15/10/2026
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सरगुजा समय अंबिकापुर :- पवित्र पर्व और पारंपरिक उत्सवों के नाम पर अब व्यावसायिक मुनाफे का खेल खुलेआम चलने लगा है। आस्था, संस्कृति और पारंपरिक भक्ति के प्रतीक माने जाने वाले गरबा-डांडिया आयोजनों में ग्लैमर का तड़का लगाकर टिकटों और पास के नाम पर मोटी रकम वसूलने की नई परंपरा शुरू हो चुकी है। अंबिकापुर के लगभग कई निजी होटलो में यह आयोजन किया जाना है जिसमें बड़े बड़े ग्लैमर कों लाखों करोड़ों देकर बुलवाया जाता है और उसके बाद खेल चालू होता है टिकट बेचकर मुनाफा कमाना और सम्बंधित तमाम विभागों कों अपने पैरों की धूल में रखना।

आपकी जानकारी के लिए बता दें की ऐसा ही मामला सरगवां में 15 और 16 अक्टूबर को आयोजित ‘डांडिया रास सीजन-4’ कार्यक्रम हो रहा है जहाँ इस मामले कों लेकर अब शहर में तीखी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या भक्ति और परंपरा का नाम सिर्फ महंगे टिकट बेचने और अवैध उगाही का जरिया बनकर रह गया है?

बॉलीवुड और भोजपुरी स्टार्स के नाम पर 5 हजार रुपये तक के पास:- पोस्टर और प्रचार सामग्री के मुताबिक, कार्यक्रम में भीड़ खींचने के लिए बॉलीवुड अभिनेत्री उर्वशी रौतेला और भोजपुरी अभिनेत्री अक्षरा सिंह जैसी हस्तियों को बुलाया गया है। साधारण एंट्री पास से लेकर वीआईपी पास तक की दरें 699 रुपये से लेकर 4,999 रुपये तक तय की गई हैं। ग्रुप पास के लिए 2,299 रुपये से लेकर 4,199 रुपये तक की दरें रखी गई हैं। ऑनलाइन पोर्टल और निजी नंबरों के जरिए धड़ल्ले से टिकटों की बिक्री की जा रही है।

छोटे व्यापारियों पर डंडा, रसूखदारों के आगे भीगी बिल्ली क्यों?
शहर में चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि आम दिनों में अगर कोई छोटा दुकानदार, गुमटी संचालक या मध्यम व्यापारी अपने बिल-वाउचर या रिटर्न में मामूली सी चूक भी कर दे, तो जीएसटी विभाग तुरंत नोटिस थमा देता है और जांच के नाम पर शिकंजा कस दिया जाता है। लेकिन जब खुलेआम पोस्टर और वेबसाइट के जरिए ₹699 से लेकर ₹4,999 तक के महंगे पास बेचे जा रहे हैं, तब जीएसटी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे क्यों बैठे हैं?

भक्ति के नाम पर GST चोरी और करोड़ों की कमाई विभाग कों ठेंगा दिखा धड़ल्ले से चल रहा बिना टैक्स दिए करोड़ों रुपये कमाई का पूरा खेल:- GST विभाग जो अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए सम्बंधित तमाम ऐसे आयोजको पर कार्यवाही करना चाहिए जो सरकार कों गुमराह करके भक्ति के नाम पर करोड़ों की कमाई तो कर रहें है परन्तु टैक्स के नाम पर जीरो बट्टा सन्नाटा वाला हाल कर दें रहें है।

सबसे विचारणीय बात यह है की क्या आयोजकों द्वारा अब तक बेचे गए ऑफलाइन और ऑनलाइन टिकटों के जीएसटी इनपुट और आउटपुट की कोई जांच की गई है? और अगर नहीं तो क्यों क्या रसूखदार व्यापारियों के जूते की नोक पर सम्बंधित विभाग सलामी ठोकने कों मजबूर और छोटे व्यापारियों पर कार्यवाही करने में दिलेरी दिखाता है।


जिस हिसाब से शहर में अवैध होर्डिंग में लगे विज्ञापन दिखाया गया है उससे तो यह ही समझ में आता है की बड़े और पहुंच वाले आयोजकों के सामने आते ही क्या विभाग के नियम-कायदे ठंडे बस्ते में चले जाते हैं? जब शहर में खुलेआम पोस्टर और वेबसाइट के जरिए ₹699 से लेकर ₹4,999 तक के महंगे पास बेचे जा रहे हैं, तब जीएसटी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे क्यों बैठे हैं?

करोड़ों रुपये के इस कमाई के पूरे खेल में आयोजकों द्वारा अब तक बेचे गए ऑफलाइन और ऑनलाइन टिकटों के जीएसटी इनपुट और आउटपुट की कोई जांच की गई है? क्या सेलिब्रिटी फीस, लग्जरी वेन्यू और करोड़ों के टिकट बिक्री के लेन-देन का कोई ऑडिट तय किया गया है? या सम्बंधित विभाग भी कार्यवाही करने के जगह कम्मल ओढ़ कर घी पिने वाले कहावत कों चरितार्थ कर रहा है।

करोड़ों की कमाई निजी जेब में, और सुरक्षा में पसीना बहाए पुलिस! इस पूरे आयोजन में सबसे अजीब पहलू यह है कि मुनाफा पूरी तरह से निजी आयोजकों की तिजोरी में जा रहा है, जबकि कानून-व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा संभालने के लिए पूरी पुलिस फोर्स झोंक दी जाती है।


जनता के टैक्स के पैसे से चलने वाला पुलिस प्रशासन निजी व्यावसायिक कार्यक्रमों में सुरक्षा पहरेदार की तरह सेवाएं देता नजर आता है। सवाल उठता है कि जब आयोजक एक-एक पास के 5-5 हजार रुपये वसूल रहे हैं, तो क्या पुलिस बल की तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था का कोई कमर्शियल शुल्क (Police Bandobast Charges) सरकारी खजाने में जमा कराया गया है? क्या आम जनता की सुरक्षा को दरकिनार कर निजी ग्लैमरस शो को वीआईपी प्रोटेक्शन देना उचित है?

भक्ति की आड़ में शुद्ध बाजारीकरण नवरात्रि जैसे पावन पर्व के नाम पर ग्लैमर तड़का और करोड़ों की कमाई पर सख्त कार्यवाही की जरुरत :- स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग का साफ कहना है कि मां भगवती की भक्ति के नाम पर आस्था का खुला बाजारीकरण किया जा रहा है। जब तक जिला प्रशासन और वाणिज्यिक कर विभाग ऐसे करोड़ों के आयोजनों की वित्तीय पारदर्शिता की जांच नहीं करता, तब तक सरकारी तंत्र की निष्पक्षता पर सवाल उठते रहेंगे। अब देखना यह है कि क्या जीएसटी विभाग अपनी साख बचाते हुए इस पर कोई ठोस कदम उठाता है या रसूख के आगे चुप्पी ही साधे रहता है।

अंबिकापुर के तमाम निजी होटलो एवं रिसोर्ट में खुलेआम भक्ति के नाम श्रद्धालुओं को भक्ति रंग में डूबने का सपना दिखाकर ग्लैमर की दुनिया में ले जाकर छोड़ने का कार्य यह सब आयोजन करता कर रहे हैं जिसपर बड़ी कार्रवाई करने की आदत आवश्यकता देखने वाली बात यह है कि संबंधित विभाग इतना होने के बावजूद कार्रवाई करता है कि फिर हाथ पैर हाथ बैठेगा रसूखदार व्यापारियों की रसूख के आगे नतमस्तक होते हुए चरण वंदन करते रहेंगे।

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