सरगुजा समय छत्तीसगढ़/ रायपुर /अंबिकापुर/कोरिया /लखनपुर:- सरगुजा में कृषि विभाग के उप संचालक पी एस दीवान अपने कार्यशैली से इस कदर चर्चित हो गए है की इनकी भ्रष्ट कार्यशैली एवं रिश्वतखोरी के आरोपी अफसरों को संरक्षण प्रदान करना किसानों के उर्वरक को कालाबाजारी करना जैसे कार्य करने वाले लोगों को बड़े आसानी से संरक्षण प्रदान कर रहे है जिससे चर्चाओं बाजार गर्म है एवं ऐसा लगातार इनकी कार्यशैली से प्रतीत होता दिख रहा है।, दीवान साहब की इस तरह की कार्यशैली से क़ृषि मंत्री राम विचार नेताम के साख एवं लोकप्रियता पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है जिसके कारण मंत्री महोदय के जनाधार को कम करने का कार्य भी DDA दीवान साहब कर रहे है ऐसा मासूम किसानों एवं ग्रामीणों के बिच चल रहे चर्चाओं से पता चला।
सरगुजा जिला में इन दिनों क़ृषि विभाग में अगर किसी का नाम सबसे ज्यादा चर्चित है तो वह साहब उप संचालक क़ृषि पी एस दीवान है ये महोदय अपनी कार्यप्रणाली, प्रशासनिक अराजकता और गंभीर भ्रष्टाचार के चलते जिला से लेकर छत्तीसगढ़ की राजधानी तक में काफ़ी सुर्खियों में है।
जहाँ इन महानुभाव दीवान साहब के द्वारा एक तरफ शासकीय नीतियों और किसानों के हितों को ताक पर रख दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ भ्रष्ट और रिश्वतखोर अधिकारियों को उच्च स्तर पर खुला संरक्षण प्रदान कर रहे है। भ्रष्ट अफसरों पर दीवान साहब का संरक्षण इस कदर बरस रहा है कि इनके सामने राष्ट्रीय आयोगों और शासन के स्पष्ट निर्देशों को भी सरेआम ठेंगा दिखा जा हैं।
इसी क्रम में उप संचालक के चहेते माने जाने वाले विनायक पाण्डेय की रिश्वतखोरी और प्रताड़ना का काला चिट्ठा लम्बी शिकायतों के बाद खुला तो जरूर लेकिन DDA साहब ने इस भ्रष्ट विनायक पाण्डेय को बचाने का पूरा जिम्मा उठा लिया है ऐसा प्रतीत होता दिख रहा है क्योंकि यह पूरा मामला लखनपुर के तत्कालीन प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी समय के कार्यकाल से जुड़ा हुआ है, जहाँ विनायक पाण्डेय की कार्यशैली लंबे समय से विवादों के घेरे में रही है।
विनायक पाण्डेय के ऊपर पूर्व में लगे रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप: विभागीय गलियारों और स्थानीय स्तर पर चर्चा आम है कि विनायक पाण्डेय द्वारा प्रशासनिक पदों का दुरुपयोग कर अवैध वसूली और रिश्वतखोरी का खेल खुलेआम चलाया जाता था जिसके बाद विनायक पाण्डेय का 10 हजार रूपए लेन देन करने एवं सैम्पल पास करने के बातचीत का पूरा वीडियों वायरल भी हुआ था जिसके बाद विभाग ने विनायक पाण्डेय को निलंबित करते हुए एक वेतन वृद्धि रोकने का कार्य किया था। परन्तु दीवान साहब के आशीर्वाद से इस विनायक पाण्डेय के जाँच को पुनः चालू करवा विनायक पाण्डेय के बतौर प्रमोशन ईनाम देने का लगातार अनुचित प्रयास किया जा रहा है। इस तरह के भ्रष्ट लोगों को संरक्षण देना कही ना कही क़ृषि मंत्री के ईमानदारी पूर्वक कार्य करना एवं किसानों के हित में कार्य करने वाले निर्देश का खुलेआम अवहेलना DDA दीवान साहब द्वारा किया जाना माना जा सकता है।
विनायक पाण्डेय पर विभागीय कर्मचारियों ने मानसिक उत्पीड़न एवं अभद्र व्यवहार का गंभीर आरोप भी लगाया लेकिन यहाँ भी दीवान साहब का संरक्षण काम आता दिख रहा है :- बता दें की विनायक पाण्डेय के रिश्वतखोरी के साथ-साथ आदिवासी महिला कर्मचारियों को जातिगत आधार पर प्रताड़ित करने, अवकाश के दिनों में जबरन कार्य कराने और उनका वेतन तक रोककर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के भी गंभीर आरोप हैं। इतने गंभीर मामले में भी दीवान साहब आयोग के आदेश निर्देश को कूड़ा समझ दरकिनार कर दिया।
DDA पीताम्बर सिंह दीवान का अवांछित संरक्षण:- हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों के बावजूद, उप संचालक कृषि (DDA) पीताम्बर सिंह दीवान द्वारा आरोपी विनायक पाण्डेय को हर संभव ढाल प्रदान क्यों की जा रही है। क्या विनायक पाण्डेय DDA पी एस दीवान का वह राजदार है जिसका खुलासा होते ही दीवान साहब लम्बे लपेटे में आ सकते है जिसकी वजह से विनायक पाण्डेय के ऊपर कार्यवाही करने की हिम्मत नहीं दिखा पा रहे।
विभाग के भीतर यह चर्चा आम है कि DDA दीवान ने अपने चहेते अधिकारी को बचाने के लिए विभागीय नीतियों, नियमों और कानून तमाम चीजों की खुलेआम बेखौफ होकर धज्जियां उड़ा दी हैं। जिससे यह भी माना जा सकता है की जैसे दीवान साहब पर कोरिया में करोड़ों रूपए ग़बन करने का आरोप लगा वैसे ही यहाँ सरगुजा में विनायक पाण्डेय पर आरोप लगा जिसमें यह वाला ही कहावत चरितार्थ होता है की ”चोर चोर मौसरा भाई”?
DDA दीवान साहब के द्वारा संवैधानिक संस्थाओं की अनदेखी: इस तमाम मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने गत 05/12/2025 को नोटिस जारी कर इस पूरे प्रकरण में कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी। इसके बावजूद, स्थानीय स्तर पर आरोपी को संरक्षण दिए जाने से प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है।
सरगुजा क़ृषि विभाग में DDA पी एस दीवान एवं उनके चहेते भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और संरक्षणवाद के इस नापाक गठजोड़ ने सरगुजा कृषि विभाग एवं क़ृषि मंत्री राम विचार नेताम की साख को पूरी तरह धूमिल कर दिया है। अब यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि क्या शासन स्तर से इस गहरी प्रशासनिक लापरवाही पर कोई बड़ी गाज गिरती है या फिर ऐसे ही नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाई जाती रहेंगी।
अगली खबर में हम आपको बताएँगे की कैसे उप संचालक क़ृषि पीताम्बर सिंह दीवान ने कलेक्टर के आदेश जारी होने से पहले ही विजय ट्रेडिंग कम्पनी में राजसात की कार्यवाही के लिए स्वयं ही टीम बना डाला था जिसका अधिकार ये साहब के पास है ही नहीं, इतने बड़े कारनामो के बावजूद DDA पी एस दीवान पर कार्यवाही नहीं होना, सोहन लाल भगत के रिश्वतखोरी मामले के बाद जेल से छुटने के बाद पुनः विनायक पाण्डेय जैसे अधिकारी को संरक्षण देते हुए विजय ट्रेडिंग कम्पनी में राजसात की कार्यवाही नहीं करने के पीछे क्या कारण है। ये सब बातों का खुलासा हम करेंगें।

