सरगुजा समय अंबिकापुर :- जिस हिसाब से सरगुजा में वर्तमान कलेक्टर के बेबाकी एवं ईमानदारी वाली छबि की चर्चा पुरे शहर में हो रही हैं उस पर ग्रहण लगाने का कार्य सरगुजा कलेक्टर कार्यालय के कुछ अफसर कर रहे हैं, विभाग के कुछ अफसर सम्बंधित अधिकारी को कलेक्टर के निर्देश पर कार्यवाही करने से बाधित कर रहे हैं ऐसा प्रतीत होता दिख रहा हैं।
ऐसा हम नहीं कहा रहे बल्कि सरगुजा कलेक्टर कार्यालय की कार्यशैली पर उठते सवाल बयां कर रहे हैं, आपकी जानकारी के लिए बता दें की सरगुजा कलेक्टर से सरगुजा समय के संपादक ने पत्राचार करते हुए शिकायत किया था जिसमें त्रिभुवन सिंह पटवारी के नियम विरुद्ध तरीके से विदेश यात्रा करने की बात कही गई थी जिसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए सरगुजा कलेक्टर ने जाँच के निर्देश दिए थे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें की इन दिनों सरगुजा जिले में प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है। सरकारी कर्मचारी त्रिभुवन सिंह द्वारा बिना अनुमति के की गई ‘विदेश यात्रा’ का मामला अब एक बड़ी प्रशासनिक पहेली बन गया है।
कलेक्टर के सख्त निर्देशों के बावजूद तीन महीने बीतने के बाद भी विभागीय अधिकारी जांच पूरी करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए हैं। जिससे यह माना जा सकता हैं की जाँच अधिकारीयों को निष्पक्ष जाँच करने एवं जाँच रिपोर्ट प्रस्तुत करने में समस्या उत्पन्न हो रही हैं या फिर त्रिभुवन सिंह पर कार्यवाही नहीं करने का अंदरूनी फरमान किसी बड़े नेता, भू माफीया या कोई अफसर का होगा यह माना जा सकता हैं।
सरगुजा के ईमानदार कलेक्टर के द्वारा जाँच के लिए आदेश का असर इनके ही विभाग के सफसरों के सामने शून्य होता दिखाई दें रहा?
‘राष्ट्रीय हिंदी सरगुजा समय’ के संपादक शुभांकुर पाण्डेय द्वारा सरगुजा कलेक्टर से की गई शिकायत के बाद, कलेक्टर कार्यालय ने 5 मई 2026 को धौरपुर के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को मामले की जांच कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का स्पष्ट आदेश दिया था। लेकिन जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारी के इस फरमान को धौरपुर के अनुविभागीय अधिकारी ने जिस तरह ‘ठंडे बस्ते’ में डाल रखा है, वह प्रशासनिक जवाबदेही पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
कलेक्टर के निर्देश को तीन महीने, बीत गए और त्रिभुवन सिंह का विदेश यात्रा और जाँच रिपोर्ट अभी भी सिर्फ ‘कागजी खानापूर्ति’ के अधर में ?
जांच की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 14 मई 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), धौरपुर ने शिकायतकर्ता शुभांकुर पाण्डेय से ही तीन दिन के भीतर साक्ष्य मांगे थे। शिकायतकर्ता ने तत्परता दिखाते हुए प्रक्रिया का पालन किया, और जाँच अधिकारी को पत्राचार के माध्यम से अपना जवाब प्रस्तुत कर दिया, लेकिन उसके बाद मामला फाइलों की धूल में कहीं दब गया।
तीन महीने बाद भी जांच रिपोर्ट का न आना यह साबित करता है कि या तो विभागीय स्तर पर त्रिभुवन सिंह को बचाने की पूरी ताकत झोकी जा चुकी हैं इस कारण जाँच करने में घोर लापरवाही बरती जा रही है, या फिर नियमों को ताक पर रखने वाले कर्मचारी पटवारी त्रिभुवन सिंह को विभागीय ‘संरक्षण’ दिया जा रहा है।
क्या पटवारी त्रिभुवन सिंह के रसूख भू माफीयाओं से सीधा सम्बन्ध एवं अन्य कुछ दलाल पटवारी, आर आई एवं तहसीलदार की संलिप्ता के कारण बरसाई जा रही ‘विशेष कृपा’ एवं इसी कारण जांच में हो रही देरी?
क्या प्रशासनिक अधिकारी कलेक्टर के आदेशों को केवल एक ‘औपचारिकता’ मानते हैं? जिस तरह से मामला तीन महीने से लटका हुआ है, उससे यह स्पष्ट है कि धौरपुर प्रशासन की कार्यशैली अब सवालों के घेरे में है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें की इस पुरे मामले में जाँच अधिकारी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व लुंन्ड्रा से जानकारी लेने के लिए फोन किया गया था परन्तु साहब ने फोन नहीं उठाया जिस कारण इस जाँच मामले में उनका पक्ष नहीं लिया जा सका गया।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार त्रिभुवन सिंह अकेला कर्मचारी नहीं हैं जो की भू माफीयाओं के साथ मिलकर जमीन दलाली करके फर्श से अर्श तक का सफर तय किया हैं, सूत्रों की माने तो जमीन दलाली के मामले में सरगुजा जिला के कुछ दलाल पटवारी, आर आई, एवं तहसीलदार की मिलीभगत हैं जिसके कारण से शहर में जमीन खरीदी बिक्री के नाम पर जम कर फर्जीवाड़ा किया जा रहा हैं।
इस मामले की फाइलों में हो रही देरी यह संकेत दे रही है कि भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कलेक्टर के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों को धौरपुर के अधिकारी पलीता लगा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस मामले में सामने आती है या फिर यह ‘खास’ कर्मचारी प्रशासनिक गठजोड़ के दम पर साफ बच निकलता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें की पटवारी त्रिभुवन सिंह के विरुद्ध खबर प्रकाशन ना करने के लिए जगह जगह से धमकी दिलवाई जा रही हैं एवं इन लोगों का वह ग्रुप जिसके द्वारा मिल कर जमीन दलाली की जा रही हैं ये सभी मिल कर मुझे धमकाने फ़साने एवं जान से मरवाने के लिए आपस में व्हाट्सएप्प व्हाट्सअप खेल रहे हैं। जिसका खुलासा जल्द करते हुए त्रिभुवन सिंह के गुरु जो इस खेल के माहिर खिलाडी है उसका पर्दाफास करते हुए आम नागरिकों एवं अधिकारीयों के सामने लाऊंगा।

