14/05/2026
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सरगुजा समय अंबिकापुर छत्तीसगढ़ :- अंबिकापुर के निजी दयानिधि अस्पताल के स्वघोषित स्वामी संचालक शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी पुरे स्वास्थ्य विभाग महकमा को अपने क़दमों के निचे ला डाला है ऐसा माना जा सकता है, इन महोदय के ऊपर किसी प्रकार की कार्यवाही करने का साहस स्वास्थ्य विभाग उच्च अधिकारी नहीं कर पा रहे है।

जिस हिसाब से स्वास्थ्य विभाग का पूरा का पूरा अमला इस शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी पर मेहरबान है उससे यह माना जा सकता है की स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस डॉक्टर को गोद ले लिया हो जिस कारण इस डॉक्टर के द्वारा तमाम गोलमाल एवं नियमविरुद्ध कार्य करने के बावजूद लगातार मंत्री एवं स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी बनी हुई है।

आपकी जानकारी के लिए बता दे की डॉक्टर संदीप त्रिपाठी के द्वारा शासकीय सेवक के रूप मे जमकर शासकीय नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए अपने निजी दयानिधि अस्पताल को अनुचित लाभ पहुंचाया गया लेकिन विभाग के आला अफसर के द्वारा कार्यवाही के नाम पर एक कलम तक नहीं चलाया गया।

शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी की अवैध कमाई एवं शासकीय पद पर रहते हुए नर्सिंग होम एक्ट का प्रभारी बन लगातार किए गए अवैध उगाही एवं आयुष्मान योजना के तहत नियमविरुद्ध तरीके से करोड़ों रूपए का भुगतान प्राप्त कर स्वयं आर्थिक रूप से मजबूती एवं शासन को बड़ी मात्रा मे आर्थिक छती पहुंचाया गया है।

आपकी जानकारी के लिए बता दे की लगभग 3-4 महीनों से शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी अपने शासकीय सेवक होने के कर्तव्यों से मुख मोड़ स्वयं का स्वास्थ्य ठीक नहीं होने की बात कर अवकाश हेतु आवेदन विभाग के दे दिया है परन्तु एक अस्वस्थ्य डॉक्टर निजी अस्पताल का संचालन धड़ल्ले से कर रहा है. डॉ. त्रिपाठी के दिए आवेदन को अगर सत्य माना जाये तो एक बीमार डॉक्टर अन्य मासूम इंसानों का ईलाज निजी अस्पताल मे कर उनके जान से खिलवाड़ कर रहा है और अगर डॉ. त्रिपाठी के दिए आवेदन को गलत माना जाये तो एक स्वस्थ्य डॉक्टर अपना स्वास्थ्य खराब होने की बात कर शासकीय नौकरी वह दायरा पार करने की कोसिस मे है जहाँ से इसको पेंशन मिल सके।

जिला सरगुजा अंबिकापुर सिविल सर्जन ने बताया की शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी के द्वारा आवेदन दिया गया है जिसमे वह स्वयं को अस्वस्थ्य होने के बात कहते हुए जब तक स्वास्थ्य ठीक नहीं होता तब तक कार्यालय नहीं आएंगे बताया गया है।

अजीब विडंबना है एक तरफ शासकीय डॉक्टर संदीप त्रिपाठी के द्वारा शासकीय कार्य करने मे स्वास्थ्य खराब होने का झूठा बहाना बनाते हुए आवेदन दिया जाता है वही दूसरी ओर इनकी धर्मपत्नी के नाम से संचालित दयानिधि अस्पताल जो की कन्या परिसर रोड़ विशुनपुर अंबिकापुर मे स्थित है का संचालन इस डॉक्टर के द्वारा बेखौफ होकर किया जा रहा है।

विभाग मे अवकाश के लिए डॉक्टर त्रिपाठी के द्वारा अस्वस्थ्य होने का झूठा आवेदन देना एवं निजी अस्पताल का खुलेआम बेखौफ संचालन स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के गाल पर करारा तमाचा जड़ना ही माना जा सकता है, क्योंकि जिस डॉक्टर के द्वारा विभाग को अस्वस्थ्य होने का आवेदन देकर निजी अस्पताल का संचालन कर रहा है उस डॉक्टर एवं उस निजी अस्पताल दयानिधि पर कार्यवाही करने भरपूर अधिकार स्वास्थ्य विभाग के पास है, लेकिन बावजूद उसके एक डॉक्टर ने अपने फर्जी नीतियों एवं कार्यशैली से पुरे स्वास्थ्य विभाग को भ्रमित कर अपना कार्य बनाते हुए स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी कर्मचारियों की बदनामी करवाना जैसा कृत्य लगातार किया जा रहा है ऐसा माना जा सकता है।

अब देखने वाली बात यह है की एक स्वस्थ्य डॉक्टर जिसके द्वारा शासकीय अस्पताल जहाँ से हर महीने लाखों रूपए बतौर वेतन मिलता है को उस स्वास्थ्य विभाग को भ्रमित कर अपने निजी अस्पताल के बेखौफ संचालन करने एवं विभगा को गुमराह करने के मामले मे स्वास्थ्य विभाग एवं स्वास्थ्य मंत्री के द्वारा क्या कार्यवाही की जाती है।

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