सरगुजा समय अंबिकापुर:- सरगुजा कलेक्ट्रेट में इन दिनों प्रशासनिक मर्यादा और कायदे-कानूनों की खुलेआम धज्जियां
सरगुजा समय अंबिकापुर:- सरगुजा कलेक्ट्रेट में इन दिनों प्रशासनिक मर्यादा और कायदे-कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिले के मुखिया की सख्त और ईमानदार छवि पर उनके ही मातहत अफसरों की मनमानी भारी पड़ रही है। बिना शासन की अनुमति के विदेश की सैर कर लौटे करोड़पति पटवारी त्रिभुवन सिंह का मामला अब केवल एक अदने कर्मचारी की अनुशासनहीनता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह कलेक्ट्रेट की नाक के नीचे चल रहे संरक्षण और सांठगांठ के बड़े खेल में तब्दील हो चुका है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अब इस पूरे प्रकरण में सीधे तौर पर अपर कलेक्टर सुनील नायक की संलिप्तता की उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है, ताकि यह बेनकाब हो सके कि किसके शह पर कलेक्टर के आदेशों को कचरे की टोकरी में डाला जा रहा है।
कलेक्टर का ‘7 दिन का अल्टीमेटम पर मातहतों का ’90 दिन का सन्नाटा’ कार्यवाही शून्य बट्टा सन्नाटा।

कलेक्टर अजीत वसंत ने 5 मई 2026 को धौरपुर एसडीएम को स्पष्ट आदेश जारी कर सात दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट तलब की थी। शिकायतकर्ता ने 14 मई को ही धौलपुर एसडीएम के द्वारा जारी पत्र का जवाब पोस्ट के माध्यम से जांच अधिकारी की टेबल पर रख दिए थे।
बावजूद इसके 90 से ज्यादा दिन कलेक्टर के विभागीय दलाल अफसर के हस्तक्षेप के कारण जांच फाइल कलेक्ट्रेट के गलियारों से बाहर नहीं आ सकी। सवाल उठता है कि जब जिले का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी किसी जांच के लिए एक हफ्ते का समय तय करता है, तो किस अधिकारी की शह पर उस फाइल को तीन महीने तक दबाकर रखा जाता है यह अत्यंत गंभीर एवं विचारणीय के साथ-साथ जांच का विषय है।
अपर कलेक्टर सुनील नायक की भूमिका पर गंभीर सवाल
कलेक्ट्रेट के अंदरूनी सूत्रों और शिकायतों के मुताबिक, जिले के राजस्व तंत्र में वर्षों से कुछ रसूखदार अफसर कुंडली मारकर बैठे हैं, जिनके इशारे पर पटवारियों और राजस्व निरीक्षकों (RI) के मलाईदार हल्कों की पोस्टिंग से लेकर तबादलों तक की पटकथा आर्थिक स्थिति के वजन के अनुसार लिखी जाती है।

इस पूरे मामले में अपर कलेक्टर सुनील नायक की कार्यशैली और भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं एवं जांच को दबाने का खेल चलाने की बात उठ रही है :- क्या कलेक्ट्रेट स्तर पर बैठे अफसरों के दबाव और हस्तक्षेप के चलते धौरपुर-लुंड्रा के जांच अधिकारी कलम चलाने से कतरा रहे हैं? यह भी एक गंभीर मुद्दा है जिस पर सरगुजा के मुखिया को विचार करने की अत्यंत आवश्यकता है।
सिंडिकेट का संरक्षण: जमीन दलाली और रसूख के दम पर नियम तोड़ने वाले दागी पटवारी त्रिभुवन सिंह को बचाने के पीछे कलेक्ट्रेट के किन वरिष्ठ अफसरों का अभयदान प्राप्त है यह भी एक गंभीर मुद्दा है जिस पर उच्च स्तरीय जांच करवाने की आवश्यकता है जिस पर सरगुजा संभागआयुक्त से लेकर रायपुर में बैठे आला अफसर एवं मंत्रालय में बैठे तमाम विभागीय दिग्गजों के ऊपर है क्या यह दलाल पटवारी तमाम आला अफसर के कार्रवाई करने वाले कलाम को खरीदने की ताकत रखता है जिसके कारण आज दिनांक तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
उच्चस्तरीय और स्वतंत्र जांच ही एकमात्र विकल्प:- सरकारी सेवा शर्तों को ठेंगे पर रखकर पासपोर्ट बनवाने और विदेश भागने वाले पटवारी त्रिभुवन सिंह पर तीन महीने तक कोई कार्रवाई न होना इस बात का प्रमाण है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। स्थानीय स्तर पर अब मांग उठ रही है कि राज्य शासन और संभागीय आयुक्त को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। जब तक इस पूरे मामले में अपर कलेक्टर स्तर के अधिकारियों की भूमिका और संलिप्तता की किसी स्वतंत्र एजेंसी या वरिष्ठ समिति से जांच नहीं कराई जाती, तब तक न तो सच सामने आएगा और न ही प्रशासनिक जवाबदेही तय हो सकेगी।

जिस प्रकार रसूखदार एवं कथित भूमि माफीया शासकीय सेवक पटवारी त्रिभुवन सिंह के ऊपर अवैध रूप से बिना शासन के अनुमति के विदेश यात्रा करने करने का आरोप लगा एवं लगातार आय से अधिक संपत्ति होने का दवा स्थानीय आम नागरिकों के द्वारा किया आरोप के माध्यम से किया जा रहा है उसे स्पष्ट होता है कि यह पटवारी अपने दलाली पूर्वक कृत्य से सरगुजा के कई तत्कालीन कलेक्टरों को अपने आर्थिक मजबूती के दम पर लाभ दिलवाने के कारण आज दिनांक तक किसी प्रकार की वैधानिक कार्रवाई से बचने में सफलता हासिल किया है।
अजीब विडंबना है की बिना अनुमति विदेश यात्रा करने वाले पटवारी त्रिभुवन सिंह ने विदेश यात्रा किया है की नहीं के जाँच करने के नाम पर आर्थिक लाभ अर्जित करने वाले जाँच अफसर सम्बंधित पटवारी के पासपोर्ट की जाँच नहीं कर पा रहे की वह विदेश यात्रा किया है की नहीं या फिर यह कहा जा सकता है की अवैध तरीके से विदेश यात्रा करने वाले पटवारी त्रिभुवन सिंह को बैक डेट में दस्तावेज तैयार करवाने के कोशिश में बेतुका प्रयास में समर्थन कर रहे है। क्योंकि सिर्फ पासपोर्ट जाँच कर लेने से पता चल जायेगा की त्रिभुवन सिंह ने विदेश यात्रा किया की नहीं।
लेकिन इसी कड़ी में अब जिसमें सरगुजा वर्तमान कलेक्टर अजीत वसंत के द्वारा अपनी ईमानदारी पूर्वक छवि को सरगुजा जिला में व्याप्त करने की अथक प्रयास किया जा रहा है उसी प्रयास को यह पटवारी एवं इसके बचाव पक्ष के कलेक्ट्रेट के कुछ दलाल अफसर कलेक्टर की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। अब देखने वाली बात यह है कि ईमानदारी पूर्वक छवि एवं नियम विरुद्ध कार्य करने वाले अवसरों पर कार्रवाई करने के मामले में वर्चस्व बताने वाले अजीत वसंत त्रिभुवन सिंह के ऊपर क्या कार्रवाई करते हैं।
