सरगुजा समय अंबिकापुर (सरगुजा): छत्तीसगढ़ में ना जाने कितने इंजन की सरकार एवं कितने इंजन के विपक्ष हैं यह समझ पाना अब आम नागरिकों के लिए असम्भव सा होता दिख रहा हैं। यहाँ बने का वाहवाही सब लूटने को तैयार हैं लेकिन बिगड़े का सुध लेने वाले कोई नहीं फिर चाहे सत्ता भाजपा की हो या कांग्रेस की, आम नागरिक सड़क पर धान का रोपा लगा ले या फिर इन नेताओं से लेकर आला अफसरों का पिंडदान एवं श्राद्ध करवा ले सरगुजा में सड़कों की दुर्दशा से निजात मिलना असम्भव प्रतीत होता दिख रहा हैं।
बता दें की छत्तीसगढ़ में भाजपा के विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच अंबिकापुर की ग्राम पंचायत ठाकुरपुर एक ऐसी तस्वीर पेश कर रही है, जो प्रशासनिक और राजनीतिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। यहाँ का मुख्य मार्ग पिछले कई वर्षो सड़क नहीं, बल्कि एक ‘तालाब’ एवं मौत का कुआँ बन चुका है, लेकिन न तो प्रशासन को इसकी फिक्र है और न ही क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा की बेहाल स्थिति देखते हुए लगता हैं की यहाँ चुनावी वादे धरे रह गए, जनता झेल रही ‘नरक’
ठाकुरपुर के निवासियों का कहना है कि जब चुनाव आते हैं, तो बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता घरों तक आते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद वही नेता इस सड़क की ओर मुड़कर देखना भी मुनासिब नहीं समझते। क्षेत्र के विधायक और सांसद की इस मामले में चुप्पी स्थानीय जनता के साथ छलावा साबित हो रही है। ग्रामीणों ने कई बार जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें कोरे आश्वासन ही मिले।
मासूम बच्चों एवं मरीजों का भी इन नेताओं को नहीं हैं ख्याल,स्कूली बच्चों और मरीजों के लिए यह जानलेवा मार्ग
इस सड़क की बदहाली का खामियाजा सबसे अधिक मासूम स्कूली बच्चों और अस्पताल जाने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। इस घटिया सड़क के कारण मासूम बच्चों का भविष्य जोखिम में आता दिख रहा हैं। जहाँ छोटे-छोटे बच्चों को स्कूल आने जाने के लिए हर दिन घुटनों तक भरे गंदे और संक्रामक पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। वही जवाबदार इस घटिया सड़क में सुध लेने में बजाये अपने एयर कंडीसन वाले चेम्बर में बैठ हवा खा रहे हैं।
हॉस्पिटल तक पहुंचना मुश्किल: इस मार्ग पर स्थित हॉस्पिटल’ तक पहुंचने के लिए एम्बुलेंस का गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है। समय पर इलाज न मिल पाने के कारण किसी भी मरीज के साथ अनहोनी हो सकती है, जिसके जिम्मेदार अंततः वे जनप्रतिनिधि होंगे जो इस उपेक्षा के मूक गवाह बने हुए हैं।
अब देखने वाली बात यह हैं की खबर प्रकाशन के बावजूद इस मामले को विधायक सांसद एवं विभागीय अधिकारी गंभीरता से लेते हैं या फिर यह मामला ऐसे ही गर्त में रहता हैं और जवाबदारी इस मामले से अपना मुँह छुपाते नजर आते हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस सड़क को पंचायत से कागजों में बनवा कर पैसा भी निकलवा लिया गया हैं लेकिन धरातल में सड़क अब भी मौत का कुआँ और तालाब बना पड़ा हैं।

