सरगुजा समय अंबिकापुर :-
:- स्मार्टफोन प्राइवेसी, सोशल मीडिया सुरक्षा और साइबर अपराध की स्थिति में शिकायत प्रक्रिया से कराया गया अवगत
डिजिटल युग में ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा नागरिकों कों साइबर अपराधों से बचाने के उद्देश्य से प्रदेश भर में छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा एक विशेष ‘साइबर जागृति अभियान’ चलाया जा रहा है।
उपरोक्त अभियान डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा राजेश अग्रवाल (भा.पु.से.) के कुशल मार्गदर्शन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रितेश चौधरी के नेतृत्व में सरगुजा पुलिस द्वारा इस सप्ताह महिलाओ एवं छात्राओं के लिए विशेष रूप से जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन कर महिला कॉलेजों की छात्राओं, महिला सामुदायिक समूहों तथा विभिन्न महिला संगठनों से जुड़ी महिलाओं कों जागरूक किया जा रहा है।
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिलाओं और छात्राओं को स्मार्टफोन की प्राइवेसी सेटिंग्स, सुरक्षित ब्राउज़िंग और सोशल मीडिया अकाउंट्स को सुरक्षित रखने के व्यावहारिक तरीकों के बारे में विस्तार से जागरूक किया गया।
स्मार्टफोन प्राइवेसी एवं सुरक्षित ब्राउज़िंग:- स्मार्टफोन में उपलब्ध प्राइवेसी सेटिंग्स को मजबूत करने, ऐप्स को अनावश्यक परमिशन (जैसे कैमरा, गैलरी, लोकेशन) न देने और इंटरनेट का सुरक्षित उपयोग करने के तरीके बताए गए।
सोशल मीडिया अकाउंट की सुरक्षा:- फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) लागू करने और प्रोफाइल लॉक करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया ताकि कोई अन्य उनकी जानकारी का दुरुपयोग न कर सके।
संदिग्ध लिंक और फर्जी वेबसाइटों से बचाव:- लॉटरी, इनाम, मुफ्त रिचार्ज या फर्जी नौकरियों के नाम पर आने वाले संदिग्ध लिंक (फिशिंग) को न खोलने और फर्जी वेबसाइटों की पहचान करने की ट्रेनिंग दी गई।
व्यक्तिगत जानकारी साझा करने के जोखिम:- ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपनी निजी तस्वीरें, लाइव लोकेशन, आधार नंबर और बैंक से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां साझा करने से होने वाले नुकसानों के प्रति सचेत किया गया साथ ही ऑनलाइन उत्पीड़न से बचाव के लिए साइबर स्टॉकिंग, बुलिंग और अवांछित संदेशों से निपटने के लिए सोशल मीडिया ऐप्स में उपलब्ध ब्लॉक और रिपोर्ट टूल्स का सही उपयोग करना सिखाया गया।
संवादात्मक सत्र और शिकायत प्रक्रिया:- कार्यक्रम को पूरी तरह संवादात्मक रखा गया, जहाँ छात्राओं ने साइबर सुरक्षा से जुड़े अपने सवाल, अनुभव और शंकाएं पुलिस टीम के सामने रखीं। पुलिस अधिकारियो/कर्मचारियों द्वारा उनका सरल भाषा में समाधान किया गया। सत्र के दौरान महिलाओं को बताया गया कि यदि वे किसी भी प्रकार के साइबर अपराध या ऑनलाइन उत्पीड़न का शिकार होती हैं, तो वे बिना डरे पुलिस से संपर्क कर सकती हैं। उन्हें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) और टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1930 के बारे में जानकारी दी गई, जहाँ पीड़ित महिला की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाती है।
