सरगुजा समय अंबिकापुर :- जिले में रसूख और पद के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां पशु चिकित्सा सेवाएं, अंबिकापुर के उप संचालक डॉ. राजेंद्र प्रसाद शुक्ला निजी कार क्रमांक CG 04 QA 6448 पर धड़ल्ले से ‘छत्तीसगढ़ शासन’ और ‘डिप्टी डायरेक्टर’ की पट्टी लगाकर शहर में घूमते नजर आ रहे हैं। जब मीडिया ने इस नियम विरुद्ध कृत्य पर सवाल उठाया, तो अधिकारी महोदय जवाब देने के बजाय संपादक से ही फोन पर उलझ पड़े और उल्टा पत्रकार को ही नसीहत देने लगे। की सभी के गाड़ी में छत्तीसगढ़ शासन लिखा है मेरे से क्या दिक्कत है बहुत बड़े पत्रकार हो इस लिए दिक्कत हो रहा है। डॉ शुक्ला ने संपादक को फोन पर यह भी बोला की नियम है मेरा पद डिप्टी डायरेक्टर का है तो लिखा हूं कोई गलत नहीं है।
सवाल पूछते ही भड़के अधिकारी, दिया अजीबोगरीब तर्क
‘सरगुजा समय’ के संपादक द्वारा जब डॉ. शुक्ला से निजी वाहन पर शासकीय पदनाम और शासन का नाम लिखवाने के संबंध में विधिक पक्ष पूछा गया, तो वे अपनी गलती मानने के बजाय तैश में आ गए। उन्होंने जवाबदेही से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि “बाकी लोगों की गाड़ी पर भी लिखा रहता है, तब आपको तकलीफ नहीं होती, केवल मेरे वाहन से ही दिक्कत क्यों है?”
एक जिम्मेदार पद पर बैठे राजपत्रित अधिकारी का यह गैर-जिम्मेदाराना जवाब शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
क्या कहता है कानून और नियम?
मोटर व्हीकल एक्ट का खुला उल्लंघन: केंद्रीय मोटर वाहन नियम और हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) नियमों के मुताबिक, किसी भी निजी वाहन की नंबर प्लेट या बॉडी पर पद, विभाग या शासन का नाम लिखना गैर-कानूनी है।
पद का दुरुपयोग: निजी वाहन पर ‘छत्तीसगढ़ शासन’ लिखकर शासकीय प्रभाव दिखाना पद के दुरुपयोग और सिविल सेवा आचरण संहिता के सीधे उल्लंघन की श्रेणी में आता है।
‘समानता का गलत तर्क’ अमान्य: कानून की नजर में यदि दस लोग गलत कर रहे हैं, तो उससे ग्यारहवें व्यक्ति का अपराध जायज नहीं हो जाता।
प्रशासनिक निष्पक्षता पर बड़ा सवाल
आम जनता पर मामूली नंबर प्लेट की त्रुटि पर तत्काल चालानी कार्रवाई करने वाली पुलिस और परिवहन विभाग क्या ऐसे रसूखदार अधिकारियों पर शिकंजा कसेंगे? अब निगाहें जिला प्रशासन, संभागीय आयुक्त और पशुधन विकास विभाग के उच्चाधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं।
