योजनाओं की राशि को अपने भ्रष्टाचारी वाले कार्यशैली एवं नियत से हजम कर जायेगा यह देखने वाली बात हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अब खबर यह है कि बिना कार्य कराए भुगतान करने के मामले में अधीक्षण अभियंता को शिकायत मिलने के बाद स्पष्टीकरण तो मांगा गया था लेकिन इस भ्रष्ट SDO एवं कार्यपालन अभियंता ने अधीक्षण अभियंता को भी ठेंगा दिखा दिया, सवाल यह उठता है कि क्या शासन इस ‘फर्जी भुगतान’ की निष्पक्ष जांच कराकर इन अधिकारियों पर FIR दर्ज करेगा, या फिर ये अधिकारी इसी तरह सरकारी खजाने को अपना निजी कोष समझते रहेंगे?
विशेष सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार SDO सुजीत गुप्ता अपने मूल पदस्थापना गोरेला पेंड्रा से तबादला करवा कर फूल फ्लेस पोस्टिंग बलरामपुर रामानुजगंज जिला में करवाने मंत्रालय में किसी साहब को कार्य करवाने की लिए लगभग 10 लाख रूपए का चढ़ावा चढ़ाया गया हैं? अब इस बात में कितनी सच्चाई हैं यह तो कहा पाना मुमकिन नहीं हैं लेकिन शहर में चर्चा जोरो पर हैं की बलरामपुर रामानुजगंज जल संसाधन में बे हिसाब काम लाया जा रहा हैं और यही पोस्टिंग करवाने के लिए मंत्रालय में चढ़ावा चढ़ाया गया हैं।

इस तमाम मामले में बलरामपुर वर्तमान कलेक्टर क्या कार्यवाही करती हैं यह भी देखने वाली बात हैं क्योंकि तत्कालीन कलेक्टर राजेंद्र कटारा के समय यह मामला संज्ञान में आया था लेकिन कलेक्टर महोदय की इस पुरे मामले में कार्यवाही के जगह चुप्पी क्यों थी यह समझ से परे हैं।

